नदी घाट किनारे दलदल, कैसे अर्घ देंगे श्रद्धालु

Published at :03 Nov 2016 4:04 AM (IST)
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नदी घाट किनारे दलदल, कैसे अर्घ देंगे श्रद्धालु

परेशानी . जिला प्रशासन के निर्देश के बाद सभी घाटों की व्यवस्था में सुधार को ले नगर प्रशासन सक्रिय छठ व्रतियों के लिए किऊल नदी के किनारे का दलदल बनेगा परेशानी का सबब बनेगा. किऊल नदी के किनारे स्थित चार घाटों को छोड़ बांकी घाट बिना सीढ़ी के हैं. लखीसराय : किऊल के तट पर […]

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परेशानी . जिला प्रशासन के निर्देश के बाद सभी घाटों की व्यवस्था में सुधार को ले नगर प्रशासन सक्रिय

छठ व्रतियों के लिए किऊल नदी के किनारे का दलदल बनेगा परेशानी का सबब बनेगा. किऊल नदी के किनारे स्थित चार घाटों को छोड़ बांकी घाट बिना सीढ़ी के हैं.
लखीसराय : किऊल के तट पर अवस्थित लखीसराय शहर के छठ व्रतियों को हर वर्ष किऊल नदी या अन्य तालाबों में अर्घ्य देने को लेकर परेशानी झेलनी पड़ती है़ किऊल नदी में पानी का बहाव पूरी तरह बरसात पर ही निर्भर है, लेकिन इस वर्ष बाढ़ की वजह से गंगा का पानी किऊल नदी में आ जाने व अपने साथ लायी दलदली मिट्टी को किऊल नदी में छोड़ जाने लोगों के लिए परेशानी का सबब बन हो सकता है़ यहां बता दें कि किऊल नदी के दो चार घाट को छोड़ सभी घाट बिना सीढ़ी के ही हैं.
जिससे लोगों को नदी के मध्य पहुंच कर ही अर्घ्य देना पड़ता है. ऐसे में यह आम लोगों के साथ-साथ छठ व्रतियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ेगी़ हालांकि इस दिशा में जिला प्रशासन के निर्देश के बाद नगर प्रशासन ने सभी घाटों की व्यवस्था में सुधार के लिए लगा हुआ है़ लखीसराय नगर परिषद की अध्यक्षा सुषमा देवी व नप कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार स्वयं घाटों का निरीक्षण कर इस स्थिति से निबटने के लिए अपने मातहतों को निर्देश देने का काम कर रहे हैं.
क्या कहते हैं शहर वासी
प्रखंड कार्यालय के सामने हनुमान घाट में छठ व्रतियों के लिए रास्ता तैयार करना पड़ता है. यहां घाट पर सीढ़ी निर्माण की आवश्यकता है़
प्रकाश महतो, वार्ड पार्षद
किऊल नदी में पानी बहाव का स्तर घटते-बढ़ते रहता है. किनारे पर गंदगी को लेकर छठ व्रतियों को परेशानी होती है़ दलदली मिट्टी अगर नहीं सूखा तो डाला रखने में काफी मुश्किल होगी़
शुभुनाथ झा
प्रशासन द्वारा छठ घाटों पर की जा रही व्यवस्था को अपर्याप्त है. पूजा समिति से जुड़े लोगों को मदद पहुंचाने की आवश्यकता है़ पूजा सिर पर है और अभी भी घाटों पर कूड़े का अंबार लगा है़
गिरिजा प्रसाद सिंह
किऊल नदी में शहर के मकानों से निकलने वाला गंदा पानी के बहाव को रोकने व कूड़ा कचरा प्रबंधन की आवश्यकता है़ रात्रि में नदी पर रहने की व्यवस्था तक नहीं है़
अरविंद कुमार
जिला प्रशासन द्वारा किया गया दावा हर वर्ष खोखला साबित होता रहा है़ छठ पूजा समिति के लोगों के भरोसे ही होता है छठ व्रतियों का पर्व़
दीपक सिन्हा
नेम, धर्म, निष्ठा का पर्व छठ को लेकर किऊल नदी में अर्घ्य के दिन से पहले डैम से पानी छोड़ा जाना चाहिए, ताकि पानी के बहाव में गंदगी का प्रवाहित हो सके और लोगों को साफ पानी व घाट पर पर्व मनाने में सुविधा हो सके़
राहुल कुमार
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