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आराधना की तैयारी: विद्या की देवी को आकार देने में जुटे मूर्तिकार, जिले में दिखने लगी सरस्वती पूजा की रौनक

Updated at : 11 Jan 2026 6:26 PM (IST)
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आराधना की तैयारी: विद्या की देवी को आकार देने में जुटे मूर्तिकार, जिले में दिखने लगी सरस्वती पूजा की रौनक

विद्या की देवी को आकार देने में जुटे मूर्तिकार

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मिट्टी, बांस व पुआल से गढ़ी जा रही मां की मनोहारी छवि, ईको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की मांग बढ़ी

किशनगंज.

नगर संवाददाता जिले में विद्या, बुद्धि व कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना के महापर्व की तैयारियां परवान चढ़ने लगी हैं. पूजा की तिथि नजदीक आते ही मूर्तिकारों के शिविरों में हलचल तेज हो गयी है. मां शारदे को साकार रूप देने के लिए कलाकार दिन-रात एक कर रहे हैं. शहर से लेकर गांव तक मूर्ति निर्माण केंद्रों पर मिट्टी की सौंधी खुशबू के बीच मां सरस्वती की आकर्षक और मनोहारी प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं, जिससे बाजारों में भी त्योहार की रंगत लौटने लगी है.

बजट का असर : छोटे व मध्यम आकार की मूर्तियों पर जोर

इस वर्ष मूर्ति बाजार पर बजट का असर साफ दिख रहा है. मूर्तिकारों के अनुसार, स्कूलों, कॉलेजों और मोहल्ला समितियों द्वारा सीमित खर्च में पूजा का संकल्प लिया गया है. यही वजह है कि इस बार विशाल मूर्तियों के बजाय छोटे व मध्यम आकार की साधारण लेकिन सुंदर प्रतिमाओं की मांग अधिक है. साथ ही, पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण लोग प्राकृतिक मिट्टी और रंगों से बनी प्रतिमाओं को तरजीह दे रहे हैं.

महंगाई की मार, फिर भी कला से समझौता नहीं

प्रतिमा निर्माण में जुटे कारीगरों ने बताया कि स्थानीय मिट्टी, बांस, पुआल व रंगों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में वृद्धि हुई है. कच्चे माल की बढ़ती लागत के बावजूद कलाकार अपनी आजीविका व आस्था को ध्यान में रखते हुए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे हैं. मां सरस्वती को श्वेत वस्त्रों में वीणा धारण किए व हंस पर विराजमान रूप में बेहद बारीकी से उकेरा जा रहा है. चेहरे की सौम्यता और शांतिपूर्ण भाव-भंगिमा पर विशेष कारीगरी की जा रही है.

पंडालों की बनने लगी योजना, प्रशासन की भी नजर

एक ओर जहां मूर्तिकारों के पास पूर्व बुकिंग के लिए ग्राहकों की भीड़ पहुंचने लगी है, वहीं दूसरी ओर पूजा समितियों ने पंडाल निर्माण व सजावट की रूपरेखा तैयार कर ली है. जिला प्रशासन ने भी स्पष्ट निर्देश दिया है कि पूजा के दौरान पर्यावरण के नियमों का पालन किया जाए और विसर्जन केवल निर्धारित स्थलों पर ही हो. कुल मिलाकर, प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिए जाने के साथ ही पूरा जिला भक्तिमय और उल्लासपूर्ण माहौल में डूबने को तैयार है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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