बीस दिन शेष, कैसे होगा जलािभषेक

Published at :01 Jul 2016 6:50 AM (IST)
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बीस दिन शेष, कैसे होगा जलािभषेक

श्रावणी मेला . नारकीय स्थिति में पहुंचा सिंहेश्वर, एनएच पर रोज होती हैं दुर्घटनाएं सावन का पवित्र महीना 21 जुलाई से प्रारंभ हो रहा हैं. सावन में सिंहेश्वर नाथ बाबा पर जल चढ़ाने नेपाल सहित दूर-दराज से लाखों की संख्या में कांवरिया आते हैं. लेकिन सिंहेश्वर बाजार की सड़कों को दुरुस्त करने के लिए पहल […]

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श्रावणी मेला . नारकीय स्थिति में पहुंचा सिंहेश्वर, एनएच पर रोज होती हैं दुर्घटनाएं

सावन का पवित्र महीना 21 जुलाई से प्रारंभ हो रहा हैं. सावन में सिंहेश्वर नाथ बाबा पर जल चढ़ाने नेपाल सहित दूर-दराज से लाखों की संख्या में कांवरिया आते हैं. लेकिन सिंहेश्वर बाजार की सड़कों को दुरुस्त करने के लिए पहल न तो प्रशासन और न ही मंदिर प्रशासन की ओर से ही की जा रही है.
सिंहेश्वर : सिंहेश्वर बाजार की मुख्य सड़क एनएच 106 पर एवं पोस्ट ऑफिस रोड सहित रोड संख्या 18 से मंदिर पहुंचने के सभी मार्ग पर बारिश के कारण कीचड़ लगा हुआ है. हालांकि विगत तीन दिनों से बारिश नहीं हुई है लेकिन मानसून के महीने में बारिश तो होना ही है और सड़क लोगों के चलने लायक नहीं हैं.
मुख्य सड़क से हाथी गेट होकर मंदिर तक जाने वाली सड़क पर नाला का गंदा पानी बह रहा है. मंदिर न्यास समिति कार्यालय के आगे एवं महावीर चौक होकर मंदिर तक जाने वाली सड़क पर जल जमाव के कारण बड़े-बड़े गड्ढे बन गये हैं. इनमें हमेशा छोटे-बड़े वाहन फंसे रहते हैं. दुर्दशा का शिकार बने इस पथ से प्रत्येक दिन सैकड़ों बड़े वाहन मधुबनी, दरभंगा सहित सुपौल, मुजफ्फरपुर, पटना सहित पड़ोसी राष्ट्र नेपाल की ओर आवागमन करते हैं. सड़क पर गडढों के कारण बड़े यात्री वाहन गुजरते समय एक तरफ झुक जाते हैं. यात्री सहित स्थानीय वासी बड़े दुर्घटना की आशंका से सहम उठते हैं. वही छोटी – छोटी दुर्घटनाएं घटित होना यहां आम बात है.
तालाब कब होगा साफ . सिंहेश्वर मंदिर स्थित तालाब शिवगंगा में गंदगी है. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु शिवगंगा में स्नान करने के बाद ही पूजा करते हैं. सावन में यहां पहुंचने वाले लाखों लोग स्नान करेंगे लेकिन पर्यटन विभाग ने तालाब को अब तक मंदिर न्यास समिति को हैंडओवर नहीं किया है. ऐसे में मंदिर न्यास समिति तालाब की पूरी सफाई नहीं करा रही है. लेकिन इस बीच श्रद्धालु गंदे और उथले तालाब में ही स्नान के लिए मजबूर हैं. उनकी आस्था से खिलवाड़ किया जा रहा है.
हाथी गेट के पास फिसलन खतरनाक. एनएच 106 से मंदिर रोड की शुरुआत हाथीगेट से होती है. यही मंदिर तक जाने का मुख्य मार्ग था. हाथी गेट सिंहेश्वर का काफी पुराना लैंडमार्क रहा है. हाथी गेट के सामने मौजूद उत्क्रमित मध्य विद्यालय के तत्कालीन प्रधानाध्यापक डा वीरेंद्र प्रसाद वर्मा ने इस गेट को डिजाइन किया था. हाथी गेट पर इस तथ्य को अंकित भी किया गया है. कालांतर में सिंहेश्वर से गुजरने वाली मुख्य सड़क की उंचाई बढ़ती गयी
. इसके कारण मंदिर रोड नीचे हो गया है. इसके कारण हाथी गेट के पास लोगों को अचानक ही उंचाई पर चढ़ कर मुख्य सड़क पर आना होता है. यहां रोज ही पैदल और मोटरसाइकिल सवार के फिसल कर गिरने की दर्जनों घटनाएं होती है. अब तो लोग यहां कूड़ा भी फेंकने लगे हैं. यही हाल रहा तो सावन मेला के दौरान श्रद्धालुओं को काफी तकलीफ और परेशानी से गुजरना होगा.
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