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18वीं राधामोहन वार्षिकोत्सव के मौके पर चल ही रामकथा में बह रही भक्ति रस की धारा

नगर स्थित राधामोहन ठाकुरबाड़ी में आयोजित नौ दिवसीय 18वें श्री राधामोहन वार्षिकोत्सव के अवसर पर चल रही रामकथा के दूसरे दिन सोमवार को भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला.

-रामकथा के दूसरे दिन तुलसीदास जन्म प्रसंग और रामचरितमानस महात्म्य का किया गया भावपूर्ण वर्णन बड़हिया. नगर स्थित राधामोहन ठाकुरबाड़ी में आयोजित नौ दिवसीय 18वें श्री राधामोहन वार्षिकोत्सव के अवसर पर चल रही रामकथा के दूसरे दिन सोमवार को भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला. मथुरा से आये कथावाचक अखिलेश शास्त्री ने रामकथा के दूसरे दिन गोस्वामी तुलसीदास जी के जन्म प्रसंग एवं श्रीरामचरितमानस के महात्म्य का भावपूर्ण और ओजस्वी वर्णन किया.कथावाचक अखिलेश शास्त्री ने बताया कि तुलसीदास जी का जन्म ऐसे कालखंड में हुआ, जब समाज आध्यात्मिक एवं नैतिक संकट से गुजर रहा था. ऐसे समय में उन्होंने रामचरितमानस की रचना कर जन-जन को प्रभु श्रीराम के आदर्शों से जोड़ा. उन्होंने कहा कि रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को मर्यादा, सत्य, करुणा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाला अनुपम ग्रंथ है. कथा के दौरान उन्होंने राम नाम की महिमा बताते हुए कहा कि रामचरितमानस का पाठ करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन को शांति प्राप्त होती है. कथा के दौरान पंडाल “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा और श्रद्धालु भावविभोर हो उठे. इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुष उपस्थित रहे. कथा के समापन पर आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया. आयोजन समिति ने बताया कि आगामी दिनों में रामकथा के अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जायेगा.

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