सीमांचल में मक्का बना किसानों का ‘गोल्डन क्रॉप’, बढ़ी आमदनी और कारोबार

Edited by Shruti Kumari
Updated:
विज्ञापन

सीमांचल में तैयार मक्का की फसल, जिसने किसानों की आर्थिक स्थिति को नई मजबूती दी है.

Maize Farming in Seemanchal: सीमांचल में मक्का की बढ़ती मांग और रिकॉर्ड दामों ने किसानों की आय बढ़ाई. इथेनॉल फैक्ट्रियों और व्यापारियों से करोड़ों का कारोबार.

विज्ञापन

ठाकुरगंज से रिपोर्ट:

Maize Farming in Seemanchal: सीमांचल की कृषि अर्थव्यवस्था में मक्का ने नई क्रांति ला दी है. कभी सामान्य फसल मानी जाने वाली मक्का आज किसानों के लिए सबसे भरोसेमंद नगदी फसल बनकर उभरी है. बढ़ती औद्योगिक मांग, इथेनॉल फैक्ट्रियों की जरूरत और देशभर से पहुंच रहे खरीदारों ने मक्का की कीमतों को नई ऊंचाई दी है. इसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है और पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलती नजर आ रही है.

रिकॉर्ड दामों ने बढ़ाई किसानों की आय

पिछले दो वर्षों में मक्का के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. जहां पहले मक्का 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल बिकती थी, वहीं अब इसकी कीमत 1800 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है. बेहतर मूल्य मिलने से किसानों को लागत के मुकाबले डेढ़ से दो गुना तक रिटर्न प्राप्त हो रहा है.

यही वजह है कि किसान अब धान और अन्य पारंपरिक फसलों की जगह बड़े पैमाने पर मक्का की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

गांव-गांव पहुंच रहे खरीदार

मक्का की बढ़ती मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब किसानों को खरीदार तलाशने की जरूरत नहीं पड़ रही. कटाई शुरू होते ही व्यापारी गांवों और खेतों तक पहुंचकर सीधे किसानों से खरीदारी कर रहे हैं.

इससे किसानों को न केवल बेहतर कीमत मिल रही है, बल्कि विपणन की समस्या भी काफी हद तक समाप्त हो गई है.

गलगलिया बना मक्का व्यापार का प्रमुख केंद्र

सीमांचल में मक्का कारोबार के विस्तार में गलगलिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. यहां स्टार्च उद्योगों के विस्तार और औद्योगिक मांग बढ़ने से प्रतिदिन हजारों क्विंटल मक्का देश के विभिन्न राज्यों में भेजी जा रही है.

स्थानीय बाजारों में भी मक्का व्यापार से जुड़े नए कारोबारी सक्रिय हुए हैं, जिससे रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है.

इथेनॉल उद्योग बना बड़ा खरीदार

केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति ने मक्का की मांग को नई गति दी है. पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के लक्ष्य के तहत इथेनॉल फैक्ट्रियां बड़ी मात्रा में मक्का की खरीद कर रही हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इथेनॉल उद्योग की मांग बढ़ने के साथ मक्का का बाजार और मजबूत होगा.

एक बीघा में हजारों रुपये का मुनाफा

किसानों के अनुसार एक बीघा मक्का की खेती में औसतन 16,500 रुपये तक की लागत आती है. वहीं उत्पादन 20 से 25 क्विंटल तक हो रहा है. वर्तमान बाजार दरों के आधार पर किसानों को प्रति बीघा 20 हजार से 35 हजार रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है.

यही कारण है कि सीमांचल के अधिकांश किसान अब मक्का को अपनी प्राथमिक फसल बना रहे हैं.

सीमांचल की नई आर्थिक पहचान

एक समय बाढ़, पलायन और पिछड़ेपन के लिए चर्चित सीमांचल अब कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के नए मॉडल के रूप में उभर रहा है. मक्का उत्पादन और व्यापार ने इस क्षेत्र को नई पहचान दी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रसंस्करण उद्योगों और भंडारण सुविधाओं का विस्तार हुआ तो आने वाले वर्षों में सीमांचल देश के प्रमुख मक्का उत्पादक और व्यापारिक क्षेत्रों में शामिल हो सकता है.

ALSO READ: पढ़ाई के प्रति जज्बा : गर्मी छुट्टी खत्म, किशनगंज में बारिश के बीच ट्रैक्टर-ट्रॉली पर स्कूल पहुंचे बच्चे

विज्ञापन
Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन