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ट्रेनों के स्लीपर एवं एसी कोच में सीट से अधिक रहते हैं यात्री

Updated at : 29 Apr 2024 9:21 PM (IST)
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ट्रेनों के स्लीपर एवं एसी कोच में सीट से अधिक रहते हैं यात्री

ट्रेनों के स्लीपर एवं एसी कोच में सीट से अधिक रहते हैं यात्री

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लखीसराय. ट्रेनों के स्लीपर एवं एसी कोच में क्षमता से अधिक यात्रियों के सवार होने से अधिकृत यात्रियों को समस्या का सामना करना पड़ता हैं. यात्रियों का अपना सीट रहने के बावजूद भी उन्हें सीट पर सोने की बात तो दूर मुश्किल से बैठने के लिए सोचना पड़ता है. स्लीपर कोच में अधिक भीड़ हो जाने के बाद लोगों को बाथरूम जाना भी मुश्किल हो जाता है. किऊल से होकर गुजरने वाली विक्रमशिला एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस, अकाल तख्त, लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस समेत आधा दर्जन ट्रेनों में हालात कुछ ऐसा ही है. वेटिंग टिकट वाले यात्रियों के साथ साथ अनाधिकृत रूप से भी कोच में प्रवेश करने वाले यात्री कंफर्म टिकट वाले यात्रियों के लिए मुश्किल बढ़ा देते है. वेटिंग वालों के साथ अनारक्षित टिकट वाले यात्री भी स्लीपर एवं ऐसी बोगी में घुस जाते हैं. जिससे कि अन्य यात्रियों को अपनी जगह पर उठने बैठने में कठिनाइयां होती है. दिल्ली एवं मुंबई के ट्रेनों के स्लीपर कोच में सबसे अधिक भीड़ होती है. हालांकि दिल्ली एवं मुंबई के मुख्य मुख्य ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाकर इस तरह की समस्या को दूर किया जा सकता है.

भागलपुर एवं हावड़ा से खुलने वाली ट्रेनों में होती है भीड़

भागलपुर एवं हावड़ा से खुलने वाली ट्रेन के जनरल कोच कम होने के कारण भी स्लीपर एवं एसी कोच में यात्रियों को अधिक भीड़ होती है. भागलपुर से खुलने वाली एवं किऊल व पटना के रास्ता होकर गुजरने वाली ट्रेन विक्रमशिला एक्सप्रेस, भागलपुर लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस एवं हावड़ा से खुलने वाली पूर्वा एक्सप्रेस, अकाल तख्त एक्सप्रेस जैसे महत्वपूर्ण ट्रेनों में जनरल बोगी की काफी कमी होने के कारण लोगों को स्लीपर व ऐसी बोगी के लिए वेटिंग टिकट लेना पड़ता है. टिकट कंफर्म नहीं होने के पर ट्रेन के स्लीपर एवं एसी बोगी में यात्री ट्रेन के सतह पर बेडशीट आदि बेचकर सो जाते हैं. जिससे कि लोगों को इधर से उधर जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इस तरह के ट्रेनों में जनरल बोगी की संख्या बढ़ने से काफी हद तक समस्या का हल हो सकता है.

इस तरह की समस्या को लेकर सीआईटी किऊल के महेंद्र चौधरी का कहना है कि यात्रियों की समस्या का समाधान उच्च अधिकारियों द्वारा किया जा सकता है. अनाधिकृत रूप से यात्रा करने वाले यात्रियों को जुर्माना भी लगाया जाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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