बदलते मौसम को लेकर रहें सतर्क, बच्चों का रखें विशेष ख्याल - डॉ इंद्र भूषण
Updated at : 03 Apr 2025 7:25 PM (IST)
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बदलते मौसम को लेकर रहें सतर्क, बच्चों का रखें विशेष ख्याल - डॉ इंद्र भूषण
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मधेपुरा.
सदर अस्पताल में इन दिनों मरीजों की भीड़ रहती है. बदलते मौसम को लेकर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. सदर अस्पताल के चिकित्सक बाल रोग विशेषज्ञ डॉ इंद्र भूषण कुमार ने कहा कि गर्मी के मौसम में बड़ों के साथ-साथ बच्चे भी बीमार पड़ते हैं. इसलिये अभिभावकों को बच्चों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत होती है. उनमें थकावट, बुखार, सर्दी जैसे लक्षण दिखें तो उन्हें हल्के में न लें.डॉ इंद्र भूषण ने कहा कि यह साल का वह समय है जब पोलन हवा में मौजूद होते हैं. जिन बच्चों को एलर्जी है उनके लिए गर्मी और उमस स्थिति को और गंभीर बना देती है. अगर बच्चा में थकावट, घरघराहट, सांस लेते समय सीटी की आवाज़, खांसी, सांस फूलने जैसे लक्षण नजर आएं, तो उन्हें नजरअंदाज न करें, क्योंकि हवा की आवाजाही में कमी धूल और मोल्ड जैसे प्रदूषकों को वायुमार्ग में फंसा सकती है. अस्थमा अटैक को रोकने या खराब होने से बचाने के लिए, बच्चे के पास होने पर किसी को भी धूम्रपान न करने दें, घरों को धूल रहित और धूल-मिट्टी से मुक्त रखें.चेचक के कारण शरीर पर हो जाते हैं चकत्ते
चेचक के कारण शरीर पर चकत्ते हो जाते हैं, बुखार, सिरदर्द होता है और इससे बच्चा सामान्य रूप से अस्वस्थ महसूस कर सकता है. उपचार का उद्देश्य बीमारी के जाने तक लक्षणों को कम करना है. यह वायरल संक्रमण आमतौर पर बच्चों को ही प्रभावित करता है, यही वजह है कि 12 से 15 महीने की उम्र के बच्चों को वैरीसेला वैक्सीन की पहली खुराक और 4 से 6 साल की उम्र के बीच दूसरी खुराक दी जानी चाहिये. क्योंकि चेचक संपर्क और हवा में मौजूद बूंदों के ज़रिये फैल सकता है, इसलिए संक्रमित बच्चे को बाहर न भेजें.मास्क पहनना है फायदे मंद
कोविड-19 महामारी ने सभी लोगों को मास्क पहनना सिखा दिया है. यह एक ऐसी आदत है जिसे महामारी के बाद भी जारी रखना फायदेमंद होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि इंफ्लूएंजा वायरस भी कोरोना वायरस की तरह ही फैलता है. आमतौर पर फ्लू सर्दियों में मौसम में ज्यादा देखा जाता है, लेकिन यह गर्मी और मौसम बदलने पर भी हो सकता है. इससे बुखार के साथ खांसी और सर्दी हो सकती है. इसलिए हाथों के सफाई और शारीरिक दूरी बनाएं. आप चाहें तो डॉक्टर की सलाह से बच्चे को फ्लू शॉट भी लगवा सकते हैं.बाहरी खाना से बच्चों को करें परहेज
बच्चों को बाहर का खाना पसंद होता है. खाने से होने वाली बीमारियां गर्मियों के मौसम में आम हो जाती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि गर्मी में खाना आसानी से खराब हो जाता है. संक्रमित व अस्वच्छ खाना खाने से दस्त और उल्टियां शुरू हो सकती है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है. यहां तक कि घर पर बने खाने को भी पुराना करके न खाने की सलाह दी जाती है.हीटस्ट्रोक का बना रहता है खतरा
बच्चों को खुले मैदान या बाहर खेलना पसंद होता है, जिससे गर्म मौसम में उन्हें लू लग सकती है. हाइपरथर्मिया एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर का तापमान असामान्य रूप से ऊंचा हो जाता है, यह संकेत देता है कि यह पर्यावरण से आने वाली गर्मी को नियंत्रित नहीं कर सकता है. गर्मी से थकावट और हीट स्ट्रोक चिकित्सा आपात स्थिति हैं जो हाइपरथर्मिया के अंतर्गत आती हैं. हाइपरथर्मिया से पीड़ित बच्चा सिर दर्द, बेहोशी, चक्कर आना, ज़्यादा पसीना आना, अकड़न जैसे लक्षणों का अनुभव कर सकता है.बच्चे को भीषण गर्मी से बचाने के लिए उस समय बाहर न भेजें, जब गर्मी चरम पर होती है. शाम होने के साथ बच्चे को बाहर खेलने भेजा जा सकता है. किसी भी तरह की परेशानी होने पर निकट तम स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से जरूर संपर्क करें.
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