सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने रजिस्ट्री ऑफिस की रौनक लौटा

Updated at : 25 May 2024 10:23 PM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने रजिस्ट्री ऑफिस की रौनक लौटा

रजिस्ट्री ऑफिस में लोटी रौनक

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ठाकुरगंज सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक बार फिर निबंधन कार्यालयों में रौनक लौट आई है. मंगलवार से शुरू हुई रजिस्ट्री के बाद प्रत्येक दिन आंकड़ा बढ़ रहा है. इन चार दिनों में 21 मई को 39, 22 मई को 65, 24 मई को 70 लोगों ने ठाकुरगंज निबंधन कार्यालय से रजिस्ट्री करवायी. जबकि इसके पूर्व के दिनों की बात करे तो 15 मई को 12, 16 मई को 16, 18 मई को 12 तो 20 मई को केवल 5 लोगों ने रजिस्ट्री करवायी गयी.

बताते चले सुप्रीम कोर्ट ने जबसे पुराने नियम के अनुसार निबंधन करने का आदेश दिया है. उसके बाद से निबंधन कार्यालय में रौनक लोटी है. बताते चले अब भू-धारक अपने पूर्वजों के नाम से जमाबंदी किए जमीन का भी निबंधन कर सकते है. वही इस मामले में रजिस्ट्री ऑफिस में कार्यरत कातिबों ने बताया कि पुराने नियम के लागू होने से भूमि निबंधन की संख्या में बढ़ोतरी होगी. इससे राजस्व में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.

22 फरवरी को हाई कोर्ट ने लगायी थी रोक

हाईकोर्ट ने 22 फरवरी को जिसके नाम पर जमीन की जमाबंदी कायम थी. उसे ही भूमि रजिस्ट्री करने का नियम लागू किया था. जिसके अनुसार केवल वही व्यक्ति जमीन की बिक्री कर सकता था. जिसके नाम पर जमाबंदी ट्रांसफर हो. इसका मतलब था कि अंचल कार्यालय में जिस व्यक्ति का नाम रजिस्टर टू में दर्ज है, वही जमीन की बिक्री कर सकता है, अन्य व्यक्तियों के बिक्री करने पर रोक लग गई थी. अब नए नियम को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर लागू करने का आदेश अप निबंधन महानिरीक्षक मनोज कुमार संजय ने दिया था. नियम का फायदा आने वाले दिनों में मिलने की बात और भूमि विवादों में भारी कमी आने की बात कही गई थी. इसके बाद निबंधन कार्यालयों में भूमि रजिस्ट्री में काफी कमी आई थी. हाई कोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी और कहा कि जमीन की जमाबंदी के नाम होने की अनिवार्यता फिलहाल समाप्त हो गयी है. अब कोई भी पूर्वजों के नाम की जमीन की खरीद-बिक्री कर सकता है. ऐसे में फिर से एक बार बिहार में भू-माफियाओं की बहार आ जायेगी. अब जमीन जमाबंदी धारकों के वंशज और सगे संबंधी भूमि खरीद-बिक्री का काम शुरू कर देंगे. जबकि हाई कोर्ट के आदेश के बाद तीन महीनों में उनकी सक्रियता में कमी आई थी और भू-धारकों को काफी राहत भी मिली थी.

बढ़ते भूमि विवाद के कारण आय था नया नियम

बिहार सरकार ने जमीन विवाद में होने वाली लड़ाई-झगड़े को रोकने के लिए 10 अक्तूबर 2019 को नए नियम को लागू किया था. नए नियम के तहत जिनके नाम से जमाबंदी होगी, वही अपनी जमीन की बिक्री कर सकते थे. इसके खिलाफ कई लोगों ने हाई कोर्ट का शरण लिया. लेकिन हाईकोर्ट ने 25 अक्तूबर 2019 को सरकार के फैसले पर रोक लगा दी. तबसे यह मामला चलता आया. 9 फरवरी 2024 को हाई कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही बताते हुए लोगों का याचिका खारिज कर दिया. 22 फरवरी 2024 से जिनके नाम से जमाबंदी है. वही जमीन की बिक्री करने के नए नियम को लागू कर दिया गया था. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. न्यायमूर्ति एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की खंडपीठ ने पुराने नियम पर जमीन रजिस्ट्री करने का आदेश को सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट के जारी आदेश के बाद कातिब से लेकर आम लोगों तक में खुशी का माहौल है.

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