पढ़ाई के प्रति जज्बा : गर्मी छुट्टी खत्म, किशनगंज में बारिश के बीच ट्रैक्टर-ट्रॉली पर स्कूल पहुंचे बच्चे

Edited by Shruti Kumari
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ट्रैक्टर-ट्रॉली से स्कूल जाते आदर्श मध्य विद्यालय ठाकुरगंज के बच्चे

School Reopening After Summer Vacation: गर्मी की छुट्टियों के बाद खुले स्कूलों के पहले दिन बारिश और बदले शेड्यूल के बीच बच्चे ट्रैक्टर-ट्रॉली व साइकिल से विद्यालय पहुंचे.

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ठाकुरगंज से रिपोर्ट:

School Reopening After Summer Vacation: गर्मी की लंबी छुट्टियों के बाद सोमवार को स्कूलों की घंटी तो बजी, लेकिन पहले ही दिन शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों से घिरी नजर आई. लगातार हो रही बारिश, अंतिम समय में बदला गया विद्यालय संचालन का समय और ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं की कमी का असर स्कूलों में साफ दिखाई दिया. कई विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति सामान्य दिनों की अपेक्षा काफी कम रही.

ट्रैक्टर-ट्रॉली बनी बच्चों की स्कूल बस

पहले दिन की सबसे मार्मिक तस्वीर ग्रामीण इलाकों से सामने आई. छोटे-छोटे बच्चे कंधों पर बस्ता लटकाए ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार होकर विद्यालय पहुंचते नजर आए. छुट्टियों के बाद स्कूल लौटने का उत्साह बच्चों में साफ दिखा, लेकिन बारिश और अव्यवस्थित परिस्थितियों ने उनकी राह आसान नहीं रहने दी.

कहीं बच्चे भीगते हुए साइकिल से स्कूल पहुंचे तो कहीं ट्रैक्टर-ट्रॉली ही उनके लिए स्कूल बस का विकल्प बन गई. इसके बावजूद शिक्षा के प्रति बच्चों का उत्साह कम नहीं दिखा.

समय परिवर्तन से बढ़ी परेशानी

जानकारी के अनुसार विद्यार्थियों को पहले से डे-स्कूल व्यवस्था के तहत सुबह 9:30 बजे विद्यालय पहुंचने की सूचना दी गई थी. हालांकि शिक्षा विभाग ने रविवार देर शाम विद्यालय संचालन के समय में बदलाव का निर्देश जारी कर दिया.

देर रात सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित इस सूचना की जानकारी बड़ी संख्या में अभिभावकों, विद्यार्थियों और शिक्षकों तक समय पर नहीं पहुंच सकी. इसका सीधा असर पहले दिन की उपस्थिति पर देखने को मिला.

बारिश और कीचड़ ने बढ़ाई मुश्किलें

लगातार बारिश के कारण ग्रामीण सड़कों पर कीचड़ और जलजमाव की स्थिति बनी रही. कई बच्चों के लिए विद्यालय तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था. बावजूद इसके बड़ी संख्या में बच्चे कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए विद्यालय पहुंचे.

स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर परिवहन व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में विद्यार्थियों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

शिक्षकों पर भी दिखा असर

बदले हुए समय को लेकर बनी भ्रम की स्थिति का असर शिक्षकों पर भी दिखाई दिया. कई विद्यालयों में शिक्षक निर्धारित समय से देर से पहुंचे, जिससे शुरुआती घंटों में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित रहीं.

कक्षाओं में छुट्टियों के बाद लौटने वाली सामान्य रौनक की जगह कई स्थानों पर खाली बेंचें नजर आईं, जिससे पहले दिन का माहौल कुछ फीका रहा.

जमीनी चुनौतियों को उजागर करती तस्वीर

स्कूल खुलने के पहले दिन की तस्वीर ने एक बार फिर ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की जमीनी चुनौतियों को सामने ला दिया. बारिश, संसाधनों की कमी और अंतिम समय में लिए गए प्रशासनिक निर्णयों के बावजूद बच्चों का विद्यालय पहुंचना यह साबित करता है कि शिक्षा के प्रति उनकी लगन और सीखने की इच्छा हर बाधा से बड़ी है.

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