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बच्चों को बिना किसी भेदभाव के जन्म से ही प्राप्त है बाल अधिकार

Updated at : 13 Jul 2025 6:37 PM (IST)
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बच्चों को बिना किसी भेदभाव के जन्म से ही प्राप्त है बाल अधिकार

हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बच्चे किसी भी प्रकार के शोषण, उपेक्षा, या दुर्व्यवहार से सुरक्षित रहें.

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मधेपुरा. 17 बिहार बटालियन एनसीसी मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा के एनसीसी कैडेट्स ने महाविद्यालय के सभागार में बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण विषय पर एक संगोष्टी का आयोजन किया गया. इसमें मुख्य अतिथि बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग पटना के सदस्य डॉ सुग्रीव दास ने संगोष्टी को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों का भविष्य हमारे हाथों में है. वे हमारे समाज का भविष्य हैं, और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्हें वह सब कुछ मिले जो उन्हें एक स्वस्थ, खुशहाल और सफल जीवन जीने के लिए आवश्यक है.बाल अधिकार वे अधिकार हैं जो हर बच्चे को, बिना किसी भेदभाव के, जन्म से ही प्राप्त होते हैं. इन अधिकारों में शामिल हैं: उन्होंने कहा कि हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बच्चे किसी भी प्रकार के शोषण, उपेक्षा, या दुर्व्यवहार से सुरक्षित रहें. बाल श्रम, बाल विवाह, और बाल तस्करी जैसी प्रथाएं बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करती हैं. हमें इन प्रथाओं को समाप्त करने के लिए मिलकर काम करना होगा. डॉ सुग्रीव ने कहा बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सके. हमें बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य, और उचित देखभाल प्रदान करने के लिए मिलकर काम करना होगा. हमें बच्चों के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की भी आवश्यकता है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर व्यक्ति यह समझे कि बच्चों के अधिकारों का सम्मान करना कितना महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि भारत में, बाल श्रम को रोकने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कई कानून और नीतियां हैं. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक संवैधानिक निकाय है. यह अधिनियम बच्चों की देखभाल और संरक्षण के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा प्रदान करता है. श्री कृष्ण विश्वविद्यालय के कुलपति सह मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा के संस्थापक प्रधानाचार्य डॉ अशोक कुमार ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौता बच्चों के अधिकारों पर एक महत्वपूर्ण एवं कानूनी रूप से मान्य विश्वव्यापी मानवाधिकार समझौता है, जिसका प्रारूप 20 नवंबर 1989 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित किया गया था. वर्ष 1990 में लागू किया गया. इसे भारत ने 1992 में अंगीकृत किया था. सीआरसी के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के हर व्यक्ति को बच्चा माना गया है. इसके लिए 54 आर्टिकल में बच्चे को बिना भेदभाव के सभी अधिकारों को देने का वादा किया गया है , जिसमें मुख्य रूप में जीवन जीने का अधिकार, विकास का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार एवं प्रतिभागिता के अधिकार स्माइल हैं. उन्होंने कहा कि बाल अधिकार बच्चों के मानवाधिकार हैं. हर बच्चे के, चाहे उसकी उम्र, जाति, लिंग, धन या जन्मस्थान कुछ भी हो, अधिकार हैं. ये अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानून में बाल अधिकार सम्मेलन (सीआरसी) में निहित हैं. यह मानता है कि सभी बच्चों के साथ निष्पक्ष, समान एवं सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए . प्रधानाचार्य डॉ पूनम यादव ने कहा कि बाल संरक्षण का अर्थ है बच्चों को किसी भी प्रकार के नुकसान, शोषण, दुर्व्यवहार, उपेक्षा और हिंसा से बचाना. यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिले, जहां वे अपना विकास कर सकें. संचालन करते हुए सिंडिकेट सदस्य मेजर गौतम कुमार ने कहा कि बाल अधिकार, वे मौलिक अधिकार हैं जो प्रत्येक बच्चे को, बिना किसी भेदभाव के, जीवन जीने, विकास करने, सुरक्षा पाने और भाग लेने के लिए आवश्यक हैं।इस अवसर पर कैडेट विकास कुमार, अनु कुमारी, साकची कुमारी, सुनैना कुमारी, अंशु कुमारी आदि ने संबोधित की धन्यवाद ज्ञापन कैडेट्स विकास गिरी ने किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Kumar Ashish

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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