ePaper

पटाखा जलाने में झुलसी बच्ची को चिकित्सक ने लिखा रैबिज का टीका

Updated at : 22 Oct 2025 12:23 AM (IST)
विज्ञापन
पटाखा जलाने में झुलसी बच्ची को चिकित्सक ने लिखा रैबिज का टीका

पटाखा जलाने में झुलसी बच्ची को चिकित्सक ने लिखा रैबिज का टीका

विज्ञापन

मुंगेर. सदर अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही अब मरीजों के लिये जानलेवा साबित हो रही है. चिकित्सकों की लापरवाही का आलम यह है कि सोमवार को प्रेडियाटिक (चाइल्ड) ओपीडी में तैनात चिकित्सक द्वारा पटाखा जलाने में झुलसी एक 10 साल की बच्ची को बिना कुत्ते काटे ही रैबिज इंजेक्शन लिख दिया. हद तो यह थी कि बच्ची के भव्या पर्ची पर भी बर्न की जगह ट्रामा के साथ फीवर लिख दिया गया था. हलांकि दवा लेने के दौरान बच्ची के पिता को रैबिज इंजेक्शन लिखे होने की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने इंजेक्शन लेने से मना कर दिया. इस प्रकार के मामले में खुद अस्पताल में मरीजों को मिल रहे इलाज की सुविधा और स्वास्थ्य विभाग के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा के दावों की पोल खोल दी है.

झुलसी बच्ची, पर्ची पर लिख दिया कुत्ता काटने का इंजेक्शन

बताया गया कि दीपावली की रात पटाखा जलाने में चंडिका स्थान टीकारामपुर निवासी नारद कुमार की 10 वर्षी पुत्री वैष्णवी झुलस गयी थी. जिसके बाद परिजन मंगलवार की सुबह उसे लेकर अस्पताल पहुंचे. जहां चाइल्ड ओपीडी में तैनात चिकित्सक डॉ रौशन द्वारा बच्ची का इलाज किया गया. इलाज के बाद चिकित्सक द्वारा बच्ची के पर्ची पर टेटनस व डाइक्लोफेनिक दवा के साथ कुत्ता काटने पर दिये जाने वाले इंजेक्शन रैबिज वैक्सीन (एआरभी) का 0.5 एमएल का डोज भी लिख दिया. हलांकि दवा काउंटर पर जाने के बाद वैष्णवी के पिता नारद कुमार को पर्ची पर कुत्ता काटने का इंजेक्शन लिखे होने की जानकारी मिली. जिसके बाद उसने इंजेक्शन लेने से मना कर दिया. वैष्णवी के पिता नारद कुमार ने बताया कि इसकी शिकायत उसके द्वारा अस्पताल प्रबंधन से किया गया है. उनके द्वारा मामले को लेकर आवेदन देने को कहा गया है.

वैष्णवी के दवा पर्ची पर भी बर्न की जगह लिख दिया ट्रामा व फीवर

वैष्णवी के इलाज में जहां चिकित्सक द्वारा इतनी बड़ी लापरवाही बरती गयी. वहीं उसके दवा पर्ची पर भी बर्न की जगह ट्रामा और फीवर लिख दिया गया. जबकि वैष्णवी के पिता नारद कुमार के अनुसार वैष्णवी केवल पटाखा जलाने के दौरान झुलस गयी थी. उसे फीवर नहीं था. अब ऐसे में वैष्णवी के इलाज को लेकर आरंभ से ही सभी जगह लापरवाही अस्पताल प्रबंधन द्वारा बरती गयी. अब यह हाल जब बच्चों के इलाज का है तो प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में इलाज को पहुंचने वाले सामान्य ओपीडी का हाल केवल समझा जा सकता है.

कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक

सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ निरंजन कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है. यदि इस प्रकार की लापरवाही बरती गयी है तो मामले की जानकारी ली जायेगी. साथ ही आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.

पहले भी आ चुका है गलत दवा देने का मामला

मुंगेर. सोमवार को वैष्णवी के इलाज में चिकित्सक द्वारा बरती गयी लापरवाही कोई पहला मामला नहीं थी. इससे पहले भी पेट दर्द के एक मरीज को सदर अस्पताल के ओपीडी में दवा काउंटर पर पेट दर्द के दवा की जगह डायबेटिक मरीज को दी जाने वाली दवा दे दी गयी थी. बता दें कि 14 जून को 65 वर्षीय अमीर साह मॉडल अस्पताल में संचालित ओपीडी में पेट दर्द की शिकायत लेकर पहुंचे थे. जहां उसे पेन अबडोमेन की शिकायत होने के कारण चिकित्सक द्वारा दर्द व सूजन बताया गया. साथ ही इसके लिये मेफेनामिक एसिड 500 एमजी दवा उसके लिये भव्या एप पर प्रिसक्राइव कर दी गयी, जिसके बाद अमीर साह दवा काउंटर पर पहुंचे और रजिस्ट्रेशन पर्ची दी. उसे मेफेनामिक एसिड 500 एमजी की जगह मेटफोर्मिन हाइड्रोक्लोराइड ससटेन 500 एमजी की दवा दे दी गयी. जिसे डायबीटिज मरीज को दिया जाता है. लेकिन दवा काउंटर पर डाइसाइकलोमीन 10 एमजी दवा नहीं मिलने के कारण मरीज अस्पताल के बाहर निजी दुकान पर दवा लेने पहुंचा. अन्य दवा दिखाने के बाद उसे जानकारी मिली की चिकित्सक द्वारा लिखी गयी दर्द की दवा की जगह उसे ओपीडी के दवा काउंटर पर डायबीटिज यानि मधुमेह की दवा दी गयी. जबकि मरीज को मधुमेह की शिकायत भी नहीं थी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
AMIT JHA

लेखक के बारे में

By AMIT JHA

AMIT JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन