276 एकड़ जमीन अधिग्रहण का विरोध : बोले किसान- जमीन गई तो छीन जाएगा निवाला, आत्मदाह तक की दी चेतावनी
उदाकिशुनगंज. प्रखंड क्षेत्र के लश्करी गांव में दर्जनों एकड़ सरकारी और किसानों की जमीन को बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) को हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव ने तूल पकड़ लिया है. गुरुवार को लश्करी गांव में बड़ी बैठक आयोजित कर ग्रामीणों ने सरकार के इस कदम के खिलाफ भारी आक्रोश व्यक्त किया. बैठक में मौजूद सैकड़ों किसानों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी उपजाऊ भूमि किसी भी कीमत पर उद्योग के लिए नहीं देंगे. इस संबंध में जिलाधिकारी को आवेदन देकर अधिग्रहण रोकने की गुहार लगाई है.सीमांत किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट
बैठक में किसानों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वे सभी छोटे और सीमांत किसान हैं. किसी के पास महज कुछ कट्ठा तो किसी के पास एक-दो बीघा जमीन ही शेष है. किसानों का तर्क है कि खेती ही उनके जीविकोपार्जन का एकमात्र साधन है. यदि यह जमीन अधिग्रहित कर ली गई, तो उनके पास परिवार पालने और बच्चों की शिक्षा के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं बचेगा. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन द्वारा दी जाने वाली मुआवजे की राशि से उनका भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता.चरणबद्ध आंदोलन की तैयारी, मुखिया ने भरा हुंकार
पंचायत के मुखिया रजनीश कुमार उर्फ बबलू दास ने किसानों के स्वर में स्वर मिलाते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्र के लिए 276 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना इस छोटे से गांव के लिए बड़ी आफत है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया, तो ग्रामीण प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय तक आंदोलन करेंगे.प्रशासनिक प्रक्रिया के खिलाफ लामबंद हुए ग्रामीण
मालूम हो कि लश्करी पंचायत में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव आधिकारिक तौर पर आगे बढ़ चुका है. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान अब इसके खिलाफ लामबंद हो गए हैं. विरोध जताने वालों में मुख्य रूप से दिलखुश कुमार, वरुण राय, नित्यानंद यादव, राजेश्वर राव, शिवनेश्वरी राय, सीताराम यादव, फोचो यादव, चितनारायण चौधरी, मोहन यादव, लालबहादुर यादव, रमेश यादव सहित दर्जनों ग्रामीण शामिल थे.ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि औद्योगिक विकास के लिए किसी बंजर या कम उपजाऊ भूमि का चयन किया जाए, ताकि लश्करी के सैकड़ों किसानों को बेघर और बेरोजगार होने से बचाया जा सके.
——-खेती-बाड़ी कर लोग अपना पेट पाल रहे हैं. उद्योग लगने से किसानों के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी. किसानों की जमीन बचाने के लिए हम किसी भी हद तक जाएंगे. जरूरत पड़ी तो किसानों के साथ आत्मदाह करने से भी पीछे नहीं हटेंगे. —
रजनीश कुमार उर्फ बबलू दास
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