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प्रात: छह बजे विद्यालय पहुंचने में शिक्षकों को झेलनी पड़ रही है परेशानी

शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने स्कूल के पुराने समय में फेरबदल किया है. तय किए गए समय के अनुसार बच्चों को सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे तक स्कूल में पढ़ाई करनी है.

ठाकुरगंज (किशनगंज).शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए शिक्षा विभाग ने स्कूल के पुराने समय में फेरबदल किया है. तय किए गए समय के अनुसार बच्चों को सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे तक स्कूल में पढ़ाई करनी है. सरकारी स्कूलों में इस गर्मी में पढ़ाई जारी है. बच्चों सुबह छह बजे तक स्कूल जाना तथा बीच दोपहरी में 12 बजे वापस घर लौटना पड़ रहा है. उन्हें अहले सुबह जागना पड़ता है. देर रात सोने तथा अहले सुबह उठा दिये जाने के कारण बच्चों की नींद पूरी नहीं हो पा रही. सुबह सबेरे अधिकांश नाश्ता नहीं कर पाते. ठीक ऐसे ही हालात इलाके के शिक्षक-शिक्षिकाओं की भी है. कुछ तो भूखे पेट स्कुल जाकर बच्चों को पढ़ाने को विवश है तो कुछ शिक्षक और शिक्षिकाएं बासी रोटी खाकर विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने को विवश है. बताते चले इन दोनों सरकारी स्कूल सुबह 6 बजे खुल जा रहे हैं. शिक्षक-शिक्षिकाओं को सुबह 6 के पहले स्कूल पहुंचना होता है. ये जल्दी उन्हें सुबह 6 बजे स्कूलों में होने वाले फोटो सेशन के लिए होता है. जिसमें सभी शिक्षकों की उपस्थिति जरूरी होती है. फोटो सेशन में शामिल नहीं होने पर उन्हें उस दिन अनुपस्थित मान लिया जाएगा. इसलिए वह जल्दी समय पर स्कूल पहुंचना चाहते हैं. इस बारे में कई शिक्षिकाओं का कहना है वे 5 घंटे भी सो नहीं पा रही है. इसकी वजह से परिवार के अन्य सदस्य भी परेशान है. स्कुलों के समय के बदलने से उन्हें समय से भोजन नहीं मिलने उन्हें पूरी नहीं होने की वजह से शिक्षकों के साथ परिवार का भी दिनचर्या बिगड़ने लगा है. हालत यह है कि सुबह स्कूल जाने के लिए शिक्षिकाएं रात में ही रोटी बना कर रख दे रही हैं. वह अपने लिए भी वही लेकर जा रही हैं. अपने बच्चों के लिए भी यही लंच छोड़ कर जा रही है. क्योंकि सुबह 6 बजे स्कूल पहुंचने के बाद स्कूल से दोपहर 1:30 बजे निकलने का समय होता है. यानी जब तक वे घर पहुंचे दोपहर 2 बज जाता है. स्कुल में कड़ी मेहनत के बाद जब कोई भी महिला थकी हारी घर पहुँचती है तो उसके हालत का अनुमान लगाया जा सकता है. सबसे ज्यादा दिक्कत उन महिलाओं को हो रही है जो अपने घर में महिला सदस्य के रूप में अकेली है. बातचीत के क्रम में इन शिक्षिकाओं ने कहा कि वे करीब 3:30 बजे से 4 बजे सुबह बिस्तर छोड़ती हैं. घर का काम नित्य क्रिया के बाद बर्तनों की आवाज से घर में बाकी लोग जग जाते है जिससे उनके साथ परिवार के बाकी सदस्य भी परेशान है.

अभिभावक भी चिंतित

इस मामले में अर्जुन यादव, मुन्ना अंसारी आदि अभिभावकों ने बताया कि अहले सुबह बच्चे कुछ खाना नहीं चाहते. स्कूलों में पंखे तक की व्यवस्था नहीं है. दोपहर में धूप झेलकर घर पहुंचने पर बच्चे हाथ मुंह धोए बिना पंखा के सामने बैठ जाते हैं. इससे शरीर तापांतर को संतुलित नहीं कर पाता और बच्चे बीमार पड़ जाते हैं.

छोटे-छोटे बच्चों को हो रही परेशानी

अभिभावक गौरी मंडल, लालू मंडल, असरफी पासवान का कहना है कि सबसे अधिक दिक्कत छोटे-छोटे बच्चों को हो रही है. बीच दोपहर में 12 बजे स्कूल में छुट्टी कर दी जा रही है. यह आदेश अव्यवहारिक है. पूर्व के वर्षों में स्कूल सुबह 6.30 बजे शुरू से 11.30 बजे तक संचालित होते रहे हैं. इससे धूप तेज होने से पहले बच्चे और शिक्षक घर लौट जाते थे. दोपहर 12 बजे स्कूलों की छुट्टी करने का कोई मतलब नहीं है.

क्या कहते है डॉक्टर

इस मामले में डॉक्टर एके झा कहते है कि तेज तापमान में बच्चों के देर तक खाली पेट रहने, पानी का कम सेवन आदि उन्हें बीमार बना रहा है. प्रतिदिन सुबह चार-पांच बजे उठना बच्चों के स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं है. जीवन शैली में काफी बदलाव आया है. गांवों में भी बच्चे अब देर रात में सोते हैं. ऐसे में सुबह चार-पांच बजे जगना और तैयार होकर घर से निकल जाना कठिन है. ऐसे में बच्चों की नींद पूरी नहीं हो पा रही. जब बच्चों को नींद पूरी नहीं होगी तो वे स्कूल में तनाव में रहेंगे. उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जायेगा. सुबह पांच बजे बच्चे ठीक से नाश्ता भी नहीं कर पाएंगे. भूखा पेट रहना उनके लिए ज्यादा परेशानी वाला.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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