जम्मू-कश्मीर के विभाजन को ले पुतला दहन

Updated at : 08 Aug 2019 7:16 AM (IST)
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जम्मू-कश्मीर के विभाजन को ले पुतला दहन

मधेपुरा : भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर का विभाजन करने, अनुच्छेद 370 व 35 ए को हटाने, देश के विभिन्न हिस्सों में दलितों और अकलियतों के साथ मॉबलिंचिंग करने व उन्नाव रेप पीड़िता सहित उसके परिवार के सदस्यों को सुनियोजित रूप से हत्या करने के खिलाफ बुधवार को समाहरणालय के समक्ष भाकपा, माकपा के कार्यकर्ताओं […]

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मधेपुरा : भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर का विभाजन करने, अनुच्छेद 370 व 35 ए को हटाने, देश के विभिन्न हिस्सों में दलितों और अकलियतों के साथ मॉबलिंचिंग करने व उन्नाव रेप पीड़िता सहित उसके परिवार के सदस्यों को सुनियोजित रूप से हत्या करने के खिलाफ बुधवार को समाहरणालय के समक्ष भाकपा, माकपा के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया. वाम दलों के नेताओं ने कहा कि देश में तनाव, आतंकवाद का वातावरण है.

भाकपा के राष्ट्रीय परिषद सदस्य प्रमोद प्रभाकर ने कहा कि देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था, बंद होते उद्योग, धड़ल्ले से बिक रहे सार्वजनिक क्षेत्र, छिनती नौकरियां, घटते रोजगार सोची समझी चाल है.
माकपा के राज्य कमेटी सदस्य गणेश मानव ने कहा कि मोदी सरकार अलोकतांत्रिक व असंवैधानिक तरीके से जम्मू कश्मीर का विभाजन किया है. भाकपा माले के जिला संयोजक रामचंद्र दास ने कहा कि मात्र जम्मू कश्मीर में ही विशेष सुविधाएंं नहीं थी.
बल्कि नागालैंड में 371 ए, आसाम और मेघालय में 371 बी, मणिपुर में 371 सी, कर्नाटक में 371 डी और इ, अरुणाचल प्रदेश व सिक्किम में 371 एफ और एच, मिजोरम में 371 जी, इसके अलावा भी गोवा, हिमाचल प्रदेश व झारखंड में विशेष अधिकार प्रदत्त है. भाकपा के जिला मंत्री विद्याधर मुखिया ने कहा कि मोदी सरकार लगातार संविधान पर हमला कर रही है. लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म करने को आतुर है.
मौके पर भाकपा नेता रमन कुमार, एआइवाइएफ के प्रांतीय उपाध्यक्ष शंभू क्रांति, एआइएसएफ के जिलाध्यक्ष मो वसीम उद्दीन, छात्र नेता सौरभ कुमार, पवन कुमार सुमन, मो शमीम, सनाउल्लाह, मो चांद, रामचंद्र पोद्दार, मो आफताब, इरशाद, गुड्डू, एसएफआई संयोजक राजदीप कुमार, विमल विद्रोही, मजदूर नेता सुभाष मल्लिक, चंद्र किशोर कुमार, मो मुस्तुफ आदि शामिल थे.
जल्द ही अब सभी पशुपालक को ऐसी स्थिति में मुआवजा दिया जायेगा. मंत्री ने बताया कि पहले आपदा के तहत जैसे बाढ़ के पानी में डूबने से मरने वाले लोगों को चार लाख दिया जाता था. अब नहर में मरने वाले लोगों को चार लाख रुपये मिलेगा.
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