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चिकेन पॉक्स से बच्चे हो रहे बीमार

लखीसराय : जिले भर में दन दिनों से चिकेन पॉक्स(छोटी माता) का प्रकोप है. काफी संख्या में बच्चे इसकी जद में आ रहे हैं. ग्रामीण इलाके में अधिकतर लोग घर में ही इसका इलाज कर रहे. चिकेन पॉक्स से संक्रमित बच्चों की संख्या होमियोपैथिक क्लिनिकों के अलावे अस्पतालों में भी देखी जा रही है. चिकेप […]

लखीसराय : जिले भर में दन दिनों से चिकेन पॉक्स(छोटी माता) का प्रकोप है. काफी संख्या में बच्चे इसकी जद में आ रहे हैं. ग्रामीण इलाके में अधिकतर लोग घर में ही इसका इलाज कर रहे. चिकेन पॉक्स से संक्रमित बच्चों की संख्या होमियोपैथिक क्लिनिकों के अलावे अस्पतालों में भी देखी जा रही है.
चिकेप पॉक्स के कारण
यह वेरीसेला वायरस के फैलने से होता है. इसकी जद में बच्चे से लेकर बड़े तक आ रहे हैं. आम तौर पर यह बीमारी किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है, लेकिन 15 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चे इसकी चपेट में अधिक आते हैं. वेरीसेला वैक्सीन आ जाने से आर्थिक रूप से संपन्न परिवार के ज्यादातर बच्चे सुरक्षित हो गये हैं. यह बीमारी जानलेवा नहीं है लेकिन यह काफी पीड़ादायक है.
पूरे शरीर पर निकलता है सफेद दाना
चिकेन पॉक्स से प्रभावित बच्चों के पूरे शरीर में सफेद दाना होता है. यह दाना एक ही वक्त में सूखते या पनपते दिखता है. अगर बच्चे को बुखार, सिर दर्द, सर्दी-जुकाम है व दानेदार स्थान पर खुजली हो रही है, तो उसे चिकेन पॉक्स हो गया है. चिकेन पॉक्स का संक्रमण ज्यादा होने की दशा में बच्चे की आंख, फेफड़ा, मस्तिष्क, पैंक्रियाज व किडनी को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है. अगर यह सब लक्षण दिखे तो इसे नजरअंदाज न कर सकें व तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें.
चिकेन पॉक्स से बचाव
चिकेन पॉक्स से संक्रमित बच्चे को घर के अन्य लोगों से दूर स्वच्छ हवा व प्रकाशयुक्त जगह पर रखें.
अन्य बच्चे को चिकेन पॉक्स का टीका लगवायें.
गर्भवती मां को चिकेन पॉक्स होने पर उसे टीका न लगवायें. गर्भवती मां को चिकेन पॉक्स होने पर नवजात शिशु को वेरीसेला इम्नोग्लोबिन का इंजेक्शन जरूर लगवायें.
अगर बच्चे के मस्तिष्क तक चिकेनपॉक्स का संक्रमण पहुंच जाता है तो उसे एसाइक्लोबिर का इंजेक्शन जरूर लगवायें.
होमियोपैथ में है चिकेन पॉक्स का इलाज
होमियोपैथ चिकित्सकों के मुताबिक होमियोपैथ में चिकेन पॉक्स का सस्ता व बेहतरीन इलाज है. चिकित्सक के मुताबिक जिस घर में चिकेन पॉक्स का प्रकोप है वहां घर के हर सदस्य को सात दिनों तक वैरियोलिनम 200 की चार गोली रोज सुबह खाली पेट लेनी चाहिए. इससे लोग चिकेन पॉक्स की चपेट में आने से बचे रहते हैं. जिन्हें चिकेन पॉक्स हो गया है उन्हें लक्षण के आधार पर दवा दी जाती है. इलाज की अवधि संक्रमण की तीव्रता पर निर्भर करता है.
बरतें सावधानी
चिकेन पॉक्स के दौरान बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहिए. अन्य बच्चों में बीमारी फैल सकती है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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