अचानक बारिश होने से धान की फसल को पहुंचा नुकसान
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 25 Oct 2024 8:52 PM
प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र अंतर्गत अचानक बारिश होने से आफत ज्यादा और राहत कम है. धान की फसल को भारी नुकसान ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है.
हलसी. प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र अंतर्गत अचानक बारिश होने से आफत ज्यादा और राहत कम है. धान की फसल को भारी नुकसान ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है. मॉनसून की विदाई के बाद बुधवार की रात से लगातार बारिश हो रही है. इस हालात से फायदा कम, नुकसान ज्यादा दिख रहा है. इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ शंभू राय ने बताया कि धान कि पकी व कटी फसल को काफी नुकसान बताया जा रहा है. दलहन की बुआई भी थम गयी है. मौसम विज्ञानी कुछ दिनों से बारिश की संभावना जता रहे थे लेकिन लोगों को ऐसी बारिश की उम्मीद नहीं थी. बुधवार की रात से हवा के साथ शुरू हुई, बारिश से पक चुकी धान की फसल गिरने से 30 फीसद से ज्यादा का नुकसान बताया जा रहा है. धान कटनी एवं दलहन बुआई प्रभावित हुई है. बारिश होने से जमीन में नमी आ जाने से बुआई करने की अवधि बढ़ गया है. मेथी, पालक, मटर, बथुआ, सरसों तथा बैंगन, टमाटर और मिर्च आदि फसलों की बुआई अब 15 से 20 दिन विलंब से होगी. सब्जियों के दामों में वृद्धि हो सकती है. कम अवधि वाले धान बारिश से धान के पौधों खेतों में गिर गये हैं. वहीं तैयार हुई धान की क्वालिटी बारिश से खराब होने की भी संभावना है. वहीं जो धान के वाली में दुध आ गया वह धान में नुकसान नहीं पहुंचेगा, जो धान के वाली में दुध अभी नहीं आया है तो उस धान में थोड़ा बहुत क्षति पहुंच सकती है. वहीं जो धान की कटनी होनी थी, उसे धान में समय लग सकता है एवं रबी फसल की बुआई करने के समय बढ़ गया गया है. बुधवार की रात करीब 15.2 एमएम एवं गुरुवार की रात लगभग 14.2 एमएम बारिश हुई.
तेज हवा व बूंदाबांदी से गिरा धान का फसल, किसान हताश
मेदनीचौकी. प्रखंड के पूर्वी सलेमपुर पंचायत के गहराई वाले रकवों में बुधवार की रात हुई तेज हवा के साथ बूंदाबूंदी बारिश से कई किसानों के गहराई वाले खेतों में धान की फसल गिर गया है. जिससे प्रभावित किसान हताश होने लगे हैं. किसान कपिलदेव यादव, बबलू यादव सोने लाल आदि कई किसानों ने बताया कि पिछले साल की तरह इस बार भी चित्रा नक्षत्र में धान के फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है. धान के गहराई वाले कई खेत ऐसे हैं, जहां थोड़ी सी तेज हवा में धान गिरने की संभावना हमेशा बनी रहती है. बताया जा रहा है कि अभी धान की बालियां पौधे में निकला हीहै, ऐसे समय में धान के गिरने से उसमें धान की बालियां सूखकर नुकसान हो जायेगा. ऊपज के नाम पर सिर्फ पुआल ही हाथ आयेगा. अभी कुछ खेतों में तेज हवा से धान के फसल के अचानक गिरने से नुकसान की संभावना को देखकर किसान हताश हो रहे हैं.
मौसम खराब होने के आसार से धान के किसान चिंतित
मेदनीचौकी. अचानक मौसम खराब होने के आसार से खासकर धान के किसान हताश होते दिखे. किसानों ने बताया कि अभी चित्रा नक्षत्र चल रहा है. इस नक्षत्र में बारिश और आंधी का दौर चलता है. जिससे धान के पौधे को खेतों में गिरा देता है. धान के बाली के गिरने से धान कमजोर होकर नुकसान हो जाता है. जिससे उपज दर काफी प्रभावित हो जाती है. इसलिए चित्रा नक्षत्र के समय काल में धान के किसान मौसम के आफत से डरे-सहमे रहते हैं. अभी खेतों में धान का बाली निकल गया है. सोमवार को भी आंधी का मौसम होने तथा बूंदाबांदी टपकने से किसान हताश हो गये.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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