मक्का किसानों के साथ फिर हुआ 'खेला': खलिहान खाली होते ही बढ़े दाम, MSP से अब भी 350 रुपये पीछे है मंडी
मक्का
Thakurganj Maize Price Hike: सीमांचल के मक्का किसानों के साथ एक बार फिर वही पुराना खेल हुआ है. जब किसानों के पास फसल थी, तब मंडियों में दाम बेहद कम थे और अब जब खलिहान खाली हो चुके हैं, तो मक्के की कीमत में तेजी आने लगी है. रीगल रिसोर्सेस लिमिटेड ने खरीद दर तो बढ़ाई है, लेकिन यह अब भी सरकारी एमएसपी से 350 रुपये प्रति क्विंटल कम है.
मुख्य बातें:
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Thakurganj Maize Price Hike: बिहार के सीमांचल क्षेत्र अंतर्गत किशनगंज जिले के ठाकुरगंज से मक्का उत्पादक किसानों की एक बेहद दर्दनाक और विसंगतिपूर्ण कहानी सामने आई है. जब खेतों से फसल कटकर तैयार हुई थी और किसानों के खलिहान मक्के से भरे थे, तब बाजार में उन्हें उचित दाम नहीं मिला. अब जब तंगहाली के कारण अधिकांश किसान अपना मक्का औने-पौने दाम पर बेच चुके हैं, तब जाकर बाजार में कीमतों में उछाल आना शुरू हुआ है. इस लेटलतीफ तेजी के कारण सीधे तौर पर किसानों को नहीं, बल्कि बिचौलियों और स्टॉक रखने वाले व्यापारियों को बड़ा मुनाफा हो रहा है.
24 घंटे में 80 पैसे प्रति किलो की बढ़ोतरी
मक्का खरीद की मौजूदा दरों में आई तेजी के आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं. गलगलिया में स्थित रीगल रिसोर्सेस लिमिटेड ने 20 जून के लिए मक्का का खरीद मूल्य बढ़ाकर 20.50 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया है.
दिलचस्प बात यह है कि महज एक दिन पहले तक यह दर 19.70 रुपये प्रति किलो थी. यानी सिर्फ 24 घंटे के भीतर कीमत में 80 पैसे प्रति किलो का उछाल आया है. लेकिन विडंबना यह है कि इस बढ़े हुए दाम का फायदा उठाने के लिए अब आम किसानों के पास मक्का ही नहीं बचा है.
मजबूरी में बेची फसल, नहीं कर सके इंतजार
स्थानीय किसानों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि फसल की कटाई के वक्त उन पर साहूकारों का कर्ज चुकाने, अगली खेती की लागत निकालने और घर के जरूरी खर्चों को पूरा करने का भारी दबाव रहता है.
इलाके में मक्के के सुरक्षित भंडारण (कोल्ड स्टोरेज) की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है. इसके अलावा बैंकों से भी समय पर सस्ती वित्तीय सहायता नहीं मिलती. यही वजह है कि आर्थिक रूप से कमजोर किसान बेहतर भाव मिलने का इंतजार नहीं कर पाते और फसल आते ही उसे तुरंत बेच देते हैं.
एमएसपी से 350 रुपये नीचे है मौजूदा बाजार दर
इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी खामी यह है कि बाजार में आई तेजी के बावजूद मक्के की कीमत सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास भी नहीं पहुंच पाई है. वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने मक्का का एमएसपी 2,400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है.
जबकि रीगल रिसोर्सेस लिमिटेड द्वारा बढ़ाई गई दर के बाद भी मक्का महज 2,050 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है. इसका मतलब यह है कि खुले बाजार में किसानों को आज भी प्रति क्विंटल 350 रुपये का सीधा घाटा उठाना पड़ रहा है.
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आवक घटी तो खरीदार करने लगे रेट में सुधार
मंडी के जानकारों और स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, इन दिनों बाजार में मक्के की आवक बहुत कम हो गई है. फैक्ट्रियों और बड़ी कंपनियों की ओर से मक्के की मांग लगातार बनी हुई है, लेकिन बाजार में स्टॉक न होने से कीमतों में सुधार देखा जा रहा है.
यही वजह है कि बड़े खरीद केंद्रों पर अचानक दरों को बढ़ाया जा रहा है. क्षेत्र के किसानों का दर्द इसी एक लाइन में साफ झलकता है कि “जब मक्का हमारे पास था तब कोई भाव नहीं था, अब भाव आया है तो हमारे पास बेचने को मक्का नहीं बचा है.”
Thakurganj Maize Price Hike: क्या केवल कागजों तक ही सीमित है एमएसपी?
आज मक्के के बाजार में तेजी जरूर है, लेकिन इसका असली फायदा उन बड़े व्यापारियों को मिल रहा है जिन्होंने सीजन के समय किसानों से सस्ते दाम पर मक्का खरीदकर स्टॉक कर लिया था.
ऐसे में सीमांचल के किसानों के बीच यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि आखिर सरकार द्वारा एमएसपी घोषित करने का क्या फायदा, जब उन्हें अपनी उपज के लिए हमेशा घाटा ही उठाना पड़ता है. किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सरकारी खरीद केंद्रों को समय पर चालू किया जाए ताकि उन्हें बिचौलियों की लूट से बचाया जा सके.
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लेखक के बारे में
By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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