भगवान चत्रिगुप्त की हुई पूजा

Updated at :13 Nov 2015 6:35 PM
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भगवान चत्रिगुप्त की हुई पूजा

भगवान चित्रगुप्त की हुई पूजा फोटो संख्या:02चित्र परिचय- भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते युवक प्रतिनिधि, लखीसरायजिले के विभिन्न भागों में शुक्रवार को कायस्थ समाज के लोगों ने अपने आराध्य देव भगवान चित्रगुप्त की पूजा पूरे भक्ति भाव से की. इस अवसर पर कायस्थ समाज के लोगों ने अपने घरों में भगवान चित्रगुप्त की तसवीर की […]

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भगवान चित्रगुप्त की हुई पूजा फोटो संख्या:02चित्र परिचय- भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते युवक प्रतिनिधि, लखीसरायजिले के विभिन्न भागों में शुक्रवार को कायस्थ समाज के लोगों ने अपने आराध्य देव भगवान चित्रगुप्त की पूजा पूरे भक्ति भाव से की. इस अवसर पर कायस्थ समाज के लोगों ने अपने घरों में भगवान चित्रगुप्त की तसवीर की पूजा कर परिवार के सुख व समृद्धि की कामना की. चित्रगुप्त पूजा के अवसर पर कायस्थ परिवार ने दवात व कलम की पूजा की. मान्यता के अनुसार चित्रगुप्त की उत्पत्ति सौर ब्रह्मा की हजारों वर्ष तप के परिणाम स्वरूप हुई. चित्रगुप्त की उत्पत्ति ब्रह्मा ने मनुष्य कल्याण का लेखा-जोखा रखने के लिए किया था. चित्रगुप्त ने उज्जैन में हजारों वर्ष तक कठिन तप कर सिद्धियां व शक्तियां प्राप्त की थी. गुप्त निवास करने वाले महापुरुष का नामांकरण स्वयं ब्रह्मा ने चित्रगुप्त के रूप में किया था. प्राणी की काया में गुप्त रूप से प्रवास करने के कारण चित्रगुप्त के वंशज कायस्थ कहलाते हैं. चित्रगुप्त की दो शादियां हुई. पहली पत्नी सूर्य दक्षिणा नंदनी जिससे चार पुत्र हुए व दूसरी पत्नी घेरावती जिससे आठ पुत्र हुआ. चित्र गुप्त पूजा में कोरा कागज पर ओम अंकित कर पूजने की परंपरा है. भैया दूज के मौके पर बहनों ने की भाई की सलामती की कामनाफोटो संख्या :01चित्र परिचय: भैया दूज के मौके पर बजरी कूटती महिलाएंप्रतिनिधि, लखीसरायभाई के दीर्घायु होने व उनकी सुख-समृद्धि की कामना को लेकर शुक्रवार को भैया दूज श्रद्धापूर्वक व परंपरागत गीत गाकर उल्लासपूर्वक मनाया गया. भाई के पवित्र प्रेम का प्रतीक इस त्योहार पर बहना ने अपने भाई की लंबी उम्र की कामना की. बहना सुबह से ही निर्जला रहकर यम देवता की पूजा की. इस त्योहार पर कूटी हुई बजरी भाई को खिलाया गया. भाई ने भी बहना को इस श्रद्धा के बदले आशीष व उपहार दिये. बहना ने कूटा गोधनपरिवार के लोगों की लंबी उम्र के लिये बहना ने गोधन कूटकर परिवार की सुख व समृद्धि की कामना की. घरों में महिलाओं ने मानव का चित्र बना कर उसपर ईंट रखकर सामूहिक रूप से समाठ से उसे कूटा. साथ ही रोगनी का कांटा को मुंह में लगाकर पहले परिवार के लोगों की मृत्यु व फिर जीने की कामना की. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से भाई की उम्र लंबी होती है. इस दिन मृत्यु के देवता यम की पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि जो भाई नदी में स्नान कर पूरी श्रद्धा के साथ अपनी बहना का आतिथ्य स्वीकार करता है, उसे व उसकी बहन को यम का भय नहीं रहता. भाई को गाली देने की है परंपराकार्तिक मास के द्वितीया को मनाये जाने वाले इस पर्व में बहन की गाली भी भाई को आशीर्वाद के रूप में मिलती है. भाई दूज के मौके पर गोधन कूटने के क्रम में बहना ने भाई को मृत्यु का श्राप दिया व गाली दी. कहते हैं ऐसा करने से भाई की उम्र लंबी होती है. इस मौके पर बहना ने भाई को बजरी खिला कर भाई की पूजा की. ज्योतिषाचार्य उमाशंकर व्यास जी ने बताया कि इस दिन जमुना स्नान की परंपरा है. जमुना यमराज की बहन थी. इस कारण भैया दूज के मौके पर यमपूजा की जाती है. इस दिन यमुना में स्नान करने से भाई की उम्र लंबी होती है. इधर सूर्यगढ़ा प्रतिनिधि के मुताबिक भाई के दीघायु होने व सुख-समृद्धि की कामना को लेकर भाई दूज का त्योहार मनाया गया. इस अवसर पर बहनों ने यम को डंडे(समाठ) से पीटकर अपने भाई के लंबे उम्र की कामना की. मान्यता है कि भैया दूज में बहना पहले कांटा (रेगनी का पौधा) अपनी जिह्वा पर चुभाकर भाई को मृत्यु का श्राप देती है. इसके पीछे बहना अपने भाई को लंबी आयु प्रदान करने की कामना करती हैं. शुक्रवार को अहले सुबह से ही बहनों ने पवित्र स्नान कर रूई का माला, अरबा चावल, रेंगनी का कांटा, कसेली, पान, रोली, चंदन, मिठाई आदि के साथ अन्न कूट कर भाइयों की सलामती की कामना की. कथाओं के अनुसार धर्मराज के द्वारा अपनी बहन यमुना से राखी बंधवाने के दौरान इस कथा का वाचन धर्मराज के द्वारा किया गया. इस दौरान बहन अपने भाइयों को यमराज के दरवाजे से भी लौटाने की क्षमता रखती है.

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