शिक्षा विभाग में हुई घोटाला को लेकर अधिकारियों एवं प्रधानाध्यापकों के गर्दन पर लटक रही तलवार

Updated at : 23 Apr 2025 7:08 PM (IST)
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शिक्षा विभाग में हुई घोटाला को लेकर अधिकारियों एवं प्रधानाध्यापकों के गर्दन पर लटक रही तलवार

दो चार योजनाओं को छोड़कर शेष सभी योजनाएं चार लाख 98 हजार एवं चार लाख 95 हजार रुपये की है.

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-बिना कार्य किये कागजी घोड़ा दौड़ा कर योजना की राशि निकालने के लिए मोटा कमीशन लिये जाने की चर्चा-विद्यालय के विभिन्न योजनाओं में लगभग 35 करोड़ रुपये का हुआ है घोटाला -स्वतंत्र एजेंसी से जांच करने पर खुल सकता है बड़ा रहस्य प्रतिनिधि, लखीसराय. शिक्षा विभाग में करोड़ों के घोटाले में विभाग कई अधिकारी एवं कर्मचारी के गर्दन पर तलवार लटकी हुई है. शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला है, जिसकी जांच अगर ईमानदारी पूर्वक किया गया तो लाखों नहीं बल्कि करोड़ों में घोटाला होने की बात सामने आयेगी. कहीं कहीं तो धरातल पर ही कार्य नहीं कर मोटा कमीशन लेकर बिल पर अधिकारियों के द्वारा हस्ताक्षर कर दिया गया है और बिल निकाल लिया गया है. शिक्षा विभाग के दो डीपीओ कार्यालय में इस तरह की कुकृत्य अधिक हुई है फिर भी दोनों डीपीओ का अभी तक बाल भी बांका नहीं हुआ है. हिमांशु नामक व्यक्ति के नाम पर 37 से अधिक योजना मरम्मती, बोरिंग एवं चहारदीवारी योजनाएं है, जिसमें अधिकांश योजना मरम्मत कार्य का है. इसमें दो चार योजनाओं को छोड़कर शेष सभी योजनाएं चार लाख 98 हजार एवं चार लाख 95 हजार रुपये की है. शिक्षा विभाग में वित्तीय वर्ष 2023-2024 एवं 2024-2025 में साढ़े तीन सौ से अधिक योजनाएं ऐसी हैं जिसमें एक दो दर्जन योजनाओं को छोड़कर शेष सभी योजनाओं में छोटी एवं बड़ी से बड़ी घोटाला की गयी है. घोटाला की जांच रिपोर्ट 22 अप्रैल 2025 तक दे देना है.

35 करोड़ से अधिक राशि का किया गया है घोटाला

शिक्षा माफिया ने विभिन्न योजनाओं में शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से मिलकर जानबूझकर लगभग 35 करोड़ रुपयों से अधिक घोटाला किया गया है. सभी घोटालों में सब का बराबरी की हिस्सेदारी है. स्वतंत्र एजेंसी से अगर इसकी जांच करायी जायी तो एक भी दोषी अधिकारी कर्मचारी नहीं बच पायेगा. साथ ही शिक्षा माफिया की पोल भी खुल जायेगा. अगर दोषियों को एक बार सजा मिली तो दूसरे विभाग के अधिकारियों एवं घोटालेबाज में हड़कप मच जायेगी. फिर अधिकारी कर्मचारी या माफिया को इस तरह के घोटाले के लिए अनेकों बार सोचना पड़ेगा. शिक्षा विभाग विद्या का मंदिर कहा जाता है, लेकिन उसमें बैठे भगवान ही शैतान बन बैठे हैं.

घोटाला उजागर के एक सप्ताह बाद भी नहीं हुआ प्राथमिकी दर्ज

घोटाला उजागर होने के बाद भी अभी तक किसी एक पर भी प्राथमिकी दर्ज नहीं हुआ है. जबकि जांचकर्ताओं ने 90 योजनाओं के बारे स्पष्ट कर दिया कि यह योजना धरातल पर कहीं दिख नहीं रहा है. जबकि एमबी कर लिया गया. इस बात को लेकर प्रेस कांफ्रेंस डीएम मिथलेश मिश्र ने कहा कि योजनाओं में गड़बड़ी करने वाले एजेंसी को काली सूची में डालकर उन पर प्राथमिकी दर्ज करने के लिए संबंधित अधिकारी को आदेश दे दिया गया है. बावजूद इसके अभी तक किसी पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गयी है.

————————————————-शिक्षा विभाग में घोटाला की निष्पक्ष जांच के लिए डीपीओ का निलंबन की मांग-भाकपा कार्यकारिणी ने डीएम को पत्र लिखकर किया अवगतप्रतिनिधि, लखीसराय. भाकपा कार्यकारणी सदस्य व अधिवक्ता रजनीश कुमार ने शिक्षा विभाग में हुई घोटाला की निष्पक्ष जांच के लिए डीपीओ स्थापना सह योजना एवं लेखा संजय कुमार को निलंबन एवं संचिकाओं में छेड़छाड़ करने के आरोप में विधिवत कार्यवाई करने को लेकर डीएम को आवेदन देकर मांग किया है. भाकपा नेता सह अधिवक्ता ने डीएम को लिखे गये पत्र में कहा गया है कि 16 अप्रैल को डीपीओ स्थापना सह योजना एवं लेखा ने भवदीय को प्रतिवेदित किया है कि हिमांशु नाम से स्थापना या योजना एवं लेखा में कोई संचिका नहीं है जो कि भ्रामक एवं शासन प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की गयी है. जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में विद्यालय के मरम्मती के लिए असैनिक कार्य की संचिका खोली गयी है. जिसकी सूची 10 जुलाई 2024 को जिला शिक्षा पदाधिकारी समेत छह पदाधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर कर जारी किया. इसके बावजूद भी भवदीय को गलत प्रवेदित किया है. इसलिए घोटाले घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए डीपीओ संजय कुमार को निलंबित किया जाय.

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Rajeev Murarai Sinha Sinha

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By Rajeev Murarai Sinha Sinha

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