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सिंदूर खेला के साथ महिलाओं ने दी मां दुर्गा को विदाई

Updated at : 03 Oct 2025 6:55 PM (IST)
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सिंदूर खेला के साथ महिलाओं ने दी मां दुर्गा को विदाई

नया बाजार स्थित बड़ी दुर्गा स्थान, पुरानी बाजार स्थित छोटी दुर्गा स्थान व चितरंजन रोड अभिमन्यु चौक मुख्य सड़क पर अमिय भारत माता पूजा समिति और मुख्य सड़क महावीर स्थान में स्थापित होने वाले भारत माता प्रतिमा पंडाल निकट महिलाओं ने सिंदूर खेला के साथ मां को विदाई दी.

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बड़ी व छोटी दुर्गा स्थान व भारत माता पंडाल के निकट सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं ने जमकर लगाये ठुमके

एक दूसरे को सिंदूर लगाकर पति के दीर्घायु की मां से किया प्रार्थना

लखीसराय. शहर में शुक्रवार को मां दुर्गा की विदाई महिलाओं ने सिंदूर खेला के साथ दी. इस दौरान शहर के नया बाजार स्थित बड़ी दुर्गा स्थान, पुरानी बाजार स्थित छोटी दुर्गा स्थान व चितरंजन रोड अभिमन्यु चौक मुख्य सड़क पर अमिय भारत माता पूजा समिति और मुख्य सड़क महावीर स्थान में स्थापित होने वाले भारत माता प्रतिमा पंडाल निकट महिलाओं ने सिंदूर खेला के साथ मां को विदाई दी. महावीर स्थान में गुरुवार और अभिमन्यु चौक पर शुक्रवार को महिलाओं ने सामूहिक रूप से भारत माता की प्रतिमा पर श्रद्धा व भक्ति पूर्वक सिंदूर चढ़ाकर पहले मां का पूजा-अर्चना किया. पूजन उपरांत मां पर चढ़े सिंदूर को महिलाओं ने प्रसाद के रूप में एक दूसरे के मांग में लगाकर मां दुर्गा से अपने सुहाग की दीर्घायु का आशीर्वाद मांगा. इस दौरान महिलाओं ने डीजे के माध्यम से बज रहे मधुर भक्ति गीत की मधुर धुन पर जमकर ठुमके भी लगाये. भारत माता प्रतिमा की विदाई सह सिंदूर खेला कार्यक्रम में महिलाओं का नेतृत्व कर रही महिलाओं ने बताया कि आज से लगभग 450 वर्ष पूर्व बंगाल से मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन से पहले सिंदूर खेला उत्सव मनाने का परंपरा आरंभ हुआ था, जो देश के विभिन्न राज्य के साथ दुनिया के कई देश में विस्तारित हो गया. इस दिन महिलाएं मां दुर्गा से अपने पति के दीर्घायु होने की कामना रखते हुए उनकी आराधना पूजा-अर्चना के साथ करती हैं. सिंदूर खेला मां की विदाई के उपलक्ष्य में उत्साह के साथ मनायी जाती है, जो काफी हद तक मां की विदाई के भावुक क्षण को उत्साह में परिवर्तित करने को मनोबल प्रदान करती है. मान्यता के अनुसार मां दुर्गा ससुराल को छोड़कर इस दौरान नौ दिन तक अपने मायके में रहती हैं. नवरात्र के उपरांत दशमी के दिन मायके से मां की विदाई की जाती है. जिसके उपलक्ष्य में सिंदूर खेला परंपरा का शुभारंभ हुआ. उन्होंने बताया कि मान्यता यह भी है कि मां दुर्गा साल भर में एक बार मायके आती हैं और 10 दिन रूकने के बाद फिर ससुराल जाती है. मां के रूकने को मां दुर्गा के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. जिस प्रकार लड़की मायके आती है और उसकी सेवा की जाती है. उसी प्रकार नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना व सेवा की जाती है. 10वें दिन माता पार्वती अपने घर भगवान शिव के पास कैलाश पर्वत पर चली जाती हैं. अमिय भारत माता पंडाल के निकट गत वर्ष 2022 से सिंदूर खेला की शुरुआत की गयी जो धीरे-धीरे आम महिलाओं के बीच अपने शहर में भी प्रचलित होने लगी है. जबकि महावीर स्थान में पहली बार सिंदूर खेला उत्सव का आयोजन किया गया. जिसमें महिलाओं ने काफी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. मौके पर अदिति कुमारी, आकांक्षा कुमारी, नूतन कुमारी, निवेदिता राज, मुस्कान कुमारी, खुशी कुमारी, निधि कुमारी, सुरुचि कुमारी, दिव्या कुमारी, पिंटू यादव, प्रशांत कुमार राज, संजीत कुमार, राजकुमार एवं विवेक केसरी सहित अन्य लोग मौजूद थे.

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डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Rajeev Murarai Sinha Sinha

लेखक के बारे में

By Rajeev Murarai Sinha Sinha

Rajeev Murarai Sinha Sinha is a contributor at Prabhat Khabar.

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