निष्पक्षता व लोकतंत्र के सिद्धांतों के प्रतीक है देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद
Published by : Rajeev Murarai Sinha Sinha Updated At : 03 Dec 2025 5:40 PM
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स्काई विजन पब्लिक स्कूल में मनायी गयी डॉ राजेंद्र बाबू की जयंती
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स्काई विजन पब्लिक स्कूल में मनायी गयी डॉ राजेंद्र बाबू की जयंती
वक्ताओं ने देशरत्न की कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर डाला प्रकाश
लखीसरायशहर के नया बाजार स्थित स्काई विजन पब्लिक स्कूल में बुधवार को विद्यालय प्राचार्य मैग्डलीन गोम्स की अध्यक्षता में महान स्वतंत्रता सेनानी, भारत के प्रथम राष्ट्रपति सह संविधान सभा के अध्यक्ष भारत रत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती मनायी गयी. कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय सचिव सबिता शर्मा एवं प्राचार्य द्वारा डॉ राजेंद्र प्रसाद की तैलीय चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गयी. तत्पश्चात सभी शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने उनको श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया एवं उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया. विद्यालय प्राचार्य गोम्स ने अपने संबोधन में कहा कि 1950 में जब भारत गणतंत्र बना तो संविधान सभा ने डॉ राजेंद्र प्रसाद को इसका पहला अध्यक्ष चुना. अध्यक्ष के रूप में राजेंद्र बाबू ने पदाधिकारी के लिए निष्पक्षता और स्वतंत्रता की परंपरा स्थापित की और कांग्रेस पार्टी की राजनीति से संन्यास ले लिया. औपचारिक राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बावजूद राजेंद्र बाबू ने भारत में शिक्षा के विकास को प्रोत्साहित किया और कई अवसरों पर सरकार को सलाह दी. वर्ष 1957 में प्रसाद पुनः राष्ट्रपति पद के लिए चुने गये और दो पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाले एकमात्र राष्ट्रपति बने. डॉ राजेंद्र प्रसाद लगभग 12 वर्षों के लंबे कार्यकाल तक पद पर बने रहे. उन्होंने कहा कि उनके राकार्यक्रम के दौरान सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी मौजूद थे. ————————————————डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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