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नौ को करें धनतेरस की खरीदारी

नौ को करें धनतेरस की खरीदारीलखीसराय/सूर्यगढ़ादीपावली से संबद्ध पंच दिवसीय पर्वों की शुरूआत धन त्रयोदशी अथवा धन्वंतरि जयंती व यम दीपदान के साथ होता है. इस वर्ष यह पर्व कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रियोदशी तिथि को मनाया जाता है. त्रियोदशी तिथि का शुभारंभ रविवार आठ नवंबर की संध्या 4:35 बजे से हो रही है जो सोमवार […]

नौ को करें धनतेरस की खरीदारीलखीसराय/सूर्यगढ़ादीपावली से संबद्ध पंच दिवसीय पर्वों की शुरूआत धन त्रयोदशी अथवा धन्वंतरि जयंती व यम दीपदान के साथ होता है. इस वर्ष यह पर्व कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रियोदशी तिथि को मनाया जाता है. त्रियोदशी तिथि का शुभारंभ रविवार आठ नवंबर की संध्या 4:35 बजे से हो रही है जो सोमवार नौ नवंबर को रात्रि 6:43 बजे तक रहेगी. किन्तु उद्या तिथि के अनुसार धन त्रियोदशी व धन्वंतरि जंयती आदि पर्व सोमवार नौ नवंबर को ही मनाया जायेगा. धनतेरस की खरीदारी के लिए सोमवार का ही समय उपयुक्त है. ऐसे लोग रविवार को की संध्या 4:35 बजे के बाद खरीदारी कर सकते हैं. पंडित विनय मिश्र ने बताया कि धनतेरस के दिन सुबह स्नानादि के बाद व्रत का संकल्प लेने के पश्चात माता लक्ष्मी व कुबेर के साथ ही भगवान धन्वंतरि की भी पूजन करनी चाहिए. लक्ष्मी व कुबेर के पूजन से धन धान्य व वैभव की प्राप्ति होती है. जबकि धन्वंतरि के पूजन से सारे रोगों का नाश होता है. खरीदारी के लिए उपयुक्त समय धनतेरस की खरदारी के लिए नौ नवंबर को प्रात: 5:55 बजे से पूरी रात तक खरदारी की जा सकती है. किन्तु उदया तिथि के अनुसार इसी दिन धन त्रियोदशी है. उक्त तिथि की समाप्ति शाम 6:43 बजे हो रही है. अत: वाहन व इलेक्ट्रिकल सामान की खरीदारी प्रात: 5:55 बजे से 6:32 बजे तक, पूर्वाह्न 10:55 बजे से 12:41 बजे तक, अपराह्न 3:45 बजे से 5:25 बजे तक की जानी चाहिए. इसी तरह जमीन, घर, बांड, शेयर, धातु निर्मित वस्तुएं,आभूषण आदि की खरीदारी प्रात: 6:33 बजे से 8:48 बजे तक, दोपहर 12:42 बजे से अपराह्न 2:13 बजे तक करनी चाहिए. जबकि धातु की वस्तुएं, वाहन, इलेक्ट्राेनिक गुड्स, कंम्प्यूटर, मोबाइल आदि की खरीदारी प्रात: 8:49 बजे से 10:54 बजे, अपराह्न 2:14 बजे से 3:44 बजे तक की जा सकती है. पूर्वाह्न 11:07 बजे से 11:51 बजे तक किसी भी प्रकार के सामानों की खरीदारी के लिए सर्वोतम मुहूर्त बन रहा है. प्रात: 7:19 बजे से 8:48 बजे तक के बीच किसी भी प्रकार की वस्तु की खरीदारी करने से बचने की कोशिश करें. इधर सूर्यगढ़ा प्रतिनिधि के अनुसार इस बार दीपावली व धनतेरस पर ग्रहों की युक्ति कल्याणकारी योग का सृजन कर रहा है. नौ नवंबर को धनतेरस के दिन चंद्र ग्रह, हस्त नक्षत्र और प्रीति योग है. इस योग में खरीदारी धन बरसानेवाली है. वहीं दीपावली बुधवार को है. जो स्वयं भगवान विष्णु का दिन माना गया है. प्रदोष काल में पूजा का उत्तम योगदीपावली में अमावस्या तिथि प्रदोष काल शुभ लगन व चौधड़िया मुहूर्त का विशेष महत्व है. दीपावाली में सूर्यास्त के बाद पूजा करने का प्रावधान है. शाम 4:45 बजे से 5:30 बजे तक गोधूलि पूजा का समय है. फिर इस अवधि से लेकर 9:37 बजे तक प्रदोषकाल रहेगा. प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन अति उत्तम माना जाता है. खासकर प्रदोष काल का वृष लग्न में पूजन अति शुभ है, जो शाम 5:30 बजे से 7:23 बजे तक है. मिथुन नग्न की पूजर मुहूर्त 7:23 बजे से रात 9:37 बजे तक है. गृहस्थ व व्यापारी पूजादीपावली में गृहस्थ व व्यापारी दोनों वर्ग के लोग पूजा करते हैं. व्यापारी इन दिनों बही खाता बदलते हैं, वहीं गृहस्थ प्रदोष काले में महालक्ष्मी कर पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

Prabhat Khabar Digital Desk
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