25 हजार की आबादी बाढ़ प्रभावित

Published at :20 Aug 2016 8:22 AM (IST)
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25 हजार की आबादी बाढ़ प्रभावित

परेशानी. बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त, कई घरों में घुसा बाढ़ का पानी, लोग परेशान टाल के हरूहर नदी किनारे बसे एक दर्जन से अधिक गांव हरूहर नदी के पानी से चारों ओर से घिर गया है, जिसके परिणाम स्वरूप टाल वासियों को प्रखंड मुख्यालय, स्टेशन व बाजार पानी में घुस कर जा रहे हैं. वहीं […]

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परेशानी. बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त, कई घरों में घुसा बाढ़ का पानी, लोग परेशान
टाल के हरूहर नदी किनारे बसे एक दर्जन से अधिक गांव हरूहर नदी के पानी से चारों ओर से घिर गया है, जिसके परिणाम स्वरूप टाल वासियों को प्रखंड मुख्यालय, स्टेशन व बाजार पानी में घुस कर जा रहे हैं. वहीं मवेशियों के चारे के लिए घोर परेशानी हो रही है.
लखीसराय : बड़हिया टाल के हरूहर नदी किनारे बसे एक दर्जन से अधिक गांव हरूहर नदी के पानी से चारों ओर से घिर गया है, जिसके परिणाम स्वरूप टाल वासियों को प्रखंड मुख्यालय, स्टेशन व बाजार जान जोखिम में डाल कर पानी में घुस कर आवागमन हो रहा है, जो कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं लेकिन आपदा प्रबंधन द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है, जिससे बाढ़ पीडि़त लोगों को जिला प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश है. जिले के बड़हिया टाल में बसे गांव पाली, कोठवा, महरामचक, फदरपुर, नथनपुर, कमरपुर, रेपुरा, नरसिंघौली, ऐजनीघाट, जानपुर, तुरकैजनी आदि गांव के लगभग 25 हजार आबादी बाढ़ की चपेट में है जिसके परिणाम स्वरूप इन गांव के लोगों के बीच जलावन, शौचालय, खाने पीने की वस्तुएं की काफी परेशानी हो रही है.
वहीं मवेशियों को सुरक्षित जगह रखने उसके के लिए चारा के लिए घोर किल्लत हो रही है, साथ ही बाजार, अस्पताल, प्रखंड मुख्यालय , स्टेशन के लिए आवागमन लगभग ठप हो गया है. टाल के लोग जरूरत कामकाज के छाती भर पानी में डूब कर जान हथेली पर लेकर अपना कार्य कर रहे हैं, परंतु अभी तक जिला प्रशासन द्वारा कोई आपदा सामग्री की व्यवस्था नहीं की गयी है.
टाल के पूर्व मुखिया सत्यनारायण महतो, पंचायत समिति सदस्य उमेश महतो, मेघन महतो, श्रीकांत महतो, राजीव कुमार आदि ने बताया कि टाल के एक दर्जन से अधिक गांव हरूहर नदी के पानी से चारों तरफ घिर चुका है जिससे लोगों को दैनिक वस्तुएं, जानवरों के लिए चारा, स्वास्थ्य सेवा एवं आवागमन की घोर समस्या उत्पन्न हो गया है. वहीं लाखों रुपये के लगी फसल मक्का डूब गये है. ऐसी विषम परिस्थिति के बावजूद भी जिला प्रशासन द्वारा अभी तक किसी गांव में नाव की व्यवस्था नहीं है.
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