बारिश के बाद छपाक-छपाक करते हैं शहरवासी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Aug 2019 7:29 AM
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मधेपुरा : शुक्रवार की सुबह हुई बारिश ने शहर की सूरत बिगाड़ कर रख दी. एक भी मार्ग ऐसा नहीं जहां पानी न लगा हो. लोग पानी में छपाक-छपाक कर चलते नजर आये. बारिश से लोगों को को उमस भरी गर्मी से राहत मिली. पूरे शहर में जलजमाव होने से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो […]
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मधेपुरा : शुक्रवार की सुबह हुई बारिश ने शहर की सूरत बिगाड़ कर रख दी. एक भी मार्ग ऐसा नहीं जहां पानी न लगा हो. लोग पानी में छपाक-छपाक कर चलते नजर आये. बारिश से लोगों को को उमस भरी गर्मी से राहत मिली. पूरे शहर में जलजमाव होने से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया. भिरखी चौक व भिरखी मुहल्ला चौक की स्थिति इस कदर है कि यहां घुटने भर पानी में बड़ी गाड़ी बाइपास तरफ जाना खतरे से खाली नहीं है.
पूर्णिया गोला के पास नाला इस कदर टूटा हुआ है कि जमे पानी में पता नहीं चल पाता है. लेकिन बारिश के कारण शहर के जगजीवन पथ, रेलवे ढाला, कर्पूरी चौक, भिरखी मुहल्ला, जीवन सदन, सुभाष चौक, पूर्णिया गोला चौक समेत विभिन्न जगह पर जल जमाव हो गया है.
भिरखी, पूर्णिया गोला चौक पर होकर गुजरे सैकड़ों बाइक में से दर्जनों बाइक चालक गिर कर जख्मी भी हो गये. हालांकि इस दौरान कोई बड़ी घटना नहीं घटी. अगर जल्द जल जमाव के दिशा कोई पहल नहीं किया गया तो बड़ी घटना भी घट सकती है.
हल्की बारिश में होता है जलजमाव : शहर की मुख्य सड़क के अलावा कुछ अन्य जगहों पर हल्की सी भी बारिश होने पर जलजमाव तुरंत हो जाता है. शहर में पानी टंकी चौक के पास, सदर अस्पताल के निकट मुख्य सड़क पर, थाना गेट के पास समेत अन्य जगहों पर हल्की सी भी बारिश में पानी जमा हो जाता है. पानी टंकी चौक पर मोड़ होने के कारण यहां सड़क एक ओर ऊंची तथा दूसरी ओर नीची है. निचले हिस्से में जमा पानी को सूखने में करीब पंद्रह दिन लगते हैं.
इस बीच अगर फिर से बारिश हो गयी तो लोगों को फिर अगले 15 दिन का इंतजार करना पड़ता है. सड़क के किनारे स्थित दुकानदारों ने तो सड़क से दुकान तक पहुंचने के लिए मिट्टी डाल कर अस्थायी जुगाड़ कर लिया है. लेकिन इस जमा पानी में एक सप्ताह बाद संक्रामक कीड़े पनपने लगते हैं. इस ओर न नगर परिषद का ध्यान है न ही स्थानीय प्रशासन का.
निकासी नहीं रहने के कारण 15 दिनों तक रहता है जलजमाव
पुरानी बाजार में भी मुख्य सड़क पर पानी जमा हो गया. बारिश के बाद यह आम बात है. सड़क निर्माण के समय लेवल मिलाने में हुई गड़बड़ी के कारण बारिश के बाद पानी सड़क पर ही रह जाता है. धूल और मिट्टी के कारण यहां कीचड़ भी बन जाता है. जबकि यहां सड़क में पीसीसी निर्माण है. यहां से गुजरते हुए लोग सावधान रहते हैं कि कहीं कीचड़ का छींटा उनके कपड़ों पर आ जाए.
हालांकि अगर धूप ठीकठाक हो तो यहां का पानी दो दिन में ही सूख जाता है. थाना चौक से पंचवटी चौक तक जाने वाली सड़क सांसद रोड का हाल भी बुरा है. जल निकासी का इंतजाम नहीं है. यहां भी करीब पचास मीटर तक पानी जमा रहता है. बारिश के बाद इस सड़क से केवल वाहन सवार ही गुजर सकते हैं. पैदल चलने वालों के लिए इस सड़क का इस्तेमाल काफी दुश्वार होता है.
स्टेशन के शेड से टपकता है पानी
मधेपुरा. शुक्रवार की दोपहर हुई बारिश से दौरम मधेपुरा रेलवे स्टेशन पर पूरे यात्री शेड में पानी का जमावड़ा देखने को मिला. हालांकि रेलवे स्टेशन के कई महत्वपूर्ण कार्यालय व यात्री शेड से पानी टपकने की शिकायत पूर्व से ही की जाती रही है, लेकिन इसको लेकर विभाग ने आजतक कोई कदम नहीं उठाया है.
मौजूद यात्रियों ने कहा कि रेलवे अपने यात्रियों को मामूली सुविधा देने में भी फिसड्डी साबित हो रही है. जहां धूप और बरसात से निजात दिलाने के लिए न तो पर्याप्त शेड ही हैं. वहीं पूर्व से लगे यात्री शेड से भी पानी टपकता है. मालूम हो कि मधेपुरा जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर कुछ ही हिस्सा में शेड लगाया गया है. जबकि तीन चौथाई भाग शेड विहीन है.
प्लेटफार्म पर जहां भी शेड लगे हैं. वहां पानी टपकता रहता है. मौजूद लोगों ने बताया कि रेलवे द्वारा शेड के साथ पिलर के नीचे रेल यात्रियों को बैठने के लिए चबूतरा बनाया गया है, लेकिन चबूतरा भी पानी से सुरक्षित नहीं है. बारिश के दौरान पानी टपकने से खासकर बुजुर्ग व महिलाओं को भारी परेशानी होती है.
अधिकारी से लेकर आम लोग तक परेशान
बारिश से जिला मुख्यालय के सड़कों पर पानी जमा हो गया. बारिश के कारण मुख्यालय के नालों के उपर से पानी बहने लगा. जिस कारण मुख्य बाजार में नीचे बैठ कर समान बेचने वाले फूटकर दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा.
बारिश से शहर की सड़कों पर लोगों का पैदल चलना हुआ दुश्वार हो गया. बारिश से मुख्यालय स्थित कई अहम सरकारी कार्यालय परिसर झील में तब्दील हो चुका है.
इसमें मुख्य रूप से डीआरडीए परिसर, सदर अस्पताल परिसर सहित अन्य कार्यालय परिसर पानी भर गया है. कार्यालयों में जाने के लिए आम लोगों के साथ-साथ पदाधिकारी व कर्मचारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. लोग हाथ में जूता चप्पल लेकर किसी तरह पानी को पांव से धकलते हुए कार्यालय पहुंच रहे थे.
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