आज का दर्शन: आठ दशक पुराना किऊल दुर्गा मंदिर, आज भी होती है बंगाल पद्धति से पूजा

Updated:
विज्ञापन

किऊल रेलवे इंस्टीट्यूट स्थित मां दुर्गा मंदिर, जो पिछले 80 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है.

Lakhisarai Kiul Durga Temple: किऊल रेलवे क्षेत्र में उस समय अविभाजित बंगाल से बड़ी संख्या में रेलकर्मी कार्यरत थे. उनकी पहल पर रेलवे इंस्टीट्यूट परिसर में मां दुर्गा मंदिर का निर्माण कराया गया था. तभी से यहां बंगाल की पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है. पीढ़ी दर पीढ़ी पुजारी इस परंपरा को आगे बढ़ाते आ रहे हैं.

विज्ञापन

लखीसराय से प्रतिनिधि की रिपोर्ट:

Lakhisarai Kiul Durga Temple: किऊल रेलवे इंस्टीट्यूट स्थित मां दुर्गा मंदिर पिछले करीब 80 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. आजादी से पूर्व रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से स्थापित इस मंदिर में आज भी बंगाल पद्धति से पूजा-अर्चना की परंपरा कायम है. दुर्गा पूजा के दौरान यहां होने वाले धार्मिक अनुष्ठान, भव्य सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं.

आजादी से पहले हुई थी मंदिर की स्थापना

जानकारी के अनुसार किऊल रेलवे क्षेत्र में उस समय अविभाजित बंगाल से बड़ी संख्या में रेलकर्मी कार्यरत थे. उनकी पहल पर रेलवे इंस्टीट्यूट परिसर में मां दुर्गा मंदिर का निर्माण कराया गया था. तभी से यहां बंगाल की पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है. पीढ़ी दर पीढ़ी पुजारी इस परंपरा को आगे बढ़ाते आ रहे हैं.

बंगाल पद्धति से होती है मां दुर्गा की आराधना

मंदिर में दुर्गा पूजा के दौरान सप्तमी से विशेष अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं. मां दुर्गा को दिन में खिचड़ी-चोखा और रात में पूरी-भाजा का भोग लगाया जाता है. अष्टमी और नवमी तक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहता है. अष्टमी के दिन विशेष भोग और पूजा का आयोजन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है.

चानन, लखीसराय और सूर्यगढ़ा के श्रद्धालुओं की उमड़ती है भीड़

दुर्गा पूजा के अवसर पर किऊल रेलवे इंस्टीट्यूट दुर्गा मंदिर चानन, लखीसराय और सूर्यगढ़ा क्षेत्र के लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन जाता है. भव्य सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

17 वर्ष पूर्व स्थापित हुई संगमरमर की प्रतिमा

करीब 17 वर्ष पूर्व दुर्गा पूजा समिति द्वारा मंदिर में संगमरमर की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई थी. इसके बाद से प्रत्येक वर्ष 22 से 24 जनवरी तक विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इन आयोजनों में देश और प्रदेश के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि तथा प्रसिद्ध कलाकार भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं.

किऊल महोत्सव को मिल चुकी है राजकीय महोत्सव की मान्यता

तीन वर्ष पूर्व किऊल महोत्सव को राजकीय महोत्सव का दर्जा प्रदान किया गया. इसके बाद से जनवरी में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के लिए बिहार सरकार द्वारा वित्तीय सहयोग भी उपलब्ध कराया जाता है. वर्तमान में एसडीपीओ सुबोध कुमार मंदिर समिति के संरक्षक हैं. वहीं नवल कुमार, अरुण कुमार और रविकांत यादव सहित कई समाजसेवी मंदिर की पूजा-अर्चना और आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

विज्ञापन
Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन