हर रात जगती थी ललिता, बचाती थी अस्मत

Updated at : 28 Nov 2017 6:27 AM (IST)
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हर रात जगती थी ललिता, बचाती थी अस्मत

महेशुआ चौड़ा (मधेपुरा) : पटना के शीतला नर्सिंग होम में बंधक बना कर रखी गयी ललिता घर पहुंच गयी. यहां आकर जब उसने अपने साथ हुए जुल्म की कहानी सुनायी, तो लोगों के रोंगटे खड़े हो गये. ललिता के साथ हुई घटना न केवल व्यवस्था की पोल खोलता है बल्कि मानवीयता पर भी सवाल खड़ा […]

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महेशुआ चौड़ा (मधेपुरा) : पटना के शीतला नर्सिंग होम में बंधक बना कर रखी गयी ललिता घर पहुंच गयी. यहां आकर जब उसने अपने साथ हुए जुल्म की कहानी सुनायी, तो लोगों के रोंगटे खड़े हो गये. ललिता के साथ हुई घटना न केवल व्यवस्था की पोल खोलता है बल्कि मानवीयता पर भी सवाल खड़ा करता है.

नर्सिंग होम में बंद ललिता को एक समय का खाना बड़ी मुश्किल से मयस्सर होता था. उसके मानसिक रूप से कमजोर पति निर्धन राम से शौचालय की सफाई करायी जाती थी. बदले में जब वह खाना मांगता, तो उसे खाने के बदले गाली मिलती थी. पेट की आग जो न कराये. निर्धन नर्सिंग होम के बाहर मांग कर खुद भी खाता और चुपके से ललिता को भी
खिलाता था.
अपनी आपबीती सुनाते-सुनाते ललिता फफक कर रो पड़ती है. जैसे ही अंधेरा घिरने लगता ललिता सहमती जाती थी कि पता नहीं आज की रात वह दरिंदों से बच पायेगी या नहीं. हर रात उसके लिए सजा बन कर आती थी.
रात भर जग…
कमरे का बल्ब बंद होते ही वह डर कर उठ जाती थी. दरिंदों की नजर उसकी अस्मत पर थी पर रात रात भर जाग कर ललिता ने किसी तरह अपनी आबरू को लूटने से बचाया. ललिता की दर्द भरी कहानी सुन कर लोगों की आंखें डबडबा गयीं. रविवार की देर रात अपने घर हनुमान नगर चौड़ा पहुंची ललिता पटना के नर्सिंग होम से 12 दिनों के बाद मुक्त हुई. उसे देखने के लिए सोमवार सुबह ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी.
एक ग्लास पानी के लिए तरसती रही ललिता
ललिता व निर्धन राम ने कहा कि ऑपरेशन के बाद से नर्सिंग होम के डॉक्टर कर्मी व उनके परिजनों ने पैसाें के लिए ताना मारना शुरू कर दिया था. बेटा कुंदन भीख मांग कर डॉक्टर के खाते में पैसे भिजवाता रहा. इसके बाद भी 70 हजार रुपये की डिमांड करते हुए वे हैवानियत पर उतर आये. निर्धन ने कहा कि पहले दिन से ही उसे ललिता से अगल कर दिया गया. मिलने की कोशिश करते तो डांट कर भगा दिया जाता था. ललिता एक ग्लास पानी के लिए तरसती रहती थी. वहीं ललिता ने कहा कि बेड पर से पानी के लिए चिल्ला-चिल्ला कर जब थक जाते थे, तो किसी तरह दीवार के सहारे नल तक पहुंच कर प्यास बुझाते थे.
बेटा गांव में तो पिता पटना में मांग रहा था भीख
मधेपुरा शहर से 12 किलोमीटर उत्तर पूर्व दिशा में स्थित सदर प्रखंड के महेशुआ पंचायत अंतर्गत हनुमान नगर चौड़ा वार्ड नंबर बीस निवासी निर्धन राम का बेटा कुंदन बंधक बनी मां ललिता को छुड़ाने के लिए गांव-गांव भीख मांग रहा था, तो पटना में निर्धन दुकानों पर भीख मांग कर अपनी पेट की आग बुझा रहा था. निर्धन ने कहा कि एक दिन चुपके से जब ललिता के लिए खाना लेकर जा रहे थे, तो नर्सिंग होम के संचालक व कर्मी ने पकड़ कर उसके साथ मारपीट की और खाना छीन कर फेंक दिया.
ललिता-निर्धन को मिली काला पानी जैसी सजा
घर लौटे ललिता व निर्धन डॉक्टर का नाम सुन कर अब सहम जाते हैं. उन्हें पटना के नर्सिंग होम में काला पानी से भी बदतर सजा दी जा रही थी. मौत के मुंह से निकले निर्धन व ललिता ने कहा कि एक दो दिन भी अगर वहां से मुक्त होने में लेट होता तो उन दोनों की मौत तय थी. पति पत्नी को कई दिनों से दूर रखा जा रहा था. ललिता ने कहा कि मरे हुए बच्चे को भी एक बार देखने नहीं दिया गया.
अब घर पर ललिता को इलाज की दरकार
जीविका का साधन एक गाय थी. वह भी पटना में इलाज के दौरान बिक गयी. उन्होंने कहा कि सुबह से गांव वालों ने हाल चाल लिया है, लेकिन प्रशासनिक या स्वास्थ्य विभाग के किसी अधिकारी ने उसकी खोज नहीं की. ताजा घाव का दर्द सह रही ललिता को अब भी इलाज की दरकार है. पटना से बिना दवा के लौटी ललिता को न तो दवा के लिए पैसे हैं और न ही गांव से 12 किलोमीटर दूर सदर अस्पताल जाने के लिए गाड़ी भाड़ा.
दस दिनों तक नर्सिंग होम में बंधक बनी ललिता व निर्धन को प्रताड़ित किया गया है. महादलित महिला ललिता की दर्द भरी कहानी सुन कर गांव वाले मर्माहत हैं. मामले को मानवाधिकार आयोग तक लेकर जायेंगे.
शोभा कांत राम, वार्ड सदस्य, वार्ड नंबर-20, महेशुआ
महादलित महिला के साथ इस तरह का अत्याचार मानवता को शर्मसार कर रही है. पटना से मुक्त होकर घर पहुंची ललिता की कहानी सुन कर ग्रामीण आक्रोशित हैं. मामले को लेकर जिले के वरीय पदाधिकारी से मिलेंगे.
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