22 साल बाद भी नहीं बना प्रखंड कार्यालय भवन

22 साल बाद भी नहीं बना प्रखंड कार्यालय भवन फोटो – मधेपुरा 10कैप्शन- — इ-किसान भवन में चलता है सीओ कार्यालय— — प्रखंड की आबादी एक लाख से भी है अधिक— — अधिकारी व जनप्रतिनिधि के सहयोग से की गयी है घेरा बंदी— — प्रखंड में 26 बीडीओ आये और गये, प्रखंड कार्यालय का विकास […]
22 साल बाद भी नहीं बना प्रखंड कार्यालय भवन फोटो – मधेपुरा 10कैप्शन- — इ-किसान भवन में चलता है सीओ कार्यालय— — प्रखंड की आबादी एक लाख से भी है अधिक— — अधिकारी व जनप्रतिनिधि के सहयोग से की गयी है घेरा बंदी— — प्रखंड में 26 बीडीओ आये और गये, प्रखंड कार्यालय का विकास नहीं– प्रतिनिधि, ग्वालपाड़ाउदाकिशुनगंज से अलग कर बारह पंचायतों के लगभग एक लाख आबादी वाले ग्वालपाड़ा प्रखंड सह अचल कार्यालय को लगभग 22 वर्षों के बाद अपना भवन नसीब नहीं हो पाया है. कोसी सिंचाई विभाग की भूमि व भवन में प्रखंड कार्यालय व अंचल कार्यालय का संचालन किया जाता है. बताते चलें कि 22 नवंबर 1994 को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र की जनता की परेशानी को देखते हुए सिंचाई विभाग के जर्जर भवन में रंग रोगन के बाद प्रखंड का उद्घाटन किया व पहले बीडीओ के रूप में यदुनंदन यादव को पदस्थापित किया गया. उद्घाटन के बाद तब से आज तक प्रखंड को अपना भवन नसीब नहीं हो पाया है. 55 राजस्व ग्राम व एक लाख आबादी, बारह पंचायत सुखासन , टेमाभेला, झिटकिया, कलौतहा , बीरगांव चतरा ,रेशना, सरौनीकला, झलाड़ी, शाहपुर विषवाड़ी, खोखसी, पीरनगर, ग्वालपाड़ा पंचायत का जोड़ा गया है. जिसकी जन संख्या लगभग एक लाख है. सिंचाई विभाग के पुराने भवन में जगह के अभाव में कर्मचारियों के बैठने की जगह कम होने से पदाधिकारीयों को काम करने में कठिनाई होती है. प्रखंड कार्यालय तो किसी तरह पूर्व के उद्घाटित भवन में चल रहा है. लेकिन सीओ को अपना कार्यालय प्रखंड परिसर में बनाये ई किसान भवन में चलाना पड़ रहा है. अब तक 26 बीडीओ इस प्रखंड का शोभा बढ़ा चुके है. लेकिन किसी ने भी भवन एवं प्रखंड की भूमि के बारे में जाजने की कोशिश नहीं की. 27 वें बीडीओ शिवेश कुमार सिंह चंदा उगाही कर एवं जन सहयोग से प्रखंड कार्यालय में रंग रोगन करवा कर बांस बत्ती से घेरा बनवाया एवं सैकड़ों गमलों में रंग बिरंगे फुल लगा कर कार्यालय सहित कार्यालय परिसर का शोभा बढाया है. लेकिन यह बात खलती रहती है कि यह भूमि तो अभी तक प्रखंड कार्यालय के नाम अधि गृहित हुई ही नहीं है. बीडीओ शिवेश कुमार एवं सीओ त्रिपुरारी शरण श्रीवास्तव ने बताया कि भवन एवं जमीन के लिए प्रयास किया जा रहा है. बहरहाल जो भी हो प्रखंड कार्यालय को 22 वर्ष तक अपनी भूमि एवं अपना घर नसीब नहीं होना इस क्षेत्र के जन प्रतिनिधि के लिए भी शोचनीय विषय है.
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