हलसी में आस्था और जनभागीदारी की मिसाल: फूस की कुटिया से 1.20 करोड़ का भव्य वैष्णवी दुर्गा मंदिर बनने की गौरवगाथा

फोटो-मनोकामना सिद्ध वैष्णवी दुर्गा मंदिर हलसी | Prabhat Khabar Network
Halsi Durga Temple History: यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि हलसी की सामूहिक एकता और गौरव का प्रतीक है. 1962 में ताड़ के पत्तों की फूस की कुटिया से शुरू होकर, आज यह 1.20 करोड़ का भव्य वैष्णवी दुर्गा मंदिर जनभागीदारी और आत्मनिर्भर प्रबंधन मॉडल का जीता-जागता उदाहरण है.
Halsi Durga Temple History: वर्ष 1962 में ताड़ के पत्तों और फूस की एक छोटी सी कुटिया से शुरू हुआ माता का यह दरबार आज इलाके के सबसे भव्य और आकर्षक मंदिरों में शुमार हो चुका है. स्थानीय ग्रामीणों की सामूहिक सहभागिता, आत्मनिर्भर प्रबंधन मॉडल और तीन पीढ़ियों से चली आ रही पुरोहित परंपरा की बदौलत आज यह पाटन स्थल हलसी की सामूहिक एकता और गौरव का जीवंत प्रतीक बन गया है.
वर्ष 1962 में ताड़ के पत्तों से हुई थी शुरुआत
इस भव्य मंदिर का इतिहास बेहद साधारण और संघर्षपूर्ण रहा है. बात वर्ष 1962 की है, जब संसाधनों की भारी किल्लत थी. उस समय स्थानीय ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से ताड़ के पत्तों से घेरकर एक छोटा सा पंडालनुमा फूस का मंदिर बनाया था. फूस की उसी छोटी सी कुटिया से शुरू हुआ माता का यह दरबार आज अपनी भव्यता और नक्काशीदार कलाकृति के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हो चुका है.
तीन पीढ़ियों से पुरोहित परंपरा जारी
मंदिर में पूजा-अर्चना की एक गौरवशाली और अटूट परंपरा रही है. स्थापना के समय युगल किशोर पांडे इस मंदिर के पहले पुजारी बने थे. उनके बाद इस आध्यात्मिक विरासत को शालिग्राम पांडे ने आगे बढ़ाया. वर्तमान में उनकी तीसरी पीढ़ी के रूप में पंडित दिनेश पांडे पूरी निष्ठा, नियम और वैदिक रीति-रिवाज से मां वैष्णवी दुर्गा की पूजा-अर्चना संपन्न करा रहे हैं.
तत्कालीन बीडीओ ने किया था शिलान्यास
इस फूस के मंदिर को पक्के और भव्य स्वरूप में बदलने की नींव तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) मदन प्रसाद सिंह मौवार ने रखी थी. उनके द्वारा ही इस मंदिर का विधिवत शिलान्यास किया गया था, जिसमें मुख्य यजमान के रूप में स्थानीय निवासी नाथो शर्मा पूजा पर बैठे थे.
संस्थापक कमेटी की जनभागीदारी से मिली मजबूती
मंदिर को विशाल और आकर्षक रूप देने के लिए ग्रामीणों ने एक मजबूत संस्थापक कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी में श्रीकांत सिंह, सुदामा सिंह, रामाशीष सिंह, नरेश सिंह, अवध किशोर सिंह, सरयू राम और अर्जुन साव सहित इलाके के कई गणमान्य लोग शामिल थे. इन लोगों ने घर-घर जाकर जनभागीदारी सुनिश्चित की और मंदिर निर्माण के संकल्प को धरातल पर उतारा.
सवा बीघा जमीन से आत्मनिर्भर प्रबंधन मॉडल
इस मंदिर के प्रबंधन की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह आत्मनिर्भर होना है. मंदिर के पास अपनी सवा बीघा उपजाऊ कृषि योग्य भूमि है, जिस पर स्थानीय पाटीदारों द्वारा सामूहिक रूप से खेती की जाती है. इस भूमि से होने वाली संपूर्ण फसल और आय को मंदिर के रोजमर्रा के खर्चों, भव्य पूजा-अर्चना और बड़े धार्मिक आयोजनों में लगाया जाता है. इसी पारदर्शी और आत्मनिर्भर मॉडल की बदौलत आज सवा करोड़ का यह आलीशान मंदिर बनकर तैयार खड़ा है.
Halsi Durga Temple History: दीपावली से एक दिन पहले 15 हजार दीयों का दीपोत्सव
शारदीय नवरात्र के दौरान यहाँ मां के दर्शन के लिए दूर-दराज के जिलों से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. इसके अलावा, इस मंदिर की एक और अनोखी परंपरा है—हर साल दीपावली के ठीक एक दिन पहले (नरक चतुर्दशी/छोटी दीपावली को) यहाँ भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया जाता है. इस अलौकिक उत्सव में पूरा परिसर 15 हजार से अधिक मिट्टी के दीपों से जगमगा उठता है. स्थानीय नागरिकों के लिए यह पावन स्थल सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि संपूर्ण हलसी प्रखंड की सामूहिक एकता, भाईचारे और गौरव का जीवंत प्रतीक है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में
By राजीव मुरारी सिन्हा
राजीव मुरारी सिन्हा लखीसराय में प्रिंट माध्यम में 23 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. अभी प्रभात खबर के लखीसराय कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










