अपहृत मनोज मंडल सकुशल घर लौटा

Published at :20 Aug 2016 8:21 AM (IST)
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अपहृत मनोज मंडल सकुशल घर लौटा

11 अगस्त को मनोज मंडल को अपराधियों ने हथियार के बल पर अगवा कर लिया था लक्ष्मीपुर : बीते 11 अगस्त को अगवा किये गये मनोज मंडल बीते गुरुवार आधे रात्रि के बाद सकुशल अपना घर पहुंचा. जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के नावकाडीह गांव निवासी लखन मंडल के पुत्र मनोज मंडल को अपराधियों ने […]

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11 अगस्त को मनोज मंडल को अपराधियों ने हथियार के बल पर अगवा कर लिया था
लक्ष्मीपुर : बीते 11 अगस्त को अगवा किये गये मनोज मंडल बीते गुरुवार आधे रात्रि के बाद सकुशल अपना घर पहुंचा. जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के नावकाडीह गांव निवासी लखन मंडल के पुत्र मनोज मंडल को अपराधियों ने हथियार के बल पर अगवा कर लिया था. मनोज मंड़ल ट्रैक्टर से धान की रोपनी हेतु खेत जुताई कार्य करवा रहा था.सूत्रों की मानें तो अपहरण के उपरांत अपराधियों ने मनोज के ही मोबाइल से घर वालों को फोन कर फिरौती की मांग किया था. फिरौती को लेकर लगातार दबाब भी बनाये हुए था.
सात से आठ दिन अपहरणकर्ताओं ने उसे अपने कब्जा में रखने के बाद मुक्त किया है. सूत्र बताते हैं कि लेनदेन का मामला पट जाने के बाद फिरौती की रकम मिल जाने पर अपहरणकर्ताओं ने उसे मुक्त कर दिया.लेकिन घर के सदस्य इसे लेकर ज्यादा कुछ भी बताने से इंकार कर रहे हैं.बताते चलें कि घटना को लेकर परिजनों द्वारा थाना में मामला दर्ज कराया गया था.
इसके उपरांत पुलिस द्वारा कई जगह पर छापामारी किया जा रहा था.लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी. इस बाबत पूछे जाने पर थानाध्यक्ष देवानंद पासवान बताते हैं कि उक्त घटना को लेकर पुलिस अभी भी अनुंसधान कर रही है. उन्होंने आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि इस घटना का जल्द ही उदभेदन हो जायेगा की सही में अपहरण हुआ था कि एक साजिश के तहत घटना का अंजाम दिया गया था.मनोज के सकुशल वापस लौटने से घर में खुशी का महौल था.
सही सलामत वापस आने से परिजन में खुशी
थाना क्षेत्र के नावकाडीह निवासी अपहृत मनोज मंडल के सात दिनों बाद सकुशल घर वापसी के बाद परिजनों एव ग्रामीणों में खुशी का माहौल देखा गया. घटना की जानकारी बयां करते अपहृत ने बतलाया की घटना के दिन अपराधी आग्नेयास्त्र सटा कर पैदल कुछ दूर लेजाकर आंख में पट्टी बांध दिया था. फिर कुछ दूर जाने के बाद चार चक्का गाड़ी में बैठाकर कहां ले गया मुझको कुछ पता नहीं चला था.वे लोग हर हमेशा आंख पर पट्टी बांधे रखता था. सिर्फ खाना खिलाने के वक्त खोलता.मुझे अहसास नहीं होता की हम कहां है.
आंख में पट्टी बांध कर बीते गुरुवार की शाम में बड़हिया टाल में छोड़ दिया.कुछ देर के बाद जब आसपास किसी आदमी का आहट नहीं मिला तो मैने पट्टी खोलकर देखा तो कोई पास में नहीं था.
मैं किसी तरह बड़हिया रेलवे स्टेशन पहुच कर वहां से किऊल स्टेशन पहुंचा. फिर एक मुसाफिर से फोन लेकर घरवालों को सूचना दिया.फिर किऊल से मेला स्पेशल ट्रेन से जमुई सुबह पंहुचा.जहां से घर के लोग पहले से मौजूद थे. मनोज ने बताया कि सात दिनों उक्त लोग हमेशा अपना ठिकाना बदलते रहता था.कभी भी एक स्थान में नहीं रखता घंटा दो घंटा में स्थान को परिवर्तन कर देता था.
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