पुत्र के शव को गोद में उठा लगाते रहे गुहार, नहीं मिली एंबुलेंस, तो बाइक पर ले गये घर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 May 2019 7:17 PM
मधेपुरा (चौसा) : दुनिया का सबसे बड़ा बोझ एक पिता के कंधे पर जवान बेटे की अर्थी होती है. शनिवार को यह बोझ उठाते बिहार के मधेपुरा में चौसा पूर्वी पंचायत के खोखन टोला निवासी श्याम साह पर तो बीती ही है, लेकिन शव को घर तक ले जाने के लिए एंबुलेंस व शव वाहन […]
मधेपुरा (चौसा) : दुनिया का सबसे बड़ा बोझ एक पिता के कंधे पर जवान बेटे की अर्थी होती है. शनिवार को यह बोझ उठाते बिहार के मधेपुरा में चौसा पूर्वी पंचायत के खोखन टोला निवासी श्याम साह पर तो बीती ही है, लेकिन शव को घर तक ले जाने के लिए एंबुलेंस व शव वाहन का नहीं मिलना सामाजिक व्यवस्था ही नहीं शासन व प्रशासन को शर्मसार करने के लिए काफी है.
ज्ञात हो कि श्याम साह के 15 वर्षीय पुत्र की तबीयत खराब होने पर उसे इलाज के लिए स्थानीय एक निजी क्लिनिक में भर्ती कराया गया था, जहां किशोर की तबीयत ज्यादा खराब होने पर परिजनों द्वारा मुख्यालय स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लाया गया, जहां तैनात चिकित्सक डॉ राकेश कुमार ने मरीज को मृत घोषित कर दिया. युवा पुत्र के असमय मृत्यु से पिता सहित परिजन चीत्कार करने लगे. जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से शव को घर तक ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन की मांग की गयी, जिसे अस्पताल प्रबंधन ने सिरे से खारिज करते अपना पल्ला झाड़ लिया. जिसके बाद पुत्र के शव को गोदी में उठाये पिता अस्पताल के वरीय अधिकारियों से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने इनकी एक न सूनी.
गोदी में शव को देख बाइक वाले ने की मदद
चौसा प्रखंड अंतर्गत चौसा पूर्वी पंचायत के खोखन टोला निवासी अमरजीत की मौत के बाद एंबुलेंस व शव वाहन उपलब्ध नहीं होने पर रोते बिलखते पिता शव को लेकर अस्पताल के मुख्य द्वार पर आ गये, जहां कोई व्यवस्था नहीं होने पर बाइक सवार एक व्यक्ति ने हमदर्दी दिखाते मृतक के परिजनों की मदद की. जिसके बाद पुत्र के शव को बाइक के बीच में रखकर अपने घर तक ले गये. बाइक पर शव को ले जाते पिता की आंखों में पुत्र शोक के अलावा शासन व्यवस्था की संवेदनहीन कवायद आक्रोश बन जाहिर हो रही थी.
पहले बहानेबाजी, फिर बोला नहीं देंगे एंबुलेंस
मृतक के पिता ने बताया कि शव को घर तक पहुंचाने के लिए जब अस्पताल के कर्मियों से बात की गयी तो उन्होंने एंबुलेंस चालक के नहीं रहने का बहाना बनाया. इसके बाद जब चालक की व्यवस्था की गयी तो प्रबंधन द्वारा मदद के नाम पर हाथ खड़े कर दिये गये. स्थानीय लोगों द्वारा भी अस्पताल के कर्मियों को मानवता का हवाला देते लगातार मांग की गयी, लेकिन सभी ने मदद से इन्कार कर दिया.
मरने के बाद शव वाहन की भी रह गयी दरकार
खांसी की वजह से बढ़ी मर्ज का बेहतर इलाज नहीं होने की वजह से पुत्र को गंवाने वाले पिता श्याम को शव ले जाने के लिए एक अदद शव वाहन की व्यवस्था प्रखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में नहीं हो सकी, जो स्वास्थ्य महकमा की पोल खोलने के लिए नाकाफी है. लोगों के बीच इस बात की चर्चा हो रही थी कि बेहतर इलाज तो दूर शव वाहन का नहीं मिलना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है.
क्या कहते हैं चिकित्सक
शव को घर तक पहुंचाने के लिए शव वाहन की व्यवस्था पीएचसी में नहीं है. इस वजह से मृतक के परिजनों को सहायता नहीं मिल सकी. (डॉ राकेश कुमार, चिकित्सक, पीएचसी)
क्या कहते हैं अधिकारी
पीएचसी प्रभारी डॉ विमल कुमार ने कहा कि मैं अभी पटना में हूं. मुझे मामले की कोई जानकारी नहीं है. इस बात की जानकारी लेता हूं कि एंबुलेंस क्यों नहीं उपलब्ध कराया गया. वहीं, मधेपुरा सिविल सर्जन डॉ शैलेंद्र कुमार ने कहा कि चौसा पीएचसी में क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक लाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था है. उस पर शव को ले जाने की मनाही है. फिलवक्त पीएचसी में शव वाहन की कोई व्यवस्था नहीं है.
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