विलंब से प्राथमिकी है शक्ति का दुरुपयोग करना : कोर्ट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Feb 2017 5:30 AM (IST)
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न्यायालय ने कहा, गंभीर मामलों में पुलिस का रवैया लचर, उत्पाद अधीक्षक की जांच रिपोर्ट के 16 दिन बाद दर्ज की गयी प्राथमिकी अल्कोहल के मामले में बरती इस कदर लापरवाही कि निजी मुचलका पर छोड़ दिया अभियुक्त को मामला गम्हरिया थाना क्षेत्र में पकड़े गये 48 पेटी फूड प्रोडक्ट के नाम पर नौ प्रतिशत […]
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न्यायालय ने कहा, गंभीर मामलों में पुलिस का रवैया लचर, उत्पाद अधीक्षक की जांच रिपोर्ट के 16 दिन बाद दर्ज की गयी प्राथमिकी
अल्कोहल के मामले में बरती इस कदर लापरवाही कि निजी मुचलका पर छोड़ दिया अभियुक्त को
मामला गम्हरिया थाना क्षेत्र में पकड़े गये 48 पेटी फूड प्रोडक्ट के नाम पर नौ प्रतिशत अल्कोहल मिले पदार्थ का
मधेपुरा : शराबबंदी के बाद अवैध शराब के व्यापार को रोकना राज्य सरकार ने अपनी प्राथमिकता में शामिल कर रखा है. लेकिन सरकार के ही अधीन पुलिस एवं उत्पाद अधिकारी के शक्ति से लैस अंचलाधिकारी किस कदर लापरवाह हैं इसका खुलासा न्यायालय द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण से स्पष्ट होता है. एक तो इतने गंभीर मामले में पुलिस का लचर रवैया रहा. उत्पाद अधीक्षक के रिपोर्ट के बावजूद 16 दिन तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की. ऊपर से आरोपितों को निजी मुचलके पर छोड़ दिया.
कुल मिला कर पूरा मामला इस कदर विवादास्पद हो गया कि न्यायालय द्वारा इसे शक्ति का दुरुपयोग बताया गया. इस मामले में व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित एसीजेएम चतुर्थ सुनील कुमार सिंह ने एफआइआर में विलंब व जब्त समान का विवरण संबंधित अदालत में नहीं देने पर गम्हरिया के अंचलाधिकारी ध्रुव कुमार व थानाध्यक्ष मुकेश कुमार मुकेश से छह बिंदु पर स्पष्टीकरण मांगा है.
क्या है मामला . गम्हरिया के अंचलाधिकारी ध्रुव कुमार ने दिनांक 04 फरवरी 2017 को गम्हरिया थाना में दिये आवेदन (थाना कांड संख्या 15/17) में कहा कि दिनांक 30 दिसंबर 2016 को बिहार सरकार के पूर्ण शराबबंदी के लक्ष्य को पूरा करने के उद्देश्य के लिए वह ड्यूटी पर थे. तभी छह बजे शाम में मधेपुरा की तरफ से एक ऑटो आया. उसमें 48 पेटी जिसमें एक पेटी में 12 बोतल डब्ल्यूएफएम फूड प्रोडक्ट का स्टीकर चिपका हुआ बोतल पायी गयी. ड्राइवर से पूछताछ करने पर ड्राइवर ने बताया कि वह इस बोतल को चकला निर्मली सुपौल निवासी सुभाष चौधरी व अरुण चौधरी के स्टेट बैंक के सामने के गोदाम से मधेपुरा के सुभाष चौक के पास के सुपौल
के अशोक यादव व मधेपुरा के परमानंद यादव के सम्मलित गोदाम पर ले गये थे. लेकिन मधेपुरा में पुलिस की चौकसी की वजह से वह सुपौल वापस ले जा रहा है. पकड़ाये समान एवं ड्राइवर को गम्हरिया थाना ले जाया गया एवं वरीय पदाधिकारी को सूचित किया गया. इसके साथ ही उत्पाद विभाग मधेपुरा एवं खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी कोसी सहरसा को भी सूचित किया गया. दोनों विभाग के पदाधिकारी चार – चार बोतल जांच के लिए ले गये. वरीय पदाधिकारी के आदेशानुसार ड्राइवर दीपक कुमार को निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया और यह कहा गया कि विभाग से जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर उचित निर्णय लिया गया. उत्पाद अधीक्षक मधेपुरा के कार्यालय के पत्रांक 45/उत्पाद दिनांक 18.01.2017 का पत्र जो गम्हरिया थाना प्रभारी को प्राप्त हुआ उसमें यह बताया कि नमूने के तौर पर लिया गया रसायन इथाइल अल्कोहल की मात्रा 0.9 प्रतिशत थी. जो कि सरकार के द्वारा पूर्ण शराब बंदी के मामले से अधिक की श्रेणी में आता है. दिनांक 04.02.2017 को निजी मुचलके पर छोड़े गये ड्राइवर दीपक कुमार को गम्हरिया थाना पर बुलाया गया. जहां से वह अंचलाधिकारी के कार्यालय में पहुंचा और अपनी इस घटना में संलिप्ता स्वीकार की. और कहा कि वह अल्कोहल ले जा रहा था. सूचक ने अपने आवेदन में दीपक कुमार, कारोबारी अरूण चौधरी, सुभाष चौधरी, अशोक यादव एवं परमानंद यादव के विरूद्ध आवश्यक कार्रवाई करने को कहा. थानाध्यक्ष गम्हरिया थाना कांड संख्या 15/17 उत्पाद अधीनियम की धारा 30 ए एवं भारतीय दंड संहिता की धारा 419 – 420 में मामला दर्ज किया.
न्यायालय ने मांगा छह बिंदुओं पर स्पष्टीकरण
पहला – दिनांक 30 दिसंबर 2016 को जिस दिन सामान जब्त किया गया, उस दिन प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गयी.
दूसरा – न्यायालय को जब्ती सामान के बारे में सूचना क्यों नहीं दी गयी.
तीसरा – जब्त सामान से बिना न्यायालय की जानकारी लिए नमूने के तौर पर जांच के लिए कैसे लिए गये.
चौथा- किस आदेश पर और किसके आदेश पर अभियुक्त दीपक कुमार को निजी मुचलके पर छोड़ा गया.
पांचवा – उत्पाद अधीक्षक ने जब 18 जनवरी 2017 को अपनी जांच रिपोर्ट थाने को भेज दी तो 04 फरवरी 2017 को प्राथमिकी दर्ज क्यों की गयी.
छठा – उत्पाद अधीक्षक के जांच रिपोर्ट के बाद भी प्राथमिकी दर्ज करने में 16 दिन का विलंब क्यों हुआ.
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