कोसी की लाइफ लाइन एनएच-106 आइसीयू में फोटो- मधेपुरा – 08, 09कैप्शन- शिलान्यास के बावजूद नहीं बन रहा एनएच 106- चिंताजनक . चौदस साल पहले शिलान्यास होने के बाद भी एनएच 106 नहीं ले सका आकार – नेपाल की सीमा से लगने के कारण इस सड़क का है सामरिक महत्व प्रतिनिधि , मधेपुरा जिले का एनएच-106 केवल कहने के लिए एनएच है. एनएच के इस हाल से लोग परेशान हैं. तत्कालीन सांसद सह केंद्रीय मंत्री शरद यादव ने जिले को एनएच का तौहफा दिया था, लेकिन यह अब तक मूर्त रूप में नहीं ले सका है. कोसी, मिथिलांचल के साथ-साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल का अंग क्षेत्र व झारखंड से संबंधों में प्रगाढ़ता लाए जाने के उद्देश्य से पूर्व वीरपुर-वीहपुर मार्ग को एनएच-106 के रूप में परिणत किया गया था. लेकिन, शिलान्यास के 14 वर्ष बीत जाने के बावजूद एनएच का निर्माण नहीं होने से जिला सहित उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र उपेक्षित है. विश्व बैंक के पैसे से निर्मित होने वाले इस सड़क को लेकर विभाग के पास प्लान है, लेकिन शीघ्र क्रियान्वयन के आसार नजर नहीं आते. विश्व बैंक की टीम ने सर्वेक्षण में दस किमी लंबे पुल की जरूरत बतायी, लेकिन विभाग के पास केवल साढ़े चार किमी पुल बनाने की योजना थी. फिलवक्त लंबे से समय से प्रतीक्षित और कोसी प्रलय के दौरान लाइफ लाइन बनी इस सड़क के पूर्णत: राष्ट्रीय राजमार्ग में तब्दील होने का इंतजार मधेपुरा, सहरसा व सुपौल जिले के हर व्यक्ति को है. –शरद यादव ने किया था शिलान्यास–पांच जुलाई 2001 को तत्कालीन एनडीए सरकार के भूतल परिवहन राज्य मंत्री भुवन चंद्र खंडुरी के उपस्थिति में भारत सरकार के नागरिक एवं उड्डयन मंत्री सह स्थानीय सांसद शरद यादव ने जिला मुख्यालय के बीपी मंडल चौक पर उक्त मार्ग का शिलान्यास किया था. इस शिलान्यास समारोह में राजद सरकार के मंत्री व विधायक भी उपस्थित थे. –उद्देश्य न हो सका पूरा–इस मार्ग के एनएच में परिवर्तन किये जाने के पीछे तत्कालीन सरकार की मंशा थी कि अंग क्षेत्र का कोशी, मिथिलांचल के बीच सीधा संबंध स्थापित हो सके तथा इन इलाकों की दूरियां भी कम हो सके. इसके अलावा नेपाल की सीमा तक पंहुचने के कारण इस सड़क का सामरिक महत्व भी है. इस सड़क के निर्माण से जहां क्षेत्र को विकास का नया आयाम मिलेगा वहीं बेरोजगारों को रोजगार भी. लेकिन सपना पूरा होने से पूर्व ही टूटकर बिखरता नजर आ रहा है. —विश्व बैंक के कर्ज से होना था निर्माण —जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 के नवंबर माह में विश्व बैंक की सहायता से देश के 33 और राज्य के सात राष्ट्रीय राजमार्गों को टू – लेन में परिवर्तित किया जाना था, इसमें कोसी क्षेत्र का एनएच-106 भी शामिल है. इसे लेकर विश्व बैंक की टीम ने विभागीय अधिकारी के साथ नाव से कोसी नदी पार कर भागलपुर जिले के बिहपुर तक का सफर कर जायजा लिया था. –कोसी को देख पस्त थी टीम–कोसी नदी की लंबी दूरी तक कटाव को देख टीम ने उदाकिशुनगंज से आगे काम कर पाने में असमर्थता जाहिर कर दी थी. टीम का मानना था कि कोसी में कम से कम 9 से 10 किलोमीटर का पुल बनाया जाना है. लेकिन वर्तमासन बजट में यह संभव नहीं है. कोसी नदी में पुल के अलावा यहां कई छोटी-बड़ी नदियां भी है जहां तीन छोटे-बड़े पुल-पुलिया की आवश्यकता है. इसका कारण ये है कि चौसा के फुलौत गांव में कोसी नदी के बाद बिहपुर तक तो सड़क भी नहीं बनी है. –विभाग केवल प्लान बनाने में व्यस्त — दो साल पहले ही एनएच विभाग के पास इस मार्ग को टू-लेन में परिवर्तन कर दिए जाने के बाद मामला प्रक्रियाधीन थी. इसके लिए दो फेज में काम होना था. प्रथम फेज में बीरपुर से उदाकिशुनगंज तक 106 किलोमीटर टू-लेन मजबूतीकरण सड़क का निर्माण होना था. वर्ष 2014 के दशहरे के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जानी थी. दूसरे फेज में उदाकिशुनगंज से बीहपुर तक 30 किलोमीटर सड़क का निर्माण होना था. दूसरे फेज में कोसी नदी पर साढ़े चार किलोमीटर का पुल और तीन छोटी-बड़ी पुल एवं पुलिया का भी काम होना था. एनएच के पुल पर इलेक्ट्रिक पोल भी लगाना था. — वर्ष 2013 से ही विभाग कर रहा स्टडी– एनएच और पुल के निर्माण को लेकर कंपनी ने अध्ययन कर चार हजार पेज का डाटा विभाग को उपलब्ध कराया. विभाग ने दो साल पहले इस डाटा का अध्ययन करना शुरू किया. सड़क निर्माण को विभाग ने सरकार के पास अपना प्रस्ताव भेजा था. प्रस्ताव में उन्होंने शहर बाजार में चौड़ी पीसीसी सड़क की आवश्यकता बतायी है.वहीं वर्ष 2013 के दिसंबर माह में ही फेज टू के लिए ड्राफ्ट डीपीआर कन्सल्टेंट से प्राप्त हो जाना था.– कहते हैं कार्यपालक अभियंता — एनएच 106 के फेज – 1 के लिए संबंधित मंत्रालय की ओर से निविदा निकाल कर संवेदक का चयन कर लिये जाने की सूचना है. अभी तक लिखित तौर पर प्राप्त नहीं हुआ है. वहीं फेज – 2 के लिए दोबारा सर्वे किया गया है. स्वीकृति की प्रक्रिया में है. – विजय कुमार, कार्यपालक अभियंता, एनएच प्रमंडल मधेपुरा
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Prabhat Khabar Digital Desk
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