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सालों भर स्वस्थ रहना है तो यह चार महीने हैं आपके लिए

Updated at : 02 Dec 2025 6:06 PM (IST)
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सालों भर स्वस्थ रहना है तो यह चार महीने हैं आपके लिए

सब्जी मंडी के अलावे चौक-चौराहों के पसरौटा पर या फिर गली-मुहल्लों में फेरीवाला तरह-तरह के साग बेचता दिख ही जाता है.

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तरह-तरह के सागों का सेवन करें और बीमारी को कहें बाय-बाय- कुमार आशीष, मधेपुरा सालों भर स्वस्थ रहना है और किसी भी तरह की दवाओं से दूर रहना है तो अभी से चार महीने तक का समय आपके लिए है. सर्दी का आगमन होते ही नवंबर माह से बाजारों में हरियाली दिखनी शुरू हो जाती है. सब्जी मंडी के अलावे चौक-चौराहों के पसरौटा पर या फिर गली-मुहल्लों में फेरीवाला तरह-तरह के साग बेचता दिख ही जाता है. यह हरे पत्ते सिर्फ सब्जी के रूप में परोसा जाने वाला व्यंजन ही नहीं है, बल्कि इन सागों के अंदर शरीर के लिए सभी आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं. साग में कई तरह की बीमारियों से लड़ने, रोकने और उसे खत्म करने की क्षमता होती है. अड़कंचन और बथुआ है खून की थैली- जंगल-झाड़ में दिखने वाला चौला हरा पत्ता अड़कंचन का पत्ता कहलाता है. गांवों में इसे पेकचा पत्ता भी कहते हैं. यह लोगों के द्वारा किचेन गार्डेन में लगाया जाता है. अड़कंचन के पत्ते की सब्जी, कचरी (तरुआ), दलसग्गा (दाल के साथ डालकर बनाया जाने वाला व्यंजन) बनाया जाता है. इस पत्ते में 99 फीसदी हीमोग्लोबीन होता है. इसका सेवन शरीर में रक्त की कमी को पूरा करता है और जब शरीर में रक्त पूर्ण होता है तो रोगों से भी लड़ने में भी सक्षम होता है. इसी तरह खेतों में गेहूं बोने के बाद उसके साथ किसान वहां बथुआ के बीज भी छींट देते हैं. काफी कम समय में यह बथुआ भी उग जाता है. बथुआ का साग भी खून की थैली होता है. इसमें आयरन की मात्रा अत्यधिक होती है. यह आइवीएस, पाइल्स, फिशर, रक्तश्राव, बार हाेने वाले कब्ज की समस्या को दूर करता है. बथुआ का तासीर गर्म होने के कारण यह शरीर को गर्म रखता है. इसे भी कई रूप में बनाकर खाया जाता है. -नसों के ब्लॉकेज को दूर करता है सरसों – सरसों के पत्ते में विटामिन के और विटामिन सी की काफी अधिक मात्रा होती है. इसमें जीरो फाइबर होता है. सरसों के साग में कैलोरीज नहीं होता, जबकि पानी की अच्छी मात्रा होती है. आयरन की मात्रा भी होने के कारण यह शरीर में रक्त बनाने की प्रक्रिया को तेज करता है. इसके सेवन से नसों में हो रहा ब्लॉकेज दूर होता है. सरसों के साग को किसी भी दूसरे के साग के साथ मिलाकर बनाने से भी यह शरीर को उतना ही फायदा पहुंचाता है. -एनेमेटिक की दवा है पालक- साल में लगभग छह महीने मिलने वाला पालक कई पौष्टिक गुणों से भरा होता है. पालक के साग में बहुत ज्यादा आयरन होता है. इसके सेवन से एनेमेटिक की समस्या तो दूर होती ही है. यह शरीर की कमजोरी को दूर करने में काफी मददगार होता है. खासकर महिलाओं के लिए इसे वरदान कहा जाता है. यह मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करने की पूरी क्षमता रखता है. कब्ज जैसी समस्याओं के लिए पालक रामवाण का काम करता है. -चने के साग में होता है एंटी ऑक्सीडेंट भी- चने का साग भी शरीर के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है. चने के साग में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन ए, सी, के और बी कॉम्प्लेक्स होता है. साथ ही खनिज के रूप में आयरन, कैल्शियम, और मैग्नीशियम जैसे कई पोषक तत्व होते हैं. यह आयरन, कैल्शियम और फाइबर का एक समृद्ध स्रोत है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में होता है. चने का साग प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है. यह पाचन और वजन नियंत्रण में मदद करता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट होने के कारण यह शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. -कई गुणों से भरे होते हैं आलू और मूली के साग- आलू के साग में विटामिन सी, पोटैशियम, विटामिन बी-6, आयरन, मैंगनीज, और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये पोषक तत्व हृदय स्वास्थ्य, हड्डियों के निर्माण, और बेहतर पाचन में सहायक होते हैं. विटामिन सी एक एंटीऑक्सीडेंट है, जो स्कर्वी जैसे रोगों से बचाता है और त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है. पोटैशियम हृदय, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को मजबूत करता है. विटामिन बी-6 यह कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन के चयापचय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आयरन हड्डियों के स्वास्थ्य और ऊर्जा उत्पादन में सहायक होता है. फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और मैंगनीज ऊर्जा उत्पादन और हड्डियों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसी तरह मूली के साग में विटामिन ए, बी, सी और के, आयरन, कैल्शियम, फोलेट, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फाइबर जैसे कई पोषक तत्व होते हैं. ये पोषक तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं, हड्डियों को मजबूत करते हैं, पाचन सुधारते हैं और शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालते हैं. -डायबिटीज को कंट्रोल करता है मेथी और सोआ- सागों की दुनियां में मेथी और सोआ का विशेष महत्व होता है. इन दोनों के पत्ते अपने अंदर कई गुणों को समेटे रहते हैं. सोआ और मेथी का साग ब्लड शूगर के मरीजों के लिए सबसे बड़ी दवा है. यह डायबिटीज को कंट्रोल करता है. यह इंसुलिन बनाने में मदद करता है. सोआ और मेथी रक्त बनाने में मदद करने के अलावे बालों को झड़ने से रोकता है. सोआ और मेथी लीवर की समस्या को भी दूर करता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Kumar Ashish

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Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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