– उदाकिशुनगंज में जैव विविधता संरक्षण पर महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित-
उदाकिशुनगंज
उदाकिशुनगंज अनुमंडल मुख्यालय स्थित मां सरिता विवाह भवन में शुक्रवार को जैव विविधता संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम जैव विविधता अधिनियम, 2002 (संशोधित 2023) के तहत जैव विविधता विरासत स्थल घोषित करने की प्रक्रिया एवं उसके महत्व पर केंद्रित रहा. कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर जैव विविधता के संरक्षण, पहचान और संवर्धन को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाना था. कार्यक्रम में बिहार राज्य जैव विविधता परिषद, पटना के उपनिदेशक मिहिर कुमार झा ने जैव विविधता अधिनियम की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि राज्य के विशिष्ट जैविक, भौगोलिक एवं पारिस्थितिक महत्व वाले क्षेत्रों को जैव विविधता विरासत स्थल घोषित किया जा सकता है. ऐसे स्थल वन्यजीव, वनस्पति, भू-आकृतिक संरचना, जलस्रोत, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय जैव संसाधनों के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं. इस अवसर पर संयुक्त निदेशक हेमकांत राय एवं बिहार ग्रामीण बैंक के मनिजर सत्यजीत सुमन ने कहा कि जैव विविधता विरासत स्थल घोषित होने से क्षेत्र की पारिस्थितिकी के संरक्षण को मजबूती मिलती है और स्थानीय समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित होती है. उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया प्रारंभिक सर्वेक्षण, स्थानीय संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों द्वारा वैज्ञानिक अध्ययन तथा परिषद के तकनीकी सहयोग से पूरी की जाती है. कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि बिहार में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां समृद्ध जैव विविधता मौजूद है, लेकिन अब तक उनकी विधिवत पहचान नहीं हो पाई है. ऐसे में स्थानीय लोगों, पंचायत प्रतिनिधियों और युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. परिषद द्वारा यंग प्रोफेशनल्स की सहायता से प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी. कार्यशाला में जिला स्तरीय संयुक्त टीम, संबंधित विभागों के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, पर्यावरण प्रेमी एवं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे. अंत में सभी उपस्थित लोगों से जैव विविधता संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई.
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