पौआखाली में बालू माफियाओं का अवैध कारोबार जारी, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

नदी से बालू उठवाते बालू माफिया
सुबह करीब 4 बजे से ही नदी से बालू निकालने का काम शुरू कर दिया जाता है. चौक-चौराहों पर नजर रखने के लिए लोगों को तैनात किया जाता है, जो प्रशासन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं और किसी कार्रवाई की सूचना तुरंत ट्रैक्टर चालकों तक पहुंचा देते हैं.
पौआखाली से रणविजय की रिपोर्ट:
किशनगंज: नगर पंचायत पौआखाली के पबना पुल, सीमलबाड़ी, पश्चिम डुमरिया और भौलमारा नदी क्षेत्रों में बालू माफियाओं की गतिविधियां लगातार जारी हैं. इन इलाकों से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हुए रोजाना दर्जनों ट्रैक्टरों के जरिए अवैध बालू का उत्खनन और परिवहन धड़ल्ले से किया जा रहा है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन और खनन विभाग इस पूरे मामले पर मौन साधे हुए हैं, जिससे उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
अहले सुबह से शुरू होता है अवैध उत्खनन
सूत्रों के अनुसार माफियाओं ने एक संगठित नेटवर्क तैयार कर रखा है. सुबह करीब 4 बजे से ही नदी से बालू निकालने का काम शुरू कर दिया जाता है. चौक-चौराहों पर नजर रखने के लिए लोगों को तैनात किया जाता है, जो प्रशासन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं और किसी कार्रवाई की सूचना तुरंत ट्रैक्टर चालकों तक पहुंचा देते हैं.
बिना रॉयल्टी मोटी कमाई
प्रतिबंधित क्षेत्रों से निकाले जा रहे बालू की बिक्री मनमाने दामों पर की जा रही है. पौआखाली में यह बालू गुणवत्ता के आधार पर 2,000 रुपये प्रति सीएफटी से भी अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है. बिना किसी रॉयल्टी और चालान के चल रहे इस कारोबार से माफिया मोटा मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है.
इस अवैध खनन से नदियों का स्वरूप भी बिगड़ रहा है और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है.
प्रशासन पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है. कभी-कभार दो-चार ट्रैक्टरों पर कार्रवाई कर इसे दिखावे तक सीमित कर दिया जाता है.
स्थानीय लोगों में नाराजगी है कि ट्रैक्टरों की तेज आवाज और रफ्तार से क्षेत्र में दहशत का माहौल है और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इस अवैध कारोबार को किसका संरक्षण प्राप्त है और प्रशासन चुप क्यों है.
पौआखाली में बालू का यह अवैध कारोबार अब संगठित अपराध का रूप लेता जा रहा है. यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह न केवल प्राकृतिक संसाधनों के लिए बल्कि सरकारी खजाने के लिए भी गंभीर नुकसान साबित हो सकता है.
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By Shruti Kumari
श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। अपने समाचार पोर्टल पर कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट निर्माण में अनुभव हासिल किया। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।
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