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जिले में मकर संक्रांति आज व कल

जिले में मकर संक्रांति आज व कल फोटो – मधेपुराकैप्शन- -पर्व-त्योहार . बाजार में तिल, गुड़, चुड़ा व मूढ़ी की दुकानें सजी, पूजा अर्चना की तैयारी – स्नान, दान, ध्यान के महापर्व के रूप में मनायी जाती है मकर संक्रांति प्रतिनिधि, मधेपुरा मकर संक्रांति को सूर्य धनु राशि छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करता […]

जिले में मकर संक्रांति आज व कल फोटो – मधेपुराकैप्शन- -पर्व-त्योहार . बाजार में तिल, गुड़, चुड़ा व मूढ़ी की दुकानें सजी, पूजा अर्चना की तैयारी – स्नान, दान, ध्यान के महापर्व के रूप में मनायी जाती है मकर संक्रांति प्रतिनिधि, मधेपुरा मकर संक्रांति को सूर्य धनु राशि छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करता है और इसी काल से शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं. मकर संक्रांति के आते ही देवताओं की रात समाप्त हो जाती है. उत्तरायण शुरू हो जाता है. इस दिन से ही लोग मलमास के कारण रुके हुए अपने शुभ कार्य शुरू करते हैं. यह मकर संक्राति ही बसंत ऋतु के आगमन का पूर्व सूचक है.इस दिन तिल व गुड़ के बने खाद्य पदार्थ खाने की परंपरा है. तिलकुट व लाई बनाने के लिए तिल, गुड़, चूड़ा, मुढ़ी बाजार में करीब एक माह से ही अपनी जगह बनाये हुए हैं. किराना दुकान हो या चौक-चौराहे, हर जगह इन सामग्रियों की बिक्री हो रही है. परंपरागत अंगेरजी तिथि के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जायेगा. वहीं मिथिला पचांग के अनुसार गुरुवार को यह पर्व मनाया जायेगा.दूध की मांग बढ़ीमकर संक्रांति के अवसर पर दही खाने की परंपरा है. लेकिन इस बार दूध की कमी लोगों को खल रही है. स्थानीय स्तर पर उत्पादित दूध की कमी तो है ही इस कमी को पैकेट के दूध से किया जा रहा है. लोग पहले से ही दूध की बुकिंग करा चुके हैं. मोदी पतंग की है विशेष डिमांड इस वर्ष मकर संक्राति के अवसर पर मोदी पतंग का भारी डिमांड है. खास कर युवा वर्ग मोदी पतंग को खासे उत्साहित नजर आ रहे है. बाजार में जेनरल पतंग पांच रूपये से पंद्रह रूपये में बिक रहा है. वहीं मोदी पतंग का भारी डिमांड होने कारण इसकी कीमत बीस से तीस रुपये बतायी जाती है. ————————–पुत्र शनि की सेवा का प्रतीक है मकर संक्राति – मिथिला पंचांग के अनुसार 15 को मनाया जायेगा मकर संक्रांति मधेपुरा . मकर संक्रांति के दिन सूर्य का मकर राशि मे प्रवेश उनके पुत्र शनि द्वारा पिता के साथ रहने और पिता सूर्य की सेवा करने का प्रतीक है. सूर्य की सभी सक्रांतियों में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मकर संक्राति है. मकर संक्रांति के दिन तीर्थ स्थानों के दर्शन, पवित्र स्थान पर स्नान एव जप का विशेष महत्व है. इस दिन किये गये दान का अनंत गुणा फल मिलता है. वेद, पुराण, उपनिषद आदि में सूर्य भगवान को जगत की आत्मा बताया गया है. सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं. इनके बिना जीवन की कल्पना भी नही की जा सकती है. सूर्य की उपासना करना नितांत जरूरी है. –उत्तरदायित्व वहन का संकल्प–मकर संक्राति ही वसंत ऋतु के आगमन का पूर्व सूचक है. विद्वान पंडित दुर्गानंद झा उर्फ मालवी जी कहते हैं कि सूर्य का मकर राशि मे प्रवेश उनके पुत्र शनि द्वारा पिता के साथ रहने और पुत्र शनि द्वारा पिता सूर्य की सेवा करने का प्रतीक है. यही कारण है कि मकर संक्रांति के दिन पुत्र-पुत्री हाथ में तिल रख कर माता-पिता का उत्तरदायित्व वहन करने का संकल्प लेते हैं. प्राणों को हरने वाली शीत ऋतु के प्रकोप कम करने का संकेत इस दिन से होने लगता है. –तिल-गुड़ का महत्व–पंडित मालिक ठाकुर एवं सुमन ठाकुर कहते है कि तिल एव गुड़ के महत्ता के बारे मे कहते हैं कि मनुष्यो को शनि और सूर्य ग्रह के सकारात्मक फ ल मिले, इसलिए लोग तीर्थ स्थल का दर्शन, पवित्र स्थानो पर स्नान एव दान आदि करते हैं. तिल- गुड़ दान करने का इस दिन विशेष महत्व है. तिल जहां शनि ग्रह का प्रतीक है, वही गुड़ सूर्य का द्योतक है. यही वजह है कि इस दिन तिल और गुड़ के बने खाद्य पदार्थ ग्रहण किये जाते हैं.–दान की है परंपरा -मकर संक्रांति के दिन दान देने की भी परंपरा है. पंडित कलानंद ठाकुर कहते है कि मकर सक्रांति माघ माह में आती है, जिसमें भगवान विष्णु की आराधना हर कोई करता है. संस्कृत के मघ शब्द से माघ निकला है. मघ का शाब्दिक अर्थ होता है ‘धन’. सोना- चादी, वस्त्र और आभूषण आदि. इसलिए इन वस्तुओं के दान आदि के लिए माघ माह उपयुक्त है. मकर संक्रांति को माघी संक्रांति भी कहा जाता है. –खिचड़ी और घी –मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है. इन दिनो मे खिचड़ी खायी जाती है और दान मे भी दिया जाता है. खिचड़ी में देशी घी डाल कर खाने का प्रचलन है. उत्तर प्रदेश और बिहार में इन्हीं दिनों खिचड़ी का आहार शुरू हो जाता है.–आते हैं देवता–मकर संक्रांति के दिन देश के प्रमुख तीर्थ स्थल प्रयाग, हरिद्वार, वाराणसी, गगा सागर आदि जैसे पवित्र जगहों में करोड़ो लोग गंगा में डुबकी लगा कर स्नान करते हैं. ज्योतिष के अनुसार मानना है कि मकर संक्रांति के दिन वरूण देवता सहित अन्य देवता यहां आते हैं और इन दिनों देवता यहा वास करते हैं. –उड़ाया जाता है पतग–राम इक दिन चग उड़ाई, इद्रलोक मे पहुची जाई. पडित पंकज ठाकुर कहते हैं कि भगवान राम द्वारा पतग उड़ाने का प्रसंग रामचरित मानस के बाल कांड में किया गया है. पूरे भारत मे इस दिन पतंग उड़ायी जाती है. मकर सक्रांति को पतंग पर्व के रूप मे मनाया जाता है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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