सस्ता पेयजल है यात्रियों के लिए नुकसानदेह
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Nov 2016 7:06 AM (IST)
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रेलवे प्लेटफॉर्म व ट्रेन में अनाधिकृत रूप से बेचा जा रहा सील बंद पानी केमिकल्स युक्त होता है सस्ता सील बंद पानी का बोतल लखीसराय : किऊल-मोकामा रेलखंड पर सील बंद पानी बोतल के नाम पर यात्रियों के बीच स्लो प्वाइजन परोसा जा रहा है.10 रुपये में सील बंद बोतल यात्रियों के सस्ता तो है, […]
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रेलवे प्लेटफॉर्म व ट्रेन में अनाधिकृत रूप से बेचा जा रहा सील बंद पानी
केमिकल्स युक्त होता है सस्ता सील बंद पानी का बोतल
लखीसराय : किऊल-मोकामा रेलखंड पर सील बंद पानी बोतल के नाम पर यात्रियों के बीच स्लो प्वाइजन परोसा जा रहा है.10 रुपये में सील बंद बोतल यात्रियों के सस्ता तो है, लेकिन स्लो प्वाइजन से कम नहीं है,जो यात्रियों के स्वास्थ्य के लिए अभिशाप साबित हो रहा है. वहीं दूसरी ओर रेल का मान्यता प्राप्त बोतल बंद पानी की बिक्री नहीं होने से रेलवे को राजस्व का भारी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है.
रेल स्वास्थ्य विभाग की मानें तो किऊल जैसे रेलवे स्टेशन पर खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी का पद सृजित नहीं है.दानापुर मुख्यालय से खाद्य संबंधित मामले का मॉनिटरिंग की जाती है. वर्ष 2006 तक किऊल जंकशन पर स्वास्थ्य निरीक्षक ही खाद्य सुरक्षा मामले की देखरेख स्वास्थ्य का कोई भरोसा नहीं है. वहीं सस्ता व बिना लाईसेंस बोतल बंद पानी की बिक्री से रेल राजस्व का भारी घाटा भी हो रहा है.
बताया जाता है कि किऊल जंक्शन से सटे वृंदावन एवं खगौर के लोग रेलवे प्लेटफॉर्म व ट्रेन में अवैध ढ़ंग से बिकने वाली बोतल बंद पानी से मालामाल हो रहे हैं.
इस रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली विभिन्न महत्वपूर्ण व साधारण ट्रेनों में अवैध वेंडरों द्वारा एक्वालाइक, अमूल एक्वा, मंगलम जैसे आधा दर्जन से अधिक ब्रांड के बोतल बंद पानी की बिक्री कर रहे हैं. लोगों की मानें तो खगौर एवं लखीसराय रेलवे स्टेशन से सटे थोक व्यवसायी द्वारा 65 रुपये में एक दर्जन पानी का बोतल खरीदा जाता है . थोक व्यापारी इसे ट्रेन में चलने वाले वेंडर को 80 से 82 रुपये में बेचते हैं . एक हॉकर द्वारा एक दिन में 7 से 10 पैकेट यानि 84 से 120 बोतल पानी की बिक्री की जाती है. वहीं हॉकर को ठेकेदारी के नाम पर 80 रुपये देना होता है. ऐसे में सस्ता पानी के बोतल में मिलाये जाने वाले केमिकल के कुप्रभाव से यात्री अनभिज्ञ होते हैं. लंबे समय तक पानी खराब न हो इसके लिए उसमे केमिकल मिलाया जाता है.
स्थानीय यात्रियों का कहना है कि ऐसा बोतल बंद पानी जब नॉर्मल अवस्था में पीया जाता है तो उसमें से दवा की बदबू आती है. ऐसे गोरखधंधे में संलिप्त कंपनी के लोगों का सांठ गांठ दानापुर से मॉनिटरिंग कर रहे अधिकारियों के संलिप्त होने की संभावना जतायी जाती है. किऊल रेलवे स्टेशन पर स्वास्थ्य निरीक्षक का कार्यालय है,लेकिन अवैध ढ़ंग से चल रहे ऐसे स्वास्थ्य घातक खाद्य पदार्थ को पकड़ने के लिए कोई अभियान न तो जीआरपी, न आरपीएफ और नही खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा चलाया जा रहा है. जिससे इन अवैध वेंडर द्वारा बेचे जा रहे बोतल बंद पानी का स्वास्थ्य निरीक्षक जांच कर सके. जीआरपी के पुलिस निरीक्षक व नव पदस्थापित थानाध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि अवैध वेंडर के द्वारा बिक्री की जा रही बोतल बंद पानी के बाबत उन्हें जानकारी नहीं है.जल्द ही इसका पता लगा कर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.
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