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दिव्यांग खेल प्रतियोगिता बना औपचारिकता का शिकार, सिर्फ तीन प्रतिभागी, व्यवस्था पर उठे सवाल

Updated at : 11 Feb 2026 7:24 PM (IST)
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दिव्यांग खेल प्रतियोगिता बना औपचारिकता का शिकार, सिर्फ तीन प्रतिभागी, व्यवस्था पर उठे सवाल

दिव्यांग खेल प्रतियोगिता बना औपचारिकता का शिकार, सिर्फ तीन प्रतिभागी, व्यवस्था पर उठे सवाल

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मधेपुरा. खेल विभाग बिहार बिहार राज्य खेल प्राधिकरण व जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में वार्षिक खेल कार्यक्रम 2025-26 के तहत आयोजित जिला स्तरीय दिव्यांग खेल प्रतियोगिता सवालों के घेरे में आ गयी है. बीएन मंडल स्टेडियम में आयोजित इस प्रतियोगिता में दिव्यांग प्रतिभाओं को मंच देने का दावा किया गया था, लेकिन हकीकत में पूरा आयोजन महज औपचारिकता बनकर रह गया. प्रतियोगिता 30 वर्ष तक के दिव्यांग बालक व बालिकाओं के लिए आयोजित की गयी थी. कार्यक्रम के तहत एथलेटिक्स, ब्लाइंड फुटबॉल और स्लाइड क्रिकेट जैसी खेल विधाओं के साथ-साथ एक सौ मीटर व दो सौ मीटर दौड़, एक सौ मीटर साइकिल रेस, भाला फेंक और गोला फेंक जैसे इवेंट प्रस्तावित किये गये थे. स्टेडियम में व्यवस्थाएं तो दिखायी दीं, लेकिन मैदान में खिलाड़ियों की संख्या ने सबको चौंका दिया. हैरत की बात यह रही कि इतने बड़े आयोजन में महज तीन प्रतिभागियों ने ही भाग लिया. तीनों खिलाड़ी अलग-अलग स्पर्धाओं में शामिल हुये व प्रतियोगिता औपचारिक रूप से संपन्न कर दी गयी. दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता में इतनी कम भागीदारी ने खेल विभाग व जिला प्रशासन की तैयारी पर सवाल खड़े कर दिये. स्थानीय लोगों व खेल प्रेमियों का कहना है कि यदि प्रतियोगिता का समय रहते व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता, दिव्यांग खिलाड़ियों, विशेष विद्यालयों, स्वयंसेवी संगठनों और पंचायत स्तर तक सूचना पहुंचायी जाती, तो निश्चित रूप से बड़ी संख्या में प्रतिभागी शामिल हो सकते थे. उनका आरोप है कि आयोजन केवल कागजी खानापूर्ति के लिए किया गया, ताकि विभागीय औपचारिकता पूरी हो सके. दिव्यांग खिलाड़ियों के परिजन भी इस स्थिति से नाराज दिखे. उनका कहना है कि सरकार एक ओर दिव्यांगजनों को आगे बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे आयोजनों में लापरवाही उनकी प्रतिभाओं को दबा देती है. स्टेडियम में सन्नाटा और खाली मैदान खुद ही व्यवस्था की पोल खोलता नजर आया. सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस पूरे मामले पर संबंधित अधिकारी फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं. न तो कम भागीदारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने आया है और न ही भविष्य में सुधार के लिए किसी ठोस योजना की जानकारी दी गयी है.

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Kumar Ashish

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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