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नेमुगुरी में मातृ पोषण संवाद: बच्चे के पहले 1000 दिन, टीकाकरण और परिवार नियोजन पर रहा खास फोकस

Updated at : 27 Nov 2025 8:11 PM (IST)
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नेमुगुरी में मातृ पोषण संवाद: बच्चे के पहले 1000 दिन, टीकाकरण और परिवार नियोजन पर रहा खास फोकस

जिसमें सही पोषण, समय पर जांच और नियमित स्वास्थ्य सेवाएं ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम कर सकती हैं

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किशनगंज

जिले के ठाकुरगंज प्रखंड के भातगांव पंचायत अंतर्गत नेमुगुरी ग्राम स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में मातृ पोषण संवाद एवं जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के साथ छोटे बच्चों की माताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. कार्यक्रम का उद्देश्य मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य को मजबूत करना, बच्चे के पहले 1000 दिनों के महत्व, नियमित टीकाकरण और परिवार नियोजन के बारे में सही एवं व्यावहारिक जानकारी देना था. यह कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग, और यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें सही पोषण, समय पर जांच और नियमित स्वास्थ्य सेवाएं ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम कर सकती हैं और आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ बना सकती हैं.

माताओं के लिए आहार सूची और देखभाल के व्यावहारिक टिप्स

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने माताओं के बीच उम्र के अनुसार बच्चों का आहार चार्ट वितरित किया और 6 माह बाद पूरक आहार शुरू करने की सही विधि, हाथ धोने की आदत, साफ बर्तन में भोजन देना, खुले में शौच से बचना तथा नियमित वजन और स्वास्थ्य जांच के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यदि माताओं के पास सही और वैज्ञानिक जानकारी हो, तो किसी भी बच्चे को कुपोषित रहने की आवश्यकता नहीं है और हर घर से एक स्वस्थ बच्चा निकल सकता है.आंगनबाड़ी सेविका सहर बानो ने कहा कि ऐसे संवाद कार्यक्रमों से माताओं का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे रोजमर्रा की पोषण संबंधी गलतियों को पहचानकर सुधार करने लगती हैं. उन्होंने माताओं से अपील की कि वे “कम लेकिन सही” आहार सिद्धांत अपनाएँ, बार-बार एक जैसा भोजन देने की बजाय विविधता लाएँ और बीमारी के दौरान भी डॉक्टर की सलाह से हल्का, पौष्टिक भोजन देना जारी रखें.

मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने संदेश में कहा कि जिले में मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. उन्होंने बताया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की समय पर एएनसी जांच, आयरन-फोलिक एसिड की नियमित उपलब्धता, एनीमिया की जांच, सुरक्षित संस्थागत प्रसव और नवजात की विशेष देखभाल के लिए व्यवस्था की गई है.डॉ. चौधरी ने माताओं से अपील की कि वे गर्भावस्था के दौरान सभी निर्धारित जांच समय पर कराएँ, आयरन-फोलिक एसिड की गोलियाँ नियमित रूप से लें और प्रसव हमेशा अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में ही कराएं, ताकि जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सके.

टीकाकरण और परिवार नियोजन पर विशेष ज़ोर

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ एखलाकुर रहमान ने कहा कि नियमित टीकाकरण बच्चे के लिए सुरक्षा कवच है और जन्म से लेकर पाँच वर्ष तक सभी टीके समय पर लगवाना हर परिवार की जिम्मेदारी है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत टीबी, पोलियो, खसरा, डिप्थीरिया, टेटनस, न्यूमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए सभी टीके निःशुल्क उपलब्ध हैं, इसलिए किसी भी टीके को न छोड़ा जाए और यदि तारीख छूट जाए, तो अगले सत्र में अवश्य पूरा कराया जाए.उन्होंने परिवार नियोजन पर भी विशेष बल दिया और कहा कि छोटे परिवार, स्वस्थ परिवार की सोच को अब व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है. दो गर्भ के बीच पर्याप्त अंतर रखना, असुरक्षित गर्भधारण से बचना और स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध सुरक्षित साधनों (कंडोम, गोली, IUCD, नसबंदी आदि) का उपयोग न केवल मां की सेहत की रक्षा करता है, बल्कि प्रत्येक बच्चे को बेहतर पोषण और देखभाल देने में भी सहायक होता है.

यूनिसेफ का सहयोग और समुदाय की बढ़ती जागरूकता

यूनिसेफ के बीएमसी एजाज अफजल ने कहा कि समुदाय स्तर पर चल रहे मातृ पोषण संवाद जैसे कार्यक्रम सरकार और विकास साझेदारों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम हैं. उनका लक्ष्य यह है कि हर मां तक पोषण, स्तनपान, टीकाकरण, स्वच्छता और परिवार नियोजन से जुड़ी विज्ञान-आधारित जानकारी सरल भाषा में पहुंचे और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव दिखे.उन्होंने कहा कि बच्चे की सेहत केवल अस्पताल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समुदाय की संयुक्त जिम्मेदारी है. सही जानकारी, सही समय पर सही सेवा और सही निर्णय इन्हीं के सहारे बच्चों का स्वस्थ भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है.

नेमुगुरी की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी, बच्चों के भविष्य पर बढ़ा ध्यान

बैठक में नेमुगुरी की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और सवाल-जवाब से साफ दिखा कि ग्रामीण माताएँ अब अपने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और भविष्य के प्रति पहले से अधिक सजग हो रही हैं. कई माताओं ने यह संकल्प भी व्यक्त किया कि वे गर्भावस्था में जांच नहीं टालेंगी, बच्चों का टीकाकरण समय पर करवाएंगी और परिवार नियोजन पर पति व परिवार के साथ खुलकर बातचीत करेंगी.नेमुगुरी में आयोजित यह मातृ पोषण संवाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य शिक्षा को सशक्त बनाने, माताओं को वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने और मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य, नियमित टीकाकरण तथा परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुआ.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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