Bypass Project In Bihar: बिहार को मिलेंगे 7 नए बाइपास, लंबी दूरी के लिए मिलेगा वैकल्पिक रूट, जानिए कहां-कहां बनेंगे

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सांकेतिक तस्वीर

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Bypass Project In Bihar: बिहार में रोड कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है. इस बीच अब 7 नये बाइपास निर्माण करने का निर्णय लिया गया है. इसके लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से शुरू कर दी गई है.

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Bypass Project In Bihar: बिहार में कई सड़क परियोजनाओं पर काम किए जा रहे हैं. जिलों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत की जा रही है. ऐसे में राज्य में NH पर बेहतर आवागमन सुविधा सहित शहरों को जाम की झंझट से राहत दिलाने के लिए खास प्लानिंग की गई है. राज्य में 7 नए बाइपास बनाए जायेंगे और इस पर निर्माण कार्य इसी साल के अंत तक शुरू होने की संभावना है.

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इन 7 जगहों पर बनेंगे बाइपास

जानकारी के मुताबिक, इनमें अरवल बाइपास के अलावा मांगोबंदर, केंदुआ, टोलसोनो, झाझा, नरगंजो और भैरोगंज बाइपास शामिल हैं. इन परियोजनाओं के शुरू होने से लंबी दूरी की गाड़ियों को वैकल्पिक रूट मिलेगा. साथ ही स्थानीय यातायात पहले की तुलना में अधिक सुगम हो सकेगा. निर्माण के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने शुरू कर दी है.

लोगों को मिलेगी ये राहत

सूत्रों के अनुसार, एनएच 333ए पर प्रस्तावित 6 बाइपास की कुल लंबाई 19.450 किलोमीटर होगी. इन बाइपास के निर्माण के साथ ही इसी राजमार्ग के दो डीएलपी मुक्त खंडों का भी दो लेन प्लस पक्के शोल्डर मानक के अनुसार निर्माण होगा. इन दोनों खंडों की कुल लंबाई 21.821 किलोमीटर है. परियोजना पूरी होने के बाद लोगों को जाम से मुक्ति मिलेगी. दुर्घटनाओं में कमी आयेगी. साथ ही मालवाहक और यात्री गाड़ियों की आवाजाही अधिक तेज और सुरक्षित होगी.

ईपीसी मोड के तहत होगा निर्माण

इतना ही नहीं, एनएच 139 पर नौबतपुर-हरिहरगंज रूट में अरवल बाइपास का निर्माण फोर लेन एक्सेस कंट्रोल मानक के अनुरूप किया जाएगा. यह बाइपास मौजूदा एनएच-139 के किलोमीटर 54.200 से 66.500 तक यानी करीब 12 किलोमीटर लंबाई में विकसित होगा. इस परियोजना का निर्माण ईपीसी मोड के तहत कराया जाएगा.

क्या कहना है विशेषज्ञों का?

इसे लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद संबंधित शहरों और कस्बों में जाम की समस्या में कमी आएगी. लंबी दूरी की गाड़ियों को शहरों के अंदर नहीं जाना पड़ेगा. इससे यात्रा का समय घटेगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी. बेहतर सड़क संपर्क से व्यापार, उद्योग और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है.

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