गम्हरिया में नहरों में पानी नहीं, धान की फसल संकट में, सिंचाई विभाग पर उठे सवाल

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जुलाई अंत तक पानी छोड़ने का मिला था आश्वासन, अब तक सूखी पड़ी हैं नहरें | Prabhat Khabar Network

जुलाई अंत तक पानी छोड़ने का मिला था आश्वासन, अब तक सूखी पड़ी हैं नहरें | Prabhat Khabar Network

गम्हरिया प्रखंड के किसान खरीफ सीजन में नहरों से सिंचाई न होने से परेशान हैं. लाखों रुपये खर्च के बाद भी मोहनपुर और मिठाई नहरें सूखी पड़ी हैं, जिससे धान की फसल सूखने की कगार पर है. किसान महंगे डीजल-बिजली से सिंचाई करने को मजबूर हैं.

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Bihar Canal Water Crisis: गम्हरिया प्रखंड के किसानों के लिए खरीफ सीजन इस बार चिंता और बेचैनी लेकर आया है. जिन नहरों से धान की फसलों को जीवन मिलता था, वे अगस्त की शुरुआत तक भी सूखी पड़ी हैं. सिंचाई विभाग ने जुलाई 2026 के अंत तक पानी छोड़ने का आश्वासन दिया था, लेकिन समय बीतने के बाद भी मोहनपुर और मिठाई नहर में पानी नहीं पहुंचा. अब दर्जनों गांवों के किसान अपनी फसल बचाने के लिए महंगे डीजल और बिजली से सिंचाई करने को मजबूर हैं.

धान की फसल सूखने के कगार पर

गम्हरिया प्रखंड क्षेत्र की चिकनी-फूलकाहा उप शाखा नहर के बिंदु दूरी 170.75 से निकलने वाली मोहनपुर नहर और मिठाई नहर में लंबे समय से पानी नहीं है. स्थानीय किसानों का कहना है कि नहरों में पानी की जगह धूल और झाड़-झंखाड़ दिखाई दे रहे हैं. खरीफ सीजन के सबसे महत्वपूर्ण समय में सिंचाई नहीं होने से धान की फसल सूखने के कगार पर पहुंच गई है.

ग्रामीणों के अनुसार कई गांवों में खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और रोपे गए धान के पौधे पीले पड़ रहे हैं. किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं छोड़ा गया तो इस वर्ष भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं बदली स्थिति

स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2024 में चिकनी-फूलकाहा उप शाखा नहर की सफाई और जीर्णोद्धार के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे. इसके बावजूद नहरों की वास्तविक स्थिति में कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ. उनका कहना है कि नहर की सही तरीके से सफाई नहीं होने के कारण जल प्रवाह बाधित है और पूरी परियोजना का लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा है.

किसानों के अनुसार विभाग से कई बार शिकायत करने पर यह भरोसा दिया गया था कि जुलाई 2026 के अंत तक नहर में पानी छोड़ दिया जाएगा. लेकिन अगस्त शुरू होने के बाद भी नहरें सूखी पड़ी हैं.

निजी पंपसेट के सहारे खेती, बढ़ा आर्थिक बोझ

सिंचाई के अभाव में किसान निजी पंपसेट से खेतों की पटवन कर रहे हैं. लगातार बढ़ती डीजल और बिजली की लागत ने उनकी खेती का खर्च काफी बढ़ा दिया है. छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो गई है.

किसानों का कहना है कि एक ओर सरकार कृषि उत्पादन बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर सिंचाई व्यवस्था की बदहाली के कारण खेती करना मुश्किल होता जा रहा है.

Bihar Canal Water Crisis:प्रशासन और सिंचाई विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों और किसानों ने सिंचाई विभाग के उच्च अधिकारियों तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि चिकनी-फूलकाहा उप शाखा नहर, मोहनपुर नहर और मिठाई नहर में तत्काल प्रभाव से पानी छोड़ा जाए. उनका कहना है कि यदि समय रहते सिंचाई व्यवस्था बहाल नहीं की गई तो खरीफ की पूरी फसल प्रभावित हो सकती है.

साथ ही किसानों ने नहर की सफाई और जीर्णोद्धार पर खर्च हुई राशि की निष्पक्ष जांच की भी मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नहरें पानी देने लायक क्यों नहीं बन सकीं.

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डिक्सन राज

लेखक के बारे में

By डिक्सन राज

डिक्सन राज प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. गम्हरिया (मधेपुरा) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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