मछली पालन से जीविका दीदियों को मिल रहा बेहतर आय का जरिया, बढ़ रही आत्मनिर्भरता

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तालाब में मछली डालती जीविका दीदी

जीविका की डीपीएम अनुराधा चंद्रा ने बताया कि जिले में जीविका के माध्यम से चार तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है, जिनमें कोचाधामन में दो तथा दिघलबैंक और बहादुरगंज में एक-एक तालाब शामिल है. यह कार्य जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत संचालित किया जा रहा है

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किशनगंज से रंजीत रामदास की रिपोर्ट:

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किशनगंज: जिले की जीविका दीदियों के लिए मछली पालन एक बेहतर आय का साधन बनता जा रहा है. पारंपरिक रूप से इस व्यवसाय से जुड़ी और नई जुड़ रही जीविका दीदियां अब जीविका के माध्यम से मत्स्य पालन कार्य को आगे बढ़ा रही हैं.

इसी क्रम में शुक्रवार को कोचाधामन प्रखंड के दो तालाबों में जीविका दीदियों द्वारा मछली के बीज डाले गए. इसमें रोहू, कतला और ग्रास कार्प जैसी प्रजातियों की मछलियां शामिल हैं.

जीविका की डीपीएम अनुराधा चंद्रा ने बताया कि जिले में जीविका के माध्यम से चार तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है, जिनमें कोचाधामन में दो तथा दिघलबैंक और बहादुरगंज में एक-एक तालाब शामिल है. यह कार्य जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत संचालित किया जा रहा है.

अब तक इन तालाबों से करीब 2264 किलोग्राम मछली की बिक्री की जा चुकी है, जिससे लगभग 3.30 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई है. इन चारों तालाबों के संचालन में कुल 15 जीविका दीदियां शामिल हैं, जो जीविका मत्स्य उत्पादक समूह से जुड़ी हुई हैं.

तालाबों के बेहतर संचालन में जीविका के युवा पेशेवर ऋषभ प्रसाद और प्रेम शंकर तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं. दीदियों द्वारा तालाब की मेंड़ पर सब्जी की खेती भी की जा रही है, जिससे अतिरिक्त आय का स्रोत बन रहा है.

कोचाधामन प्रखंड के राजधानी जीविका महिला उत्पादक समूह द्वारा संचालित तालाब से अब तक 510 किलोग्राम मछली उत्पादन हुआ है, जिससे लगभग 79 हजार रुपये की आय हुई है. वहीं क्रांति मछली उत्पादक समूह द्वारा संचालित तालाब से 674 किलोग्राम मछली उत्पादन कर 94 हजार रुपये से अधिक का कारोबार किया गया है.

जीविका के माध्यम से पहली बार शुरू हुआ यह मत्स्य पालन कार्य अब सफल होता दिख रहा है, जिससे जीविका दीदियों में उत्साह बढ़ा है और यह उनके लिए स्थायी आजीविका का मजबूत साधन बनता जा रहा है.

तालाबों की सफाई, चुना और गोबर डालकर तैयारी, मछली बीज डालना, चारा प्रबंधन और बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया में जीविका दीदियों की सक्रिय भागीदारी से उनका कौशल और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ रहे हैं.

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