मकर संक्रांति पर जिले में मोदी पतंग की है विशेष डिमांड
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Jan 2017 5:53 AM (IST)
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बाजार में तिल, गुड़, चूड़ा व मूढ़ी की दुकानें सजी हैं स्नान, दान, ध्यान के महापर्व के रूप में मनायी जाती है मकर संक्रांति मधेपुरा : स्नान दान और ध्यान का अनुपम त्योहार मकर संक्रांति को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है. वहीं परंपरागत तौर पर पतंगबाजी की भी पूरी तैयारी है. इस वर्ष […]
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बाजार में तिल, गुड़, चूड़ा व मूढ़ी की
दुकानें सजी हैं
स्नान, दान, ध्यान के महापर्व के रूप में मनायी जाती है मकर संक्रांति
मधेपुरा : स्नान दान और ध्यान का अनुपम त्योहार मकर संक्रांति को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है. वहीं परंपरागत तौर पर पतंगबाजी की भी पूरी तैयारी है. इस वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर मोदी पतंग की भारी डिमांड देखी जा रही है. खास कर युवा वर्ग मोदी पतंग को खासे उत्साहित नजर आ रहे है. बाजार में साधारण पतंग पांच रुपये से पंद्रह रुपये में बिक रहा है तो मोदी पतंग का भारी डिमांड होने कारण इसकी कीमत बीस से तीस रुपये बतायी जाती है. उधर, बाजार में खरीददारों की भीड़ जुट रही है. शहर के मेन रोड स्थित तिलकुट विक्रेता पवन कुमार ने बताया कि इस वर्ष 11 जनवरी को मामूली विक्री हुई.
12 को तिलकुट और लाय के बिक्री में इजाफा हुआ है. बाकी अंतिम दिन बिक्री होने की उम्मीद जतायी जा रही है. वहीं तिलकुट विक्रेताओं की मानें तो गत वर्ष की भांति इस वर्ष तिलकुट डिमांड में नहीं रहा. हालांकि इसका सटीक कारण महंगाई भी माना जा रहा है. हालांकि लोक आस्था के इस महापर्व पर महंगाई कोई खास असर नहीं दिखा पा रही है. शहर के कई जगहों पर चूड़ा दही के लंगर का आयोजन भी किया जायेगा. बाजार में दूध और दही का डिमांड भी देखी जा रही है. गुड़ की बिक्री अत्यधिक रही. मुढ़ी का पैकेट और चूड़ा की बिक्री भी देर शाम तक होती रही है.
कुलदेवता को चढाया जाता है तिल का प्रसाद : मकर संक्रांति का त्योहार हमारी पौराणिक सभ्यता और संस्कृति का द्योतक भी है. इस त्योहार को आम से लेकर खास तक काफी उत्साह से मनाते है. त्योहार के दिन एक तरह से अघोषित छुटटी का दिन होता है.गृहणी मीरा देवी ने बताती है की मकर संक्रांति के दिन कुल देवता की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. कुलदेवता को तिल प्रसाद के रूप में भी चढ़ाया जाता है. मकर संक्रांति पंचाग के हिसाब से ही मनाया जाना चाहिए. गृहिणी मीरा सर्राफ ने बताया कि यह त्योहार स्नान, दान और ध्यान के प्रतीक में मनाया जाता है. इन सब चीजों को करने के लिए बस मन और उत्साह की जरूरत है. गृहिणी रूबी राज ने बताया कि मकर संक्रांति कुल देवता की पूजा अर्चना का त्योहार है.
वसंत ऋतु के आगमन का पूर्व सूचक है मकर संक्रांति : मकर संक्रांति को सूर्य धनु राशि छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करता है और इसी काल से शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं. मकर संक्रांति के आते ही देवताओं की रात समाप्त हो जाती है. उत्तरायण शुरू हो जाता है. इस दिन से ही लोग मलमास के कारण रुके हुए अपने शुभ कार्य शुरू करते हैं. यह मकर संक्रांति ही वसंत ऋतु के आगमन का पूर्व सूचक है. इस दिन तिल और गुड़ के बने खाद्य पदार्थ खाने की परंपरा है. तिलकुट और लाई बनाने के लिए तिल, गुड़, चूड़ा, मुढ़ी बाजार में करीब एक माह से ही अपनी जगह बनाये हुए हैं. किराना दुकान हो या चौक-चौराहे, हर जगह इन सामग्रियों की बिक्री हो रही है. परंपरागत अंगेरजी तिथि के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जायेगा.
दूध की मांग बढ़ी : मकर संक्रांति के अवसर पर दही खाने की परंपरा है. लेकिन इस बार दूध की कमी लोगों को खल रही है. स्थानीय स्तर पर उत्पादित दूध की कमी तो है ही इस कमी को पैकेट के दूध से किया जा रहा है. लोग पहले से ही दूध की बुकिंग करा रहे हैं. ताकि उन्हें ससमय दूध उपलब्ध हो सके.
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