सही कीमत नहीं मिलने से सांसत

Published at :24 Mar 2017 4:56 AM (IST)
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सही कीमत नहीं मिलने से सांसत

चिंताजनक . प्रखंड के आलू उत्पादक किसान का हो रहा आर्थिक शोषण इस क्षेत्र में एक भी न तो सरकारी और न ही निजी कोल्ड स्टोरेज है. इस कारण क्षेत्र के किसानों को आलू भंडारण में काफी कठिनाई हो रही है. और तो और उन्हें इस साल आलू की सही कीमत भी नहीं मिल पा […]

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चिंताजनक . प्रखंड के आलू उत्पादक किसान का हो रहा आर्थिक शोषण

इस क्षेत्र में एक भी न तो सरकारी और न ही निजी कोल्ड स्टोरेज है. इस कारण क्षेत्र के किसानों को आलू भंडारण में काफी कठिनाई हो रही है. और तो और उन्हें इस साल आलू की सही कीमत भी नहीं मिल पा रही, जिससे उनको परेशानी हो रही है.
मुरलीगंज : प्रखंड क्षेत्र के आलू उत्पादक किसान का आर्थिक शोषण हो रहा है. बाजार में उन्हें उचित कीमत नहीं मिल रहा है. आलू रखने के लिए भंडारण नहीं रहने से किसान औने पौने दाम में आलू बेचने को विवश है. प्रखंड अंतर्गत कोल्हायपट्टी डुमरिया जो मुरलीगंज प्रखंड से तीन किलोमीटर की दूरी पर बसा है. वहां के आलू उत्पादन में आलू की रिकॉर्ड पैदावार ने किसानों के सामने आलू भंडारण की समस्या खड़ी कर दी है. इस कारण किसानों की कमर पूरी तरह से टूट गयी है. आलू एक नकदी फसल है तथा यह अल्प अवधि 90 से 105 दिनों में तैयार हो जाती है. इस प्रकार आलू फसल से अन्य फसलों की तुलना में कम समय में अच्छी आमदनी प्राप्त होती है.
मुरलीगंज प्रखंड़ आलू का उत्पादन काफी मात्रा में होता है. परंतु इसके भंडारण हेतु शीतगृह एवं प्रसंस्करण आदि की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों द्वारा खुदाई के तुरंत बाद ही आलू स्थानीय बाजार में काफी कम कीमत में बेच दिया जाता है. जिससे उन्हें आलू के उत्पादन का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पा रहा है और वह अपना आलू लागत से भी कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं. लेकिन उत्पादन के अनुरूप भंडारण व विपणन की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है.
इस वजह से किसानों को इसकी खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है. निजी शीतगृह व कोल्ड स्टोरेज पहले से है बुक : गौरतलब है कि इस क्षेत्र में एक भी न तो सरकारी और न ही निजी कोल्ड स्टोरेज है. इस कारण क्षेत्र के किसानों को आलू भंडारण में काफी कठिनाई हो रही है. मुरलीगंज प्रखंड के आलू उत्पादित किसान काफी परेशानी और घाटे में आलू को ओने पौने दामों में व्यापारियों के हाथ बेच रहे हैं. उनकी सबसे बड़ी समस्या है. भंडारण के लिए उन्हें गुलाब बाग पर ही निर्भर रहना पड़ता है
और गुलाब बाग में सभी व्यापारियों ने पहले से शीतगृह को बुक कर रखा है. जिससे किसानों से अपने मनचाहे दर पर आलू खरीद कर स्टोर कर सकें. इस तरह अवैध ढंग से इस शीतगृह को भरा हुआ दिखाकर किसानों के आर्थिक दोहन के लिए व्यापारी और शीतगृह मालिक तैयार खड़े हैं. अब शीतगृह में अपना आलू नहीं रख पा रहे हैं और उन्हें मजबूरन व्यापारियों के हाथ अपना आलू 275 क्विंटल और 300 क्विंटल के भाव में बेचना पड़ रहा है. किसान हताश और निराश हैं.
कोल्ड स्टोरेज मालिकों की मनमानी से किसान परेशान
मुरलीगंज प्रखंड से 25 किलोमीटर की दूरी पर उदाकिशुनगंज में एक शीतगृह है. वहां भी निजी शीतगृह वाले किसानों के आलू को रखने के लिए तैयार नहीं है. किसानों ने बताया कि जब उनके पास गये तो उन्होंने खाली होने के बावजूद लौटा दिया कि उनके पास जगह नहीं है.
आलू का उत्पादन काफी मात्रा में होता है.
परंतु इसके भंडारण हेतु शीतगृह एवं प्रसंस्करण आदि की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों द्वारा खुदाई के तुरंत बाद ही आलू स्थानीय बाजार में काफी कम कीमत में बेच दिया जाता है. जिससे उन्हें आलू के उत्पादन का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पा रहा है और वह अपना आलू लागत से भी कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं. आलू उत्पादक किसानों की कमर टूटती रही तो किसान आलू की खेती छोड़ने को मजबूर है. सरकार द्वारा इस दिशा में कोल्ड स्टोरेज मालिकों की मनमानी पर कोई पहल नहीं की जा रही है.
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