मकर संक्रांति पर लाय का है बिशेष महत्व

Published at :14 Jan 2016 7:12 PM (IST)
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मकर संक्रांति पर लाय का है बिशेष महत्व

मकर संक्रांति पर लाय का है बिशेष महत्व जमुई. मकर संक्रांति के अवसर पर लोगों के द्वारा देवी देवताओं व पूर्वजों को तिल व गुड़ का भोग लगाने के बाद चूड़ा ,दही व सब्जी खाने की परंपरा काफी पूर्व से चली आ रही है. वहीं इस मौके पर धान के लावा ,चूड़ा, मूढी व तिल […]

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मकर संक्रांति पर लाय का है बिशेष महत्व जमुई. मकर संक्रांति के अवसर पर लोगों के द्वारा देवी देवताओं व पूर्वजों को तिल व गुड़ का भोग लगाने के बाद चूड़ा ,दही व सब्जी खाने की परंपरा काफी पूर्व से चली आ रही है. वहीं इस मौके पर धान के लावा ,चूड़ा, मूढी व तिल से बने लाय का अपना बिशेष महत्व है. लोगों की मानें तो मकर संक्रांति को लेकर आज भी ग्रामीण क्षेत्रोें में महिलाओं द्वारा कुछ दिन पूर्व से दूर दराज में रह रहे अपने परिजनों को संदेश के रूप में भेजने के लिए कई प्रकार का लाय तैयार किया जाता है और लाय के बगैर मकर संक्रांति का त्योहार फीका है.मकर संक्रांति को लेकर बाजार स्थित स्थायी व अस्थायी दुकानों में विभिन्न प्रकार के लाय की ब्रिकी काफी तेजी से हो रही है.बाजार में धान के लाव,चूड़ा व मुढी 80 से 100 रुपया प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है.

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