बनमनखी-पूर्णिया रेल मार्च तक होगा शुरू

Published at :28 Oct 2015 7:23 PM (IST)
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बनमनखी-पूर्णिया रेल मार्च तक होगा शुरू

मधेपुरा : मधेपुरा रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करने आये डीआरएम सुधांशु शर्मा ने पत्रकारों से बताया कि बनमनखी-पूर्णिया रेल मार्ग अगले वर्ष के मार्च तक शुरू हो जाने की संभावना है. अमान परिवर्तन के कारण रेल संपर्क भंग होने के बाद बनमनखी से पूर्णिया रेल का परिचालन बंद था. इससे पूर्णिया की ओर जाने वाले […]

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मधेपुरा : मधेपुरा रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करने आये डीआरएम सुधांशु शर्मा ने पत्रकारों से बताया कि बनमनखी-पूर्णिया रेल मार्ग अगले वर्ष के मार्च तक शुरू हो जाने की संभावना है. अमान परिवर्तन के कारण रेल संपर्क भंग होने के बाद बनमनखी से पूर्णिया रेल का परिचालन बंद था.

इससे पूर्णिया की ओर जाने वाले यात्रियों को मुरलीगंज के बाद घोर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. लेकिन, डीआरएम के आगमन से अब यात्रियों की मुश्किलें आसान हो पायेगी. जल्द बनमनखी से पूर्णिया रेल का परिचालन शुरू होने की संभावना नजर आ रही है. इस संबंध में डीआरएम मधेपुरा रेलवे स्टेशन के निरीक्षण के दौरान अगले वर्ष 2016 के मार्च माह तक बनमनखी-पूर्णिया रूट पर रेल दौड़ने की बात कही. वहीं मधेपुरा रेलवे ट्रैक प्लेटफॉर्म से काफी नीचे है. जिस कारण बड़ी लाइन की गाड़ियों पर यात्रियों को चढ़ने व उतरने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

कई बार तो यात्री उतरने के क्रम में गिर भी चुके है. इस संबंध में डीआरएम ने आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए टालते दिखे. निरीक्षण के मौके पर डीएसटीई केसी शर्मा, सिनियर डीएमई वेद प्रकाश, सिनियर डीओएम बीके दास, सिनियर डीसीएम बीएनपी वर्मा, स्टेशन परिसर के सभी कर्मी उपस्थित थे.उधर, मधेपुरा रेलवे स्टेशन का बुधवार को डीआरएम सुधांशु शर्मा ने निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान शर्मा ने स्टेशन परिसर में व्याप्त गंदगी, अव्यवस्था, साफ सफाई, इंजीनियरिंग खामियों को लेकर स्टेशन प्रबंधक को कड़ी फटकार लगाते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिया.

वहीं रेलवे स्टेशन अधीक्षक पारसनाथ मिश्रा को निर्देश देते हुए डीआरएम ने कहा कि रेलवे परिसर को साफ रखें, यात्रियों को शुद्ध पानी मुहैया कराया जाय. यात्रियों को कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़े. वहीं कुछ इंजीनियरिंग खामियां पर भी नाराजगी जाहिर की. इन कमियों को अविलंब दुरुस्त करने का स्टेशन अधीक्षक को दिया गया.

मौके पर डीआरएम शर्मा ने अनारक्षी टिकट रजिस्टर की जांच की. साथ ही यूटीएस रजिस्टर की स्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि रजिस्टर को रोज अपडेट करें. डीआरएम ने रेलवे स्टेशन के सभी पदाधिकारियों व कर्मचारियों को सही समय व अपने-अपने कार्य क्षेत्र के कामों को बेहतर ढंग से निबटाने का भी निर्देश दिया. उन्होंने स्टेशन परिसर में पानी की व्यवस्था को लेकर पानी टंकी का भी निरीक्षण किया. साथ ही परिसर में बने रेलवे क्वाटर का भी निरीक्षण किया. इस क्रम में रेलवे कर्मियों से कठिनाइयों के बारे में पूछताछ की. रेलवे शौचालय कांट्रेक्टर पर लगा पांच हजार का जुर्माना निरीक्षण के दौरान साफ सफाई को लेकर शौचालय व मूत्रालय का भी निरीक्षण किया गया. इसमें साफ व गंदगी को लेकर डीआरएम सुधांशु शर्मा ने शौचालय कांट्रेक्टर पर पांच हजार रुपये जुर्माना लगाये जाने का निर्देश स्टेशन अधीक्षक को दिया गया है.

साथ ही कांट्रेक्टर को शौचालय साफ सुथरा एवं रेट लिस्ट चिपकाने की कड़ी हिदायत दी गयी. रेलवे स्टेशन पर नि:शक्त सीढ़ी नहीं रहने के कारण यात्री होते हैं परेशान मधेपुरा. जिला मुख्यालय स्थित दौरम मधेपुरा रेलवे स्टेशन में नि:शक्त सीढ़ी नहीं रहने के कारण नि:शक्त यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. ज्ञात हो कि मधेपुरा रेलवे स्टेशन में कोई भी नि:शक्त सीढ़ी कई वर्षों से नहीं है. नि:शक्त सीढ़ी न तो मुख्य प्रवेश द्वार में है और न ही टिकट काउंटर के तरफ से है. दौरम मधेपुरा रेलवे स्टेशन का आलम यह है कि अगर नि:शक्त यात्री को कहीं गणतव्य जगह जाना है तो वे बिना किसी के सहायता से ट्रेन पर चढ़ नहीं सकते. अगर किसी नि:शक्त व्यक्ति किसी को मिलने या पहुंचाने आयेंगे तो उन्हें किसी अन्य व्यक्ति की जरूरत पड़ेगी. यूं तो कहने के लिए दौरम मधेपुरा पूरे भारत के रेल नेटवर्क से जुड़ी हुई है. लेकिन सुविधा का अभाव है.

परिजन मरीजों को उठा कर ले जाने को हैं विवश जिले से लगभग दर्जनों मरीज रोज इलाज कराने पटना, दिल्ली, मुंबई, चेनई आदि नगर महानगर जाते है. अगर वो चलने असमर्थ है तो उन्हें उठा कर ही ले जाना एक मात्र विकल्प परिजनों को बचता है. बुजुर्गों को भी होती है परेशानी 55-60 वर्ष के बाद आम तौर पर लोगों को जोड़ों आदि समस्या आने लगती है. जिससे सामान्य सीढ़ी पर चढ़ने से पैर दर्द होने लगाता है. उन बुजुर्गों के लिए नि:शक्त सीढ़ी उपर्युक्त होता है.

बुजुर्गों को अगर अन्यत्र जगह जाना होता है तो उन्हें भी सामान्य सीढ़ी का ही प्रयोग करना पड़ता है.– वर्जन — यह आश्चर्य जनक बात है यहां नि:शक्त के लिए सीढ़ी नहीं है. एक महीने के अंदर नि:शक्त सीढ़ी का निर्माण हो जायेगा.सुधांशु शर्मा, डीआरएम, समस्तीपुर

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