किशनगंज में संरक्षण की बातें कागजों में, लेकिन कूड़ेदान बना ठाकुरगंज बाजार का पुराना कुआं

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Kishanganj News: ठाकुरगंज बाजार का ऐतिहासिक कुआं, जो कभी जीवनदायिनी जल स्रोत था, आज कूड़े के ढेर में बदल चुका है. संरक्षण के दावों के बीच इसकी बदहाली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है

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Kishanganj News: ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट. कभी लोगों की प्यास बुझाने वाला ठाकुरगंज बाजार का ऐतिहासिक कुआं आज बदहाली की तस्वीर बन चुका है. यह जल स्रोत, जो कभी जीवन का आधार था, अब कचरे के ढेर में बदल गया है. कुएं के अंदर और आसपास प्लास्टिक, पत्तियां और सड़े-गले कचरे के कारण दुर्गंध फैल रही है और स्थानीय लोग परेशान हैं.

कभी जीवनदायिनी जल स्रोत, आज उपेक्षा का शिकार

स्थानीय लोगों के अनुसार यह कुआं बाजार की पहचान हुआ करता था. राहगीर यहां रुककर पानी पीते थे और आसपास के दुकानदार भी इसी पर निर्भर रहते थे. लेकिन देखरेख के अभाव में इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और आज यह पूरी तरह उपेक्षित है.

कूड़े के ढेर में बदलता ऐतिहासिक कुआं

आज स्थिति यह है कि कुएं में खुलेआम कचरा फेंका जा रहा है. इससे न केवल जल स्रोत प्रदूषित हो गया है, बल्कि आसपास का वातावरण भी खराब हो रहा है. बाजार आने-जाने वाले लोग दुर्गंध से परेशान हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है.

संरक्षण के दावे और जमीनी हकीकत

एक तरफ सरकार जल संरक्षण और पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए बड़े अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ ठाकुरगंज का यह कुआं उपेक्षा का शिकार है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे नाराजगी बढ़ रही है.

ऐतिहासिक धरोहर पर मंडराता खतरा

बुजुर्गों का कहना है कि यदि समय रहते इस कुएं की सफाई और संरक्षण नहीं किया गया तो यह पूरी तरह खत्म हो जाएगा. यह केवल जल स्रोत नहीं बल्कि बाजार की ऐतिहासिक पहचान भी है, जिसे बचाना बेहद जरूरी है.

नगर पंचायत से कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों ने नगर पंचायत से तत्काल सफाई अभियान चलाने, कुएं का सौंदर्यीकरण करने और चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाने की मांग की है. लोगों का कहना है कि इसे जल्द संरक्षित धरोहर के रूप में विकसित किया जाना चाहिए.

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प्रत्युष प्रशांत

लेखक के बारे में

By प्रत्युष प्रशांत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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