नया कानून है जन विरोधी शीघ्र संशोधन करे सरकार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Nov 2016 1:37 AM (IST)
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जिला मुख्यालय में प्रेसवार्ता करते आइएमए के सचिव, अध्यक्ष व अन्य . मधेपुरा : नेशनल मेडिकल कौंसिल में केवल ब्यूरोक्रेट या राजनीतिज्ञों के लिए ही जगह नहीं है. इनलोगों का चिकित्सा के क्षेत्र से दूर-दूर तक वास्ता नहीं है. चिकित्सक किसी भी राजनीतिक पद पर जा सकता है, लेकिन ब्यूरोक्रेट या पॉलिटीशियन चिकित्सक का काम […]
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जिला मुख्यालय में प्रेसवार्ता करते आइएमए के सचिव, अध्यक्ष व अन्य .
मधेपुरा : नेशनल मेडिकल कौंसिल में केवल ब्यूरोक्रेट या राजनीतिज्ञों के लिए ही जगह नहीं है. इनलोगों का चिकित्सा के क्षेत्र से दूर-दूर तक वास्ता नहीं है. चिकित्सक किसी भी राजनीतिक पद पर जा सकता है, लेकिन ब्यूरोक्रेट या पॉलिटीशियन चिकित्सक का काम नहीं कर सकते हैं. क्लिनिकल एस्टेबलिशमेंट एक्ट का विरोध करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मधेपुरा इकाई ने मंगलवार को प्रेस वार्ता आयोजित की.
प्रेस वार्ता में आइएमए मधेपुरा के सचिव डा डीके सिंह ने कहा कि सरकार को जनता विरोधी कानून में संशोधन हर हाल में करना होगा.
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की जगह नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) लाने के बदले सरकार को समस्याओं में सुधार करना चाहिए न कि जनहित में बने एक बेहतर कानून को ही बदल देना चाहिए. आईएमए 16 और 17 नवंबर को देश के हर जिले में सांकेतिक सत्याग्रह करेगा. वहीं कर्पूरी चौक बुधवार को 10.00 बजे धरना भी देगे. 30 प्रदेश शाखाओं और 1765 क्षेत्रीय शाखाओं के हजारों चिकित्सक जिला और क्षेत्रीय स्तर पर इस सत्याग्रह में हिस्सा लेंगे.
इसके बाद डीएम को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा जाएगा. आईएमए के अध्यक्ष डा मिथिलेश कुमार ने बताया कि गत वर्ष सरकारी आश्वासन पर आइएमए ने 16 नवंबर के सत्याग्रह से हाथ खींच लिया था, लेकिन सरकार अब एमसीआई को समाप्त कर इसके बदले एनएमसी लाने पर अमादा है. आईएमए केंद्र सरकार से एमएमसी की योजना समाप्त करने, चिकित्सीय पेशे की स्वायत्तता बरकरार रखते हुए इंडियन मेडिकल काउंसिल अधिनियम को संशोधित करने,
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत नुकसान की भरपाई तय करने, चिकित्सक और अस्पतालों को हिंसा से बचाने के लिए केंद्रीय अधिनियम लाने की मांग करता है. चिकित्सकों ने प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक-पीएनडीटी एक्ट के कुछ नियमों में बदलाव की मांग की है. चिकित्सक चाहते हैं कि पीएनडीटी एक्ट के तहत केवल कन्या भ्रूण हत्या के लिए सजा का प्रावधान हो, न कि दस्तावेज संबंधी गलतियों के लिए. चिकित्सकों ने आधुनिक और स्वदेशी चिकित्सा पद्धति के एकीकरण योजना रद्द करने की मांग भी की है. आइएमए ने मांगें पूरी करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया है.
उन्होंने बनाये गये कानून को जन विरोधी करार दिया और कहा कि इस कानून से अनेक अस्पताल बंद हो जायेंगे तथा चिकित्सा सेवायें और मंहगी हो जायेगी. कानून में प्रत्येक चिकित्सा संस्थान को सरकार से पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा और पंजीकृत जगह पर चिकित्सा प्रदान करना गैर कानूनी होगा. इसके कारण किसी प्रकार की चिकित्सा सम्बन्धी कैम्प लगाना असम्भव होगा. चिकित्सकों ने कहा कि जिस तरह से वर्तमान मे निजी अस्पतालों के लिये कानून बनाया है उससे नर्सों की कमी हो जायेगी. इसकी वजह से हर नर्सिंग होम का पंजीकरण कराना मुश्किल होगा. चिकित्सकों ने पुराने एक्ट को बहाल कर नये एक्ट मे संशोधन किये जाने जैसी छह सूत्रीय मांगें रखी हैं.
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