किराये के मकान में चल रहा दफ्तर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Jan 2016 4:49 AM (IST)
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जमीन क्रेता व विक्रेताओं को हो रही परेशानी अधिकारी व जनप्रतिनिधि का नहीं है इस ओर ध्यान उदाकिशुनगंज, मधेपुरा : अनुमंडल मुख्यालय स्थित भूमि निबंधन कार्यालय को स्थापना काल से ही भवन नहीं रहने से पदाधिकारी, कर्मी दस्तावेज नविसों के अलावे जमीन क्रेता व विक्रेताओं को काफी कठिनायां हो रही है. फिर सरकार व स्थानीय […]
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जमीन क्रेता व विक्रेताओं को हो रही परेशानी
अधिकारी व जनप्रतिनिधि का नहीं है इस ओर ध्यान
उदाकिशुनगंज, मधेपुरा : अनुमंडल मुख्यालय स्थित भूमि निबंधन कार्यालय को स्थापना काल से ही भवन नहीं रहने से पदाधिकारी, कर्मी दस्तावेज नविसों के अलावे जमीन क्रेता व विक्रेताओं को काफी कठिनायां हो रही है. फिर सरकार व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निगाहें इस ओर नहीं जा सकी है. भवन निर्माण कराये जाने के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है. आरंभ में तो किराये के घर में कार्यालय चला करता था.
लेकिन अब उधार के छोटे से सरकारी भवन में चलाया जा रहा है. इस तरह देखा जाए तो उक्त दफ्तर को स्थापना के 58 वर्ष बाद भी भवन तक नसीब नहीं हो सका है. जबकि यहां से सरकार को अच्छा राजस्व प्रति वर्ष मिला करता है. भवन निर्माण कराये जाने को लेकर यहां के विधायक व सांसद को सरकार के सामने आवाज उठाने की जरूरत है.
कब हुई थी स्थापना
भूमि निबंधन कार्यालय की स्थापना राज्य सरकार द्वारा 1997 ई में की गयी थी. चूंकि उस समय यहां के लोगों को जमीन निबंधन कराने के लिए भागलपुर जिले के बिहपुर निबंधन कार्यालय जाना पड़ता था. लेकिन समस्याएं थी. बिहपुर जाने में यहां के लोगों को तीन-तीन नदियां नाव से पार करना पड़ता था. जिससे लोगों को काफी कठिनाई होती थी.
यातायात का भी कोई साधन नहीं था. यहां के लोगों को पैदल बिहपुर जाना पड़ता था. स्थापना काल में भूमि निबंधन कार्यालय दुर्गा स्थान परिसर में चलाया जाता था. लेकिन बाद के वर्षों में प्रलयंकारी बाढ़ आ जाने से कार्यालय यहां से हटा कर बिहारीगंज गुदरी हाट ले जाया गया था. हालांकि दो वर्ष बाद ही बिहारीगंज से कार्यालय मुख्यालय ले आया गया. तब कार्यालय कॉलेज चोक स्थिति एक किराये के भवन में चलाया जाने लगा.
लंबी अवधि में 1996 ई में कार्यालय स्थानांतरित कर लावारिस पड़े एक सरकारी भवन में ले आया गया. तब से भूमि निबंधन कार्यालय उसी भवन में चल रहा है. लेकिन निजी भवन मयसर नहीं हो सका. जबकि पर्याप्त मात्रा भवन निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध है.
दस्तावेज नबीसों के लिए शेड नहीं
निबंधन कार्यालय परिसर में दस्तावेज नविशों को बैठ कर अभिलेख लिखने के लिए प्रशासन द्वारा शेड का निर्माण कराया जाना चाहिए था. जमीन रहने के बावजूद भी शेड का निर्माण नहीं कराया जा रहा है. कठिनाई को देखते हुए दस्तावेज नवीस संघ ने अपनी ओर से शेड का निर्माण करा कर अभिलेख लिखा करते हैं. संघ की ओर से कई बार सांसद विधायक व प्रशासन को आवेदन देकर शेड निर्माण कराये जाने की मांग की.
किंतु इस पर किसी ने अमल नहीं किया. हालांकि अनुमंडल के दो – दो विधायक राजस्व व भूमि सुधार मंत्री के पद पर लंबी अवधि तक रह चुके है. फिर भूमि निबंधन कार्यालय की सूरत नहीं बदल सकी.
आवासीय सुविधा नदारद
विभागीय पदाधिकारी व कर्मचारियों को आवासीय सुविधा भी नहीं मिल पा रही है. ऐसी स्थिति में पदाधिकारी कर्मचारी किराये के मकान में रहा करते हैं. कुछ ऐसे कर्मचारी हैं जो आवासीय असुविधा के कारण प्रतिदिन मधेपुरा से जाते आते है. भूमि निबंधन कार्यालय का दर्जा देने के बावजूद भी कोई सुविधाएं नहीं है.
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