खराब हैं सदर अस्पताल का ऑक्सीजन मीटर स्वस्थ होने के बजाय बीमार हो रहे मरीज
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Jan 2020 8:13 AM
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अमन कुमार, मधेपुरा : ऑक्सीजन हमारे लिए कितना महत्व रखती है, यह हम सब जानते है. ऑक्सीजन के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. लेकिन यहीं ऑक्सीजन मात्रा से अधिक शरीर में प्रवेश करने लगे तो जानलेवा बन जाती है. शहर के सदर अस्पताल में इन दिनों ऑक्सीजन के नाम पर […]
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अमन कुमार, मधेपुरा : ऑक्सीजन हमारे लिए कितना महत्व रखती है, यह हम सब जानते है. ऑक्सीजन के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. लेकिन यहीं ऑक्सीजन मात्रा से अधिक शरीर में प्रवेश करने लगे तो जानलेवा बन जाती है.
शहर के सदर अस्पताल में इन दिनों ऑक्सीजन के नाम पर मरीजों को जीवन दान देने के वजाय लाइलाज रोग बांटी जा रही है. यह सच्चाई है जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की. जहां महीनों से ऑक्सीजन सिलिंडर का मीटर खराब है.
मरीज को बगैर किसी मापक यंत्र के नाक में पाइप डाल ऑक्सीजन को ओवरडोज दिया जा रहा है. जिसे दुरूस्त करने की जहमत विभाग के वरीय अधिकारी भी नहीं उछा रहे है. नतीजतन लोग तंदरूस्त और चंगा होने की वजाय बीमारियों के गिरफ्त में पहुंच रहे है. डॉक्टर बताते है कि शरीर में ऑक्सीजन की अत्यधिक मात्रा देने से मरीज का फेफरा खराब होने का खतरा रहता है.
पाइप को पानी में डाल बुलबुले का करते हैं इंतजार : सदर अस्पताल में रोजाना हजार के करीब मरीज इलाज के लिए आते हैं. जिसमें सामान्य घरों से पहुंचने वाले मरीजों की तादाद ज्यादा होती है. लेकिन अस्पताल प्रबंधन इसमें लापरवाही बरत रहा है.
यहां के कर्मचारी पाइप को पानी में डालकर बुलबुला निकलने का इंतजार करते है. चेक करते हैं कि सिलिंडर में ऑक्सीजन है या नहीं. ऐसे में मरीजों के जान का खतरा बना रहता है. बिना ऑक्सीजन मीटर के सिलिंडर लगा देने से मरीज की हालत अचानक गंभीर हो जाने की आशंका बनी रहती है.
कब खत्म हुई ऑक्सीजन पता करना हुआ मुश्किल : गंभीर हालत में इलाज के लिए पहुंचे मरीज के नाक में आनन फानन में ऑक्सीजन की पाइप लगा दी जाती है. लेकिन इस दौरान कब ऑक्सीजन की सिंलेंडर खाली हो गयी इसकी तस्दीक नहीं हो पाती है.
मीटर खराब रहने से सिलिंडर में गैस की कितनी मात्रा है, इसका पता नहीं चल पाता है. ऐसे में भरती मरीज सामान्य से डेंजर जोन में पहुंच जाता है. जिसके बाद मरीज को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है.
कम रखा जाता है सिलिंडर का स्टॉक : मिली जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में करीब 50 से 60 ऑक्सीजन सिलिंडर को स्टॉक में रखा जाता है. प्रभात खबर की टीम ने जब इमरजेंसी वार्ड, प्रसव वार्ड एवं अन्य वार्ड पहुंची तो इन सभी वार्डों में कुल 10 से 15 सिलिंडर मिले. जितना मरीजों की जरूरत थी.
इन सभी सिलिंडरों में ऑक्सीजन मापक यंत्र यानी मीटर लगा हुआ था. वही जिस भी मरीज को ऑक्सीजन चढ़ाया जा रहा था तो सभी सिलिंडर का मीटर काम नही कर रहा था. दो से तीन मीटर के बाहर का शीशा और सूई गायब मिला. वही कितने बार मरीज के परिजन और अस्पताल कर्मचारियों से इस पर विवाद हो जाती है. लेकिन अस्पताल प्रशासन कोई सबक नही ले रही है.
जुगाड़ तकनीक से चल रहा काम
सदर अस्पताल में इन दिनों मरीजों के इलाज में जुगाड़ तकनीक को ज्यादा तरजीह दी जा रही है. सिलिंडर में लगे ऑक्सीजन मापक यंत्र खराब हैं. सिलिंडर में ऑक्सीजन है या नहीं यह पता करने के लिए किसी बर्तन में पहले पानी रखा जाता है और फिर सिलिंडर में लगी पाइप को पानी में डाल दिया जाता है.
उसके बाद सिलिंडर के नोजल लॉक को खोला जाता है. यदि पानी में बुलबुला आया तो यह सिलिंडर में ऑक्सीजन होने के संकेत हैं. सदर अस्पताल की ऐसी व्यवस्था के कारण दलाल मरीज को अपने चुंगल में लेकर निजी अस्पताल पहुंचा देता है.
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